Omicron India: कितना खतरनाक है कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट?

कोरोना के SARS-CoV-2 के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (B.1.1.529) का पहला केस दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर को मिला था.  WHO ने इसकी जांच के बाद इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VOC) की श्रेणी में रखा है.

जिसका डर था वही हुआ. हफ्तेभर पहले तक कोरोना वायरस का सबसे अलग और घातक माने जाने वाला वैरियंट ऑमिक्रॉन देश की सीमाओं के बाहर खबरों के हवालों से फैल रहा था, वह अब संक्रमितों के रूप में भीतर प्रवेश कर गया है. भारत में कर्नाटक में दो मरीजों के मिलने के बाद तीसरा मरीज गुजरात के जामनगर में मिला है, जबकि इससे पूर्व दो मामले कर्नाटक में मिले थे.

मीडिया सूत्रों मुताबिक गुजरात में जामनगर मिला व्यक्ति जिम्बॉब्वे से लौटा था. जामनगर के इस बुजुर्ग व्यक्ति के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए हैं.

बता दें कि सामान्य कोरोना की जांच की तरह ही कोविड के इस वैरिएंट के लिए RT-PCR टेस्ट पर्याप्त है, लेकिन पुष्टि के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग जरूरी है.   

तेजी से फैलता है वायरस,  10 दिनों में 35 देश चपेट में  
ओमिक्रॉन कोरोना का सबसे तेजी से फैलने वाला वैरियंट है. साउथ अफ्रीका से फैले कोरोना के इस वैरियंट की संक्रमण की गति का अंदाजा ही इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने तकरीबन 10 दिनों में ही 35 देशों को चपेट में ले लिया था जबकि अपने शुरुआती दिनों में केवल 24 घंटे में 11 हजार से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया था.

एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण डेल्टा वैरिएंट था, ऐसे में ओमिक्रॉन तीसरी लहर का कारण बन सकता है. यही नहीं मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह वैरिएंट 5 साल से कम बच्चों के लिए घातक हो सकता है.

इधर, भारत में ओमिक्रॉन केस मिलने के बाद पाबंदियों का सिलसिला शुरू हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध कब तक लगाएगी? क्योंकि जिस तरह से ओमिक्रॉन के मामले सामने आ रहे हैं लग रहा है कि लॉकडाउन की स्थितियां बन सकती है. खासतौर पर विदेशों से आ रहे नागरिकों ने ज्यादा चिंता बढ़ाई है. 

क्यों है ओमिक्रॉन वैरिएंट ऑफ कंसर्न? 

दुनिया के कई देशों में इस समय कोरोना की तीसरी, चौथी यहां तक की पांचवी लहर भी चल रही है. ऐसे में ओमिक्रॉन एक बड़ी तबाही का कारण बन सकता है. कोरोना के SARS-CoV-2 के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (B.1.1.529) का पहला केस दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर को मिला था.  WHO ने इसकी जांच के बाद इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VOC) की श्रेणी में रखा है. हालांकि दुनियाभर के एक्सपर्ट यह मानते हैं कि संक्रामक होना और जानलेवा होना दोनों ही बातों में बहुत अंतर होता है.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक आईसीएमआर पैनल के एक एक्सपर्ट चीफ एपिडमोलॉजिस्ट डॉक्टर समीरन पांडा मानते हैं कि जो वायरस तेजी से फैलता है यानी की संक्रामक होता है वह जानलेवा नहीं होता है. उनके मुताबिक वैज्ञानिक तथ्यों पर यह बात साबित भी हो चुकी है. हालांकि इस वैरिएंट को लेकर शोध जारी हैं. 

इधर, दुनिया में सबसे पहले ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता लगाने वाली साउथ अफ्रीकन मेडिकल एसोसिएशन की चेयरपर्सन डॉक्टर एंजेलिक कोएट्जी का मानना है कि यह वैरिएंट फैलता तेजी से है लेकिन घातक नहीं दिखाई पड़ता.

 

इंटरनेशनल मीडिया रिपेार्ट्स के अनुसार ओमिक्रॉन के लक्षण बहुत हल्के हैं और इन लक्षणों के साथ मरीज को हॉस्पिटल में एडमिट कराने की जरूरत नहीं होती है. यही नहीं यह लक्षण डेल्टा वैरिएंट से बहुत अलग हैं.

कैसे बचें ओमिक्रॉन से?

कोरोना वायरस को WHO ने भी वैरिएंट ऑफ कंसर्न माना है. खास बात यह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिक अभी कोरोना के इस वैरिएंट पर रिसर्च कर रहे हैं, लिहाजा इस पर बहुत सी बातें अभी सामने आनी बाकी हैं, लेकिन जहां तक सुरक्षा की बात है ओमिक्रॉन से बचने के लिए भारत सरकार ने अपनी ओर से गाइडलाइन भी जारी की है.

ओमिक्रॉन से बचने के लिए-

  • टीका अनिवार्य होना चाहिए. जिन लोगों ने कोरोना की वैक्सीन नहीं ली है उन्हें जल्द से जल्दी वैक्सीन की दोनों डोज लेना चाहिए.
  • आईसीएमआर के मुताबिक ओमिक्रॉन से लेकर कारोना के हर वैरिएंट पर कोविशिल्डट और कोवैक्सीन दोनों ही वैक्सीन प्रभावी हैं.
  • कोरोना से बचने के लिए बेसिक्स को ना भूलें.
  • मुंह पर मास्क लगाएं.
  • बार-बार हाथ धोएं.
  • सैनेटाइजर का उपयोग करें
  • और खासतौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें व भीड़भाड़ वाली जगहों पर ना जाएं.
  • अच्छा खाना खाएं और अपनी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग रखें.
  • नियमित व्यायाम करें और ऐसी किसी चीज का सेवन ना करें जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती हो. 
error: Content is protected !!