सेहत के लिए कितना खतरनाक है प्लास्टिक?

पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को देखते हुए सरकार ने तंबाकू, गुटखा की प्लास्टिक पैकिंग सहित तमाम खाद्य पदार्थों के लिए प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगा दी है. पर्यावरण ही नहीं प्लास्टिक हमारे स्वास्थ्य को भी बर्बाद करता है, जिसपर सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है.

क्या कहती है रिसर्च
पिछले दिनों एम्स अर्थात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने जो निष्कर्ष दिया है वह बेहद चौंकाने वाला है. प्लास्टिक उत्पादों में पाया जाने वाला जहरीला रसायन विसफिनोल ए लिवर व किडनी की गंभीर बीमारियों, स्तन कैंसर, गर्भपात, नपुंसकता जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है.

मार्केट में बिकने वाली प्लास्टिक पन्नियां या कप वगैरह रिसाइकिल्ड होते हैं. इनको बनाने में विसफिनोल-ए नामक केमिकल प्रयोग में लाया जाता है. इसके अलावा प्लास्टिक को रंगीन बनाने के लिए भी विभिन्न रसायनों का इस्तेमाल होता है. इन सबके चलते प्लास्टिक पात्र में गर्म पदार्थ रखा जाए या ठंडा, उसमें प्लास्टिक के खतरनाक रसायन घुल जाते हैं.

क्या कहते हैं डॉक्टर?
एम्स के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर वीर सिंह के अनुसार सिर्फ पोलिथिन की पन्नियां ही नहीं, रिसाइकिल किए गए रंगीन या सफेद प्लास्टिक जार, कप या इस तरह के किसी भी उत्पाद में खाद्य व पेय पदार्थ रखना तथा सेवन करना नुकसानदेह है. चाय का प्रयोग तो जानलेवा हो सकता है. यह गर्भपात, स्तन कैंसर का कारण एवं पुरूषों की सेक्स तथा प्रजनन क्षमता को मिटाने वाला साबित हो रहा है.

आर्टिमिज हिल्स इंस्टीट्यूट गुड़गांव के डॉ. प्रवीण गुप्ता भी प्लास्टिक उत्पादों के खतरों की पुष्टि करते हैं. उनका कहना है कि प्लास्टिक के घातक रसायनों का प्रवाह खाद्य व पेय पदार्थों के जरिए शरीर में होता है. इससे मस्तिष्क का विकास व उसका कार्य बाधित होता है. बच्चों की स्मरण शाक्ति क्षीण होती है. विसफिनोल ए पैंक्रियाज ग्रंथि में इंसुलिन बनाने वाले अल्फा सेल को भी प्रभावित करता है. इस कारण डायबिटीज के ग्राफ में बढ़ोत्तरी हो रही है. रोगरोधी क्षमता भी घट रही है.

डॉ. विजय कुमार सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट) लखनऊ के निदेशक हैं. एम्स से आए निष्कर्षों के बाबत उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा जी हां, विसफिनोल ए और प्लास्टिक उत्पादों का रंग इंसान का दुश्मन है.

बचें प्लास्टिक के उपयोग से
इन उत्पादों में गर्म चाय या किसी भी तरह का खाद्य पेय पदार्थ रखने पर ये रसायन व रंग रिसकर सामग्री में मिल जाते हैं. वे कहते हैं कलर्ड झिल्लियों में पैक चाय तो कतई नहीं पीनी चाहिए. रिसाइकिल्ड प्लास्टिक उत्पादों से बचने में ही भलाई है.

विकास मानव

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