Influenza : इन्फ्लुएंजा के लक्षण और कारण, फ्लू का उपचार?

मौसम के बदलने के साथ-साथ शरीर में बुखार (fever) आ ही जाता है. वैसे बुखार भी कई तरह का होता है जिसमें से एक प्रकार है 'इन्फ्लुएंजा' (Influenza) जिसे हम सामान्य भाषा में 'फ्लू' (flu) कहते हैं. इन्फ्लुएंजा RNA वायरस (RNA Virus) के जरिये होता है जो जानवरों, पक्षियों और इन्सानों की श्वसन नली को संक्रमित करता है. इसकी वजह से शरीर में बुखार, उल्टी, दस्त, गले में खराश जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

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मौसम के बदलने के साथ-साथ शरीर में बुखार (fever) आ ही जाता है. वैसे बुखार भी कई तरह का होता है जिसमें से एक प्रकार है ‘इन्फ्लुएंजा’ (Influenza) जिसे हम सामान्य भाषा में ‘फ्लू’ (flu) कहते हैं. इन्फ्लुएंजा RNA वायरस (RNA Virus) के जरिये होता है जो जानवरों, पक्षियों और इन्सानों की श्वसन नली को संक्रमित करता है. इसकी वजह से शरीर में बुखार, उल्टी, दस्त, गले में खराश जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.

इन्फ्लुएंजा के कारण (Influenza causes)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) या फ्लू (flu) की चपेट में कोई भी व्यक्ति आ सकता है. ये खासतौर पर एक दूसरे के जरिये आसानी से फैल जाता है और उन लोगों को जल्दी चपेट में ले लेता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease resistance) कम होती है. इन्फ्लुएंजा के कुछ कारण (Influenza causes) होते हैं जिनकी वजह से ये फैलता है.

इन्फ्लुएंजा (influenza) फैलने का कारण मुख्य तौर पर वायरस है. ये तीन तरह के वायरस A, B और C के कारण होता है. वायरस A और B मौसमी प्रकोप फैलाते हैं और तेजी से एक शरीर से दूसरे शरीर में फैलते जाते हैं. वहीं वाइरस C श्वास संबन्धित फ्लू के लक्षणों का कारण बनता है.

वायरस A जानवरों कई पालतू जानवरों में पाया जाता है जिनमें मुर्गी, बतख, व्हेल, घोडा, सूअर, सील में होता है. वहीं वाइरस B सिर्फ इन्सानों में पाया जाता है.

इन्फ्लुएंजा या फ्लू सांस के जरिये भी एक शरीर से दूसरे शरीर में पहुचता है.

इन्फ्लुएंजा (Influenza) से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में यदि कोई व्यक्ति आता है या उसे छूता है और छूकर अपने हाथों को अपनी नाक या मुह पर रखता है तो भी इन्फ्लुएंजा फैल सकता है.

इन्फ्लुएंजा के लक्षण (Influenza symptoms)

इन्फ्लुएंजा का उपचार (Influenza treatment) करवाने के लिए हमें इन्फ्लुएंजा के लक्षण (Influenza symptoms) की जानकारी होना जरूरी है तभी हम इसका उपचार करवा पाएंगे और यदि एक व्यक्ति को हो गया तो दूसरे को होने से रोक पाएंगे. इन्फ्लुएंजा के लक्षण निम्न हैं.

– इन्फ्लुएंजा से संक्रमित रोगी को 100F से लेकर 103F का बुखार आता है. बच्चों के शरीर में बुखार का तापमान इससे भी ज्यादा हो सकता है.
– निस्तब्धता से संक्रमित व्यक्ति के चेहरे पर निस्तब्धता या पसीना आने जैसे लक्षण नजर आते हैं.
– इन्फ्लुएंजा से पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार के साथ ठंड भी लगती है.
– इन्फ्लुएंजा से पीड़ित व्यक्ति को गले में खराश, सर्दी-जुखाम, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान महसूस होना जैसे लक्षण नजर आते हैं.

इन्फ्लुएंजा से बचाव (Influenza prevention)

इन्फ्लुएंजा या फ्लू से बचा जा सकता है लेकिन तब जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में ना आए जो इन्फ्लुएंजा से संक्रमित हो. अगर आपके घर में किसी को इन्फ्लुएंजा (influenza) है तो बहुत कम चांस होते है की आप इससे संक्रमित न हो पाएँ. हालांकि आप इसके लिए कुछ बचाव कर सकते हैं जिनसे आप इससे संक्रमित न हो.

अपनी सुरक्षा के लिए अपने हाथों को साबुन या अल्कोहल बेस्ड सेनिटाइजर से धोएँ. क्योंकि जब हम संक्रमित हाथों से अपने मुह या अपनी नाक को छूते हैं तो इन्फ्लुएंजा संक्रमित हो जाते हैं.

इन्फ्लुएंजा के वायरस ठोस सतहों पर भी होते हैं और कम से कम 8 घंटे तक टिके रहते हैं. आप अपने घर या ऑफिस पर जिस भी चीज को ज्यादा स्पर्श करते हैं उसे संक्रमण रहित पोछे या स्प्रे से साफ करें.

अगर कोई व्यक्ति पहले से ही इन्फ्लुएंजा से संक्रमित है तो उसे अपने मुंह पर मास्क लगाना चाहिए साथ ही छींकते समय मुह पर कपड़ा रखना चाहिए ताकि ये वायरस दूसरे व्यक्ति को ना संक्रमित करे.

इन्फ्लुएंजा से बचने के लिए आप हर साल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन (Influenza vaccine) का टीका लगवा सकते हैं. ये टीका छह माह से छोटे बच्चों को नहीं लगाया जाता है बाकी सभी को लगाया जाता है. इससे इन्फ्लुएंजा को पूरी तरह तो नहीं रोका जा सकता लेकिन काफी हद तक इसके संक्रमण को कम किया जा सकता है.

इन्फ्लुएंजा का इलाज (Influenza treatment)

इन्फ्लुएंजा की जड़ वायरस है और इस वायरस के असर को खत्म करने के लिए आप दवाइयाँ ले सकते हैं जो डॉक्टर द्वारा बताई जाती है. हालांकि इसके असर को पूरी तरह से खत्म करने में दवाइयाँ भी सक्षम नहीं हैं लेकिन ये दवाइयाँ इसके लक्षणों को कम करने में कारगर होती है.

इन्फ्लुएंजा या फ्लू के लक्षण अधिकांश व्यक्तियों में एक से दो हफ्तों तक देखें जाते हैं. इस समय तक रोगी में इसके लक्षण नजर आते हैं जैसे सिरदर्द, थकान, सर्दी, खराश आदि. इसके बाद रोगी अपने आप स्वस्थ हो जाता है. हालांकि आप इसके इंतज़ार में कोई लापरवाही न बरतें. जितना जल्द हो सके डॉक्टर से परामर्श ले.

नोट: यह लेख आपकी जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. यदि आप संबंधित बीमारी से ग्रस्त हैं अथवा बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी तरह के उपाय ना करें और बीमारी को लेकर धारणा ना बनाएं. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक है.

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