प्रदूषण : एक दिन तोहफे में देगा कई बीमारियां

बढ़ती आबादी के साथ साथ दुनिया में प्रदुषण भी बढ़ रहा है. प्रदूषण का सबसे बड़ा इफ़ेक्ट पूरी मानव जाति और जानवरों पर पड़ता है. ताजा हवा न मिलने से इंसान शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार इंसान हो रहा है.

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बढ़ती आबादी के साथ साथ दुनिया में प्रदुषण भी बढ़ रहा है. प्रदूषण का सबसे बड़ा इफ़ेक्ट पूरी मानव जाति और जानवरों पर पड़ता है. ताजा हवा न मिलने से इंसान शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार इंसान हो रहा है. राजधानी और इसके आस-पास के इलाकों में बढ़ता प्रदूषण लोगों को बीमार बना रहा है.

प्रदूषण से होने वाली समस्याओं औेर उनके निदान के बारे में जानें-

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प्रदूषण के सामान्य प्रभाव-
– आंखों में जलन.
– बाहर निकलते ही सांस लेने में प्रॉब्लम.
– शरीर में खुजली होना.
– अक्सर खांसी बने रहना. गले में प्रॉब्लम होगा.
– प्रदुषण की वजह से हेयर फॉल की प्रॉब्लम होना

इसके अतिरिक्त प्रदूषण कैंसर का भी कारण बन रहा है

प्रदूषण से होने वाली बीमारियां-

दिल की बीमारी.

ज्यादा प्रदूषित स्थान पर रहने वाले लोगों को हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता हे. हार्ट से जुड़ी अन्य बीमारियों की आशंका भी अधिक रहती है.

दिल के मरीजों को घर से बाहर निकलते समय मास्क का यूज़ करना चाहिए.

सांस की नली पर प्रभाव-

प्रदूषण का सीधा प्रभाव सांस की नली पर पड़ता है, सांस लेने में मुश्किल होती है, जलन महसूस होती है.
प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचें.

आंखों पर प्रभाव-

आंखों में जलन, पानी आना, खुजली होना और ड्राइनेस होना. आंखों की आम समस्याएं हैं. फैक्ट्री एरिया के पास रहने वालों में या फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों को अक्सर यह शिकायत होती है.

वैसे जिन सड़कों पर अधिक बस, ट्रक, कारें, स्कूटर भी आतेे जाते हों, उसके आस-पास के इलाकों में रहनेे वालों को भी यह प्रॉब्लम रहती है.आंखों में लुब्रिकेंट्स ड्राप्स डालते रहें. इनसे पल्यूशन से होने वाली जलन और ड्राइनेस कम होती है. बाहर निकलें तो अच्छी क्वालिटी के सनग्लास लगाकर जाएं.

हार्मोन्स पर प्रभाव –

पल्यूशन वाली हवा में कई मेटल मौजूद होते हैं जब इनकी मात्रा बढ़ती है तो इससे हार्मोन्स गड़बड़ा जाते हैं. जिससे विवाहित जोड़ों में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है और प्रजनन शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है, जिस कारण प्री-मच्योर डिलीवरी, कम वजन वाले बच्चों का जन्म, मिस कैरिज की समस्याएं बढ़ जाती है.

इन सबसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है. ऐसे में ज्यादा प्रदूषित स्थानों पर जानें से बचें, मास्क लगाकर निकलें.

स्कीन और बालों पर प्रभाव-

स्कीन पर दाग धब्बों का होना, स्कीन रूखी होना, बेजान होना, उम्र से पहले झुर्रियां पड़ना आदि त्वचा संबंधी आम समस्याएं प्रदूषण के कारण होती हैं.

बालों में डैंड्रफ बढ़ना, बालों का गिरना, बाल रूखें बेजान होना, बालों का टेक्सचर खराब होना, यह सब बढ़ते प्रदूषण का बालों पर प्रभाव है.

क्या करे ?

बाहर निकलते समय सिर ढक कर निकलें, अच्छे शैंपू-कंडीशनर का प्रयोग करें. बाल धोने से पहले बालों पर तेल लगाएं, धुले बालों पर तेल न लगाएं. बालों को सुरक्षा हेतु हेयर सीरम का प्रयोग करें.

चेहरा दिन में सादे पानी 3 से 4 बार धोएं. त्वचा की देखभाल हेतु घरेलू नुस्खों का प्रयोग करें ताकि त्वचा का बचाव हो सके.

घर में प्रदूषण को कम करें-

– साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें.

– घर पर बनावटी पौधे न रखें। नेचुरल इनडोर प्लांटस रखें.

– घर के अंदर दीया, अगरबत्ती, धूप कपूर न जलाएं। इसका धुआं भी प्रदूषण को बढ़ाता है.

– गद्दे व तकिये को धूप लगाते रहें.

– सोफे-परदों को वैक्यूम क्लीनर से साफ करते रहें.

– चादर, सोफा कवर एक दो हफ्तों के अंतराल में बदलते रहें.

– फर्नीचर पर आई धूल मिट्टी झाड़ कर साफ करते रहें.

– घर पर एक्जास्ट फैन लगाएं हो सके तो रसोई में चिमनी लगाएं ताकि खाना बनाने का धुआं घर में न फैले.

कुछ घरेलू उपाय जिनके द्वारा प्रदुषण प्रदूषण को कम किया जा सकता है-

– नाक के दोनों छेदों में गाय के घी या सरसों के तेल की दो बूंदें डालें ताकि नाक द्वारा प्रदूषण सांस की नली में न जा सके.

– शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करते रहें ताकि ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रहे और शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिले.

– इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करने हेतु गिलोय का जूस खाली पेट पिएं.

– हल्दी, शहद का प्रयोग नियमित करें.

– तुलसी की चार-पांच पत्तियों का नियमित सेवन करें। इससे सांस की नली साफ रहती है.

– नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर ठंडा कर चेहरे को धोएं.

इनके अतिरिक्त घर पर कुछ ऐसे पौधे लगाएं जिनसे आक्सीजन की मात्रा घर में बढ़ सके जैसे एलोवेरा, तुलसी, बाॅस्टन फर्न, मनीप्लांट, रबड़ प्लांट, नागफनी, बैंबू, पाम आदि. घर के बाहर अगर जगह है तो अशोक का पेड़ लगाएं.

प्रदूषण हमारी सेहत का दुश्मन है. हमें जागरूक होकर, इसका मुकाबला करना होगा ताकि आगे आने वाली पीढ़ी सेहतमंद रह सके.