Power of Attorney: पावर ऑफ एटॉर्नी क्या है, पावर ऑफ एटॉर्नी कैसे बनवाएँ?

Power of attorney इस शब्द को आपने कई बार और कई जगह पर सुना होगा. लेकिन क्या आप अभी तक पावर ऑफ एटॉर्नी क्या होता है? पावर ऑफ एटॉर्नी का क्या मतलब होता है? पावर ऑफ एटॉर्नी कितने प्रकार की होती है? पावर ऑफ एटॉर्नी कैसे बनवाते हैं? इस बारे में जानते हैं.

Power of attorney इस शब्द को आपने कई बार और कई जगह पर सुना होगा. लेकिन क्या आप अभी तक पावर ऑफ एटॉर्नी क्या होता है? पावर ऑफ एटॉर्नी का क्या मतलब होता है? पावर ऑफ एटॉर्नी कितने प्रकार की होती है? पावर ऑफ एटॉर्नी कैसे बनवाते हैं? इस बारे में जानते हैं. अगर आप पावर ऑफ एटॉर्नी के बारे में नहीं जानते हैं तो इस लेख में आपको पावर ऑफ एटॉर्नी से जुड़ी सारी जानकारी मिलेगी.

पावर ऑफ एटॉर्नी क्या होती है? | What is power of attorney?

Power of attorney एक ऐसा कानूनी दस्तावेज़ है जिसके जरिये एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को कानूनी रूप से अपना प्रतिनिधि घोषित कर सकता है. जिसे प्रतिनिधि घोषित किया जाता है उसे एजेंट तथा जो प्रतिनिधि घोषित करता है उसे प्रिंसिपल कहा जाता है. जिस व्यक्ति को एजेंट प्रतिनिधि घोषित किया जाता है वो प्रिंसिपल के बदले उसके सभी कानूनी, वित्तीय और दूसरे मामले के फैसले ले सकता है. मतलब पावर ऑफ एटॉर्नी के बाद एक एजेंट वो सभी काम कर सकता है जो पहले प्रिंसिपल कर रहा था.

पावर ऑफ एटॉर्नी कितने तरह की होती है? | Types of Power of Attorney?

पावर ऑफ एटॉर्नी बनवाने से पहले इसके प्रकार के बारे में जान लेना बेहतर है. पावर ऑफ एटॉर्नी दो तरह की होती है.

#1. जनरल पावर ऑफ एटॉर्नी (GPA)

जनरल पावर ऑफ एटॉर्नी में एक एजेंट कई सारे काम कर सकता है. जैसे प्रिंसिपल की प्रॉपर्टी बेच सकता है, कोई डील फाइनल कर सकता है, कोई लोन ले सकता है, कोई जमीन लीज पर ले सकता है, कोई सेटलमेंट कर सकता है. यानी इसमें एक एजेंट प्रिंसिपल के सभी काम कर सकता है.

#2. स्पेशल पावर ऑफ एटॉर्नी  (SPA)

इस तरह की पावर ऑफ एटॉर्नी को सिर्फ एक काम के लिए बनाया जाता है. जैसे कोई प्रिंसिपल चाहता है कि उसकी सिर्फ एक कंपनी को उसका कोई एजेंट संभाले और उसके सारे कामकाज को देखे तो स्पेशल पावर ऑफ एटॉर्नी बनाई जाती है. इसके अलावा प्रिंसिपल सिर्फ एक काम के लिए भी पावर ऑफ एटॉर्नी बनाते हैं. जैसे किसी डील को फाइनल करने के लिए.

पावर ऑफ एटॉर्नी की वैधता | Power of attorney validity

कोई भी पावर ऑफ एटॉर्नी तभी तक वैध है जब तक प्रिंसिपल और एजेंट जिंदा है. इनकी मौत के बाद ये वैध नहीं रहती है. अगर किसी दुर्घटना से प्रभावित होकर प्रिंसिपल लीगल डॉक्यूमेंट साइन करने की स्थिति में नहीं है तो पावर ऑफ एटॉर्नी समय से पहले ही समाप्त हो जाती है. प्रिंसिपल खुद भी पावर ऑफ एटॉर्नी को कैंसल कर सकता है. स्पेशल पावर ऑफ एटॉर्नी को काम खत्म होने के बाद पूरा मान लिया जाता है.

पावर ऑफ एटॉर्नी कैसे बनवाएँ? | How to make power of attorney? 

पावर ऑफ एटॉर्नी को आपको किसी वकील के जरिये बनवाना पड़ता है. इसे बनवाने के लिए प्रिंसिपल, एजेंट और दो गवाहों का होना बेहद जरूरी होता है. आमतौर पर इसका रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य तो नहीं है लेकिन जब बात प्रॉपर्टी या अचल संपत्ति की हो तो इसका रजिस्ट्रेशन करवाना ही बेहतर रहता है. इसके लिए आप नजदीकी सब रजिस्ट्रार के पास जाएँ और अपनी पावर ऑफ एटॉर्नी को रजिस्टर करवाएँ.

पावर ऑफ एटॉर्नी और रजिस्ट्री में अंतर | Difference between in power of attorney and registry

पावर ऑफ एटॉर्नी और रजिस्ट्री में काफी अंतर होता है. जब पावर ऑफ एटॉर्नी की जाती है तो आपको काम करने की पावर को ट्रांसफर किया जाता है न कि किसी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को. मतलब पावर ऑफ एटॉर्नी में आप एक वकील की भूमिका निभाते हैं जो अपने क्लाइंट के लिए काम करता है. वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री में आपको मालिकाना हक मिलता है. यदि किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री आपके नाम पर है तो आपका उस पर मालिकाना हक है. आप उसे बेच सकते हैं, तोड़ सकते हैं, बना सकते हैं या फिर किराए पर दे सकते हैं. आप अपनी प्रॉपर्टी के साथ कुछ भी कर सकते हैं.

पावर ऑफ एटॉर्नी आमतौर पर बिजनेस के लिए उपयोग की जाती है. कई बार बिजनेस का मालिक किन्हीं कारणों से बिजनेस पर ध्यान नहीं दे पाते या वे बीमार हो जाते हैं तो अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए वे पावर ऑफ एटॉर्नी के माध्यम से अपनी शक्तियों को ट्रांसफर कर देते हैं.

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