Sawan Somvar Vrat katha : सावन में पढ़ें सोमवार व्रत कथा, शिवजी करेंगे हर मनोकामना पूरी!

जो भी व्यक्ति सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत रखता है तथा सावन सोमवार की कथा सुनता है उस पर भगवान शिव की कृपा अवश्य होती है. 

सावन के महीने में शिवजी की आराधना करने से तथा व्रत करने से विशेष लाभ मिलता है. इस दौरान आपको सावन सोमवार कथा भी सुनना चाहिए. जो भी व्यक्ति सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत रखता है तथा सावन सोमवार की कथा सुनता है उस पर भगवान शिव की कृपा अवश्य होती है. 

सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat katha in Hindi) 

हिन्दू धर्म की प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार एक बहुत ही अमीर व्यापारी हुआ करता था. उसके पास धन था और नगर में उसका सम्मान था. उसके पास किसी बात की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसे बस एक बात का दुख था. उसकी संतान नहीं थी. इस बात से वो हमेशा दुखी रहता था. 

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माँ पार्वती ने पूर्ण की मनोकामना

व्यापारी और उसकी पत्नी संतान प्राप्ति की चाह में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव व माँ पार्वती की विशेष पूजा किया करते थे एवं सावन सोमवार का उपवास भी किया करते थे. 

उनकी इसी आराधना से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने एक दिन भगवान शिव से कहा कि वह व्यापारी आपका सच्चा भक्त है. हर सोमवार को वह आपका व्रत रखता है, आपकी नियमित पूजा करता है. भगवान आप इस भक्त की मनोकामना अवश्य पूर्ण करें.

पार्वती जी के काफी आग्रह पर शिवजी ने ने कहा- ‘तुम्हारे आग्रह पर मैं इस व्यापारी को पुत्र-प्राप्ति का वरदान देता हूं. लेकिन इसके पुत्र की उम्र सिर्फ 16 वर्ष ही होगी. उसी रात भगवान शिव ने उस व्यापारी को सपने में दर्शन देकर उसे पुत्र-प्राप्ति का वरदान दिया और ये भी बताया कि उसका पुत्र 16 वर्ष तक ही जीवित रहेगा.

वरदान पाकर खुश हुआ दंपत्ति

भगवान का वरदान पाकर व्यापारी को काफी खुशी हुई. लेकिन उसे इस बात का दुख भी था कि उसका पुत्र सिर्फ 16 साल ही जी पाएगा. उसने इस बात को अपने तक ही सीमित रखा और अपनी पत्नी को नहीं बताया.

कुछ दिनों बाद उनके घर एक पुत्र का जन्म हुआ. व्यापारी और उसकी पत्नी ने बहुत ही अच्छे तरीके से अपने पुत्र का लालन-पालन किया. व्यापारी अंदर ही अंदर अपने पुत्र की अल्पायु से चिंतित रहता था. 

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पुत्र का हुआ राजकुमारी से विवाह

व्यापारी का पुत्र जब 12 वर्ष का हुआ तो उसे शिक्षा के लिए काशी भेजने का निर्णय व्यापारी ने लिया. उसने पुत्र के मामा को बुलाया और कहा कि इसे काशी में शिक्षा प्राप्त करने के लिए छोड़ आओ.

जाते समय विश्राम के लिए जहां भी ठहरो वहाँ पर यज्ञ करवाना और ब्राह्मणों को भोजन कराते चलना. दोनों ने ऐसा ही किया. लंबी यात्रा के बाद वे एक नगर में पहुंचे जहां पर एक विवाह समारोह का आयोजन किया जा रहा था.

ये विवाह वहाँ की राजकुमारी का था. राजकुमारी का विवाह जिस राजकुमार से हो रहा था वो एक आँख से काना था. इस बात का पता राजकुमारी और उसके पिता को नहीं था. राजकुमार के पिता को यही चिंता सता रही थी कि अगर उन्हें ये पता चल गया तो वे रिश्ता तोड़ देंगे. 

उस राजकुमार के पिता ने व्यापारी के पुत्र को देखा तो उसके मन में विचार आया कि क्यों न इस लड़के को राजकुमार बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूँ. वर के पिता ने मामा से बात की और बदले में खूब सारा धन देने की बात की जिस पर मामा मान गए.

दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ. जब व्यापारी के बेटे का जाने का समय हुआ तो उसने राजकुमारी की चुनरी पर लिखा कि तुम्हारा विवाह मेरे साथ हुआ है, मैं काशी शिक्षा प्राप्त करने जा रहा हूं. जिससे तुम्हारा विवाह हो रहा था वो काना है. राजकुमारी ने ये पढ़कर इस काने लड़के के साथ जाने से इनकार कर दिया. 

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पुत्र की मृत्यु का समय आया

व्यापारी का बेटा काशी जाकर पढ़ाई करने लगा. साथ ही उसके मामा भी उसके साथ रहने लगे. व्यापारी का बेटा जब 16 साल का हुआ तो उसने और मामा ने एक यज्ञ किया. यज्ञ समाप्त होने पर उसने ब्राह्मणों को भोजना कराया और खूब दान किया.

उसी रात को लड़के की मृत्यु हो गई. जिसके बाद उसके मामा विलाप करने लगे. तभी वहाँ से शिवजी और माँ पार्वती गुजरे. मामा का विलाप सुनकर पार्वती जी ने कहा कि मुझसे इनके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे हैं. आप इस व्यक्ति के कष्ट को दूर करें. 

भगवान शिव की कृपा से जीवित हुआ पुत्र

भगवान शिव ने देखा कि यह तो उसी व्यापारी का पुत्र है जिसे अल्पायु का वरदान दिया था. तब वे पार्वती जी से बोले कि यह उसी व्यापारी का पुत्र है. इसे मैंने 16 साल की आयु का वरदान दिया है. इसकी आयु पूरी हो चुकी है.

तब माँ पार्वती ने भगवान शिव ने निवेदन किया कि आप इसे जीवित करें अन्यथा इसके माता-पिता इसकी मृत्यु के समाचार को सुनकर अपने प्राण त्याग देंगे. इसके पिता आपके परम भक्त हैं। वे सालों से सोमवार का व्रत कर रहे हैं. 

पार्वती जी के आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित कर दिया. लड़का जीवित हुआ तो उसके मामा आश्चर्यचकित रह गए. उन्हें बड़ी खुशी हुई और वे अपने नगर वापस लौट आए. 

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अपनी शिक्षा पूरी करके जब व्यापारी का पुत्र नगर लौट रहा था तो वो फिर से उसी नगर से गुजरा और वहाँ के राजा ने उसे तुरंत पहचान लिया. राजा ने राजकुमारी को व्यापारी के बेटे के साथ खूब सारा धन, वस्त्र और आभूषण देकर विदा किया. 

नगर पहुचते ही मामा ने एक दूत के हाथों अपने आगमन की सूचना भेजी. अपने पुत्र के जीवित लौटने की खबर पर पहले तो व्यापारी को यकीन नहीं हुआ लेकिन फिर उसने प्रसन्नतापूर्वक उनके स्वागत की तैयारी की. 

व्यापारी और उसकी पत्नी ने स्वयं को एक कमरे में बंद कर रखा था. भूखे-प्यासे रहकर वो दोनों अपने बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे. उन्होंने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो दोनों अपने प्राण त्याग देंगे.

व्यापारी का बेटा जीवित घर लौटा और अपने साथ में विवाह कर सुंदर राजकुमारी भी ले आया. इस बात से व्यापारी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बाद में शिवजी ने व्यापारी के सपने में आकर कहा कि मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर ही तेरे पुत्र को लंबी आयु दी है.

ऐसा सुनकर व्यापारी की नींद खुली और उसके दिल पर से अपने बेटे की अल्पायु का बोझ उतर गया. भगवान शिव अपने सच्चा आराधक की हर मनोकामना व्यापारी की तरह पूरी करते हैं. अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से सोमवार का व्रत करे और सावन सोमवार की कथा का श्रवण करे तो शिवजी उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं.

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