नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त 2020: दुर्गा पूजा कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन यदि आप अपने घर पर ही कलश (how to do ghatasthapana in navratri) स्थापना करने जा रहे हैं तो 17 अक्टूबर को नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट (navratri 2020 shubh muhurat october) पर होगा. यदि आप सुबह मां की स्थापना करने में असमर्थ हैं तो फिर एक मुहूर्त 11 बजकर 02 मिनट से लेकर 11 बजकर 49 मिनट तक का भी है.

अधिक मास के चलते इस बार शारदीय नवरात्रि (shardiya navratri 2020) एक माह देरी से प्रारंभ होने जा रही है. शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 17 अक्टूबर से होने जा रहा है. 17 अक्टूबर से मां की भक्ति, आस्था और आराधना के ये दिन कई मायनों में विशेष होंगे. कोरोना काल के चलते इस बार (coronavirus and shardiya navratri 2020) नवरात्रि के 9 दिन पहले की तरह रौनक में कमी आ सकती है.

दुर्गा पंडाल, गर्बा नृत्य और जगराते-झांकियों में कोरोना काल की गाइड लाइंस की छाया दिखाई देगी. ऐसे में यदि आप घर ही नवरात्रि में (shardiya navratri ghatasthapana muhurat) घट स्थापना करने जा रहे हैं और कलश स्थापना की तैयारी है तो आपके लिए जरूरी है कि आप मां की स्थापना, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि को जरूर जानें.

इस बार नवरात्रि में 58 सालों पर बाद ज्योतिषीय संयोग भी शुभ बन रहा है. (navratri jyotish upay) आपको बता दें कि इस बार नवरात्र में गुरु और शनि दोनों ही अपनी राशि में रहेंगे. (auspicious guru and shani and navratri) जहां शनि मकर राशि में तो वहीं गुरु देवता धनु राशि में विराजमान रहेंगे. ऐसे में मां की पूजा और घट स्थापना की शुभ मुहूर्त कई तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होगा.

आपको बता दें कि नवरात्रि के पहले (navratri shubh yoga) दिन यानी की प्रतिपदा तिथि पर चित्रा नक्षत्र रहेगा. यही नहीं (sarvartha siddhi yoga innavratri) इस नवरात्रि पर चार सर्वार्थ सिद्ध योग, एक त्रिपुष्कर योग और चार रवियोग बनेंगे. बता दें कि नौ दिनों में सौभाग्य, धृति और आनंद योग के कारण आप नये मकान में प्रवेश, नई खरीदी की ब्रिकी-खरीदी, फ्लैट में ग्रह प्रवेश, जमीन में निवेश, वाहन खरीदने का शुभ योग रहेगा. नवरात्रि में ग्रहों के संयोग के चलते मकर, सिंह, वृश्चिक, धनु, वृषभ और मीन राशि के जातकों के लिए फायदा होगा. इस राशि के जातक जीवन में शुभ निर्णय ले सकते हैं.

नवरात्रि के पहले दिन यदि आप अपने घर पर ही कलश (how to do ghatasthapana in navratri) स्थापना करने जा रहे हैं तो 17 अक्टूबर को नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट (navratri 2020 shubh muhurat october) पर होगा. यदि आप सुबह मां की स्थापना करने में असमर्थ हैं तो फिर एक मुहूर्त 11 बजकर 02 मिनट से लेकर 11 बजकर 49 मिनट तक का भी है.

नवरात्रि के शुभ योग
17 अक्टूबर, शनिवार- सर्वार्थसिद्धि योग,
18 अक्टूबर, रविवार- त्रिपुष्कर और सर्वार्थसिद्धि योग,
19 अक्टूबर, सोमवार-सर्वार्थसिद्धि योग, रवियोग,
20 अक्टूबर, मंगलवार- सौभाग्य और शोभन यो,
21 अक्टूबर, बुधवार-रवियोग,
22 अक्टूबर, गुरुवार- सुकर्मा और प्रजापति योग,
23 अक्टूबर, शुक्रवार- धृति और आनंद योग
24 अक्टूबर, शनिवार- सर्वार्थसिद्धि योग,
25 अक्टूबर, रविवार- रवियोग,
26 अक्टूबर, सोमवार- रवियोग

नवरात्रि में माता की कलश स्थापना की पूजा विधि (navratri puja 2020)
17 अक्टूबर को नवरात्रि के दिन यदि आप (Ghatasthapana timings in Navratri 2020) घट स्थापना करने जा रहे हैं तो आपके लिए जरूरी है कि आप कलश स्थापना और पूजा की विधि जानें. (navratri puja vidhi in hindi 2020)
सबसे पहले नहा-धोकर साफ-सुथरे वस्त्र या फिर नये वस्त्र धारण करें.
परिवार के साथ पूजा करें अथवा दांपत्य जीवन में हैं तो पति-पत्नी साथ में पूजा स्थापना के लिए बैठें.
अगरबत्ती-धूपबत्ती से वातारण को शुद्ध करें.
पूजा के हिसाब से वास्तु का ध्यान रखें.
वास्तु में उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना गया है इसलिए, उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा का स्थान रखें और (navratri puja vidhi at home in hindi)घट स्थापना के लिए स्थान चुनें.
पहले धोकर चौकी बिछाएं और उस पर कुम-कुम से स्वस्तिक बनाएं.
उसके बाद लाल रंग का वस्त्र बिछाएं.
थोड़े से चावल रखें, इसे अक्षत कहा जाता है फिर उस पर मां की प्रतिमा स्थापित करें.
एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और लोटे पर मौली बांधेंबांधें
एक नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर उसे कलश पर रख दें.
उसके बाद इस कलश को उस पात्र में रखें जिसमें आपने जौ बोएं हैं.
अखंड ज्योति जलाएं और साफ-सुथरे लाल रंग के आसन पर बैठें.
कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जल से भरा कलश, पूजा का सामान जिसमें, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, देव सुपारी, सिक्के, अशोक-आम के पत्त, नारियल, चुनरी, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार की वस्तुएं रखें.
मां के मंत्रों का जाप कर श्रद्धा से पूजा करें.
यदि किसी पुरोहित को आमंत्रित कर सकते हैं श्रेष्ठ होगा.
मां को फूल, परसाद चढ़ाएं और मां की आरती करें.

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