श्रावण मास 2018 : क्यों सोमवार को होती शिव की पूजा?

सोमवार शंकर जी को बहुत प्रिय है. इसी दिन अभिषेक होता है जिसका श्रावण मास में विशेष महत्व है. हर व्यक्ति श्रावण मास में भगवान शिव का भले ही अभिषेक ना कर पाए लेकिन वह सोमवार को शिव के दर्शन करता है और बिल्व पत्र भी अर्पित करता है.

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हिंदू धर्म में 36 करोड़ देवी देवता हैं और हर देवता का एक दिन और उसकी तिथि विशेष पूजा निर्धारित है. मूल रूप से जो त्रिदेव है यानी की ब्रह्मा, विष्णु और महेश में. जहां ब्रह्मा की पूजा ही पृथ्वी पर वर्जित है तो वहीं भगवान विष्णु और शिव के लिए भी दिन विशेष निर्धारित है.

देखा जाए तो सभी प्रमुख देवताओं के लिए एक विशेष दिन और तिथि के निर्धारण का संबंध ज्योतिष से भी है और देवता की प्रकृति से भी है. बुधवार जहां गणतपति की पूजा के लिए है तो वहीं मंगलवार हनुमान जी की ऐसे ही गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है. ऐसे ही भगवान शिव की पूजा के लिए जो दिन निर्धारित है वह है सोमवार.

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क्यों होती है सोमवार को शिव की पूजा

शिवभक्ति का मास सावन पूरी दुनिया में शिव भक्तों को प्रिय है. इस पूरे मास में शिव मंदिरों में विशेष विशेष अनुष्ठान होते हैं. विशेष महत्व सोमवार का है.

सोमवार शंकर जी को बहुत प्रिय है. इसी दिन अभिषेक होता है जिसका श्रावण मास में विशेष महत्व है. हर व्यक्ति श्रावण मास में भगवान शिव का भले ही अभिषेक ना कर पाए लेकिन वह सोमवार को शिव के दर्शन करता है और बिल्व पत्र भी अर्पित करता है.

 

दरअसल, सोमवार को शिव पूजा की परंपरा बहुत पुरानी है. सोम का अर्थ सौम्य होता है और चूंकि शंकर जी शांत हैं और भोलेनाथ हैं इसलिए भी सोमवार का दिन शिव का दिन माना जाता है.

ज्योतिष के मुताबिक सोमवार को शिव की आराधना का अर्थ है चंद्रदेव को प्रसन्‍न करना. सोमवार के अर्थ की व्याख्या करते हुए हम सोमेश्‍वर को दो तरह से समझ सकते हैं.

सोम का अर्थ है चंद्रमा और एश्वर का अर्थ है वह देव, जिसे सोमदेव भी अपना देव मानते हैं यानी शिव. कहा जाता है कि चंद्रमा भगवान शिव की पूजा करते थे जिससे उन्‍हें निरोगी काया मिली. इसलिए भी सोमवार को भगवान शिव पूजे जाते हैं. हालांकि मान्यता यह भी है कि सोम में ॐ है और भोलेनाथ तो ॐ स्वरूप ही हैं इसलिए सोमवार को शिव की पूजा का लाभ ज्यादा मिलता है.

श्रावण मास में शिव की पूजा का महत्व 

कहते हैं भगवान शिव बहुत भोले हैं. यदि उनसे सच्चे मन से प्रार्थना की जाए और उन्हें याद किया जाए तो वे हर पीड़ा और दुख को हर लेते हैं. 

यदि आप शनि की साढ़े साती से पीड़ित हैं या फिर आपकी कुंडली में शनि पीड़ित हैं तो इस श्रावण माह में भगवान शिव की विशेष पूजा करें. वैसे आप चाहें तो भगवान शिव की बारह महीने पूजा कर सकते हैं. लेकिन यदि आप सावन महीने में शिव जी को बिल्व पत्र और उनका अभिषेक करेंगे तो आपकी हर परेशानी दूर होगी और बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे.