क्यों पसंद है शिव को बिल्व पत्र? कैसें करें अर्पित

शिव जी को बिल्व पत्र क्यों प्रिय है इसकी मूलकथा योगिनीतंत्रम में आती है, जिसमें नारद जी से भगवान शिव ने बिल्व पत्र पसंद होने की कथा विस्तार से कही है. इस ग्रंथ के अनुसार नारजी ने जब पूछा कि आपको इस संसार में सबसे प्रिय क्या है? और आप कैसे प्रसन्न होते हैं? तो शिव ने कहा मुझेे सबसे प्रिय बिल्व पत्र ही है. प्रसिद्ध बिल्वाष्टकम् में बेल-पत्र के गुणों और शिव पर अर्पित करने के महत्व के बारे में भी बताया गया है.

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शिवभक्ति का मास सावन पूरी दुनिया में शिव भक्तों को प्रिय है. इस पूरे मास में शिव मंदिरों में विशेष विशेष अनुष्ठान होते हैं. शंकर जी का अभिषेक श्रावण मास में विशेष महत्व रखता है. हर व्यक्ति श्रावण मास में भगवान शिव का भले ही अभिषेक ना कर पाए लेकिन वह बिल्व पत्र जरूर अर्पित करता है.

शिव लिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने का महत्व   ?

बिल्व पत्र या बेल पत्र और भोलेनाथ का संबंध अनोखा है. यदि एक भी बिल्व पत्र श्रावण मास में शिव को चढ़ाया जाए तो कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है.

शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाने के पीछे वैसे तो कई पौराणिक कथाएंं हैं. प्रसिद्ध बिल्वाष्टकम् में बेल-पत्र के गुणों के बारे में बताया है और यह भी बताया है कि यह पत्र शिव को क्यों प्रिय है. बिल्वाष्टकम् में कुछ इस तरह से बिल्व पत्र के बारे में बताया गया है. आप चाहें तो श्रावण मास में इसका पाठ जरूर कर सकते हैं. 

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् ।
त्रिजन्मपाप-संहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।

त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रै: कोमलै: शुभै: ।
शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।

अखण्डबिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्धयन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।

शालिग्रामशिलमेकां विप्राणां जातु अर्पयेत्।
सोमयज्ञ-महापुण्यमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।

दन्तिकोटिसहस्त्राणि वाजपेयशतानि च ।
कोटिकन्या-महादानमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।

लक्ष्म्या: स्तनत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्।
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।
अघोरपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रत: शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।

विल्वाष्टकमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
सर्वपापविनिर्मुक्त: शिवलोकमवाप्नुयात्।

इति बिल्वाष्टकं सम्पूर्णम्। (साभार)

क्यों चढ़ाते हैं शिव लिंग पर बिल्व पत्र

लेकिन शिव जी को बिल्व पत्र क्यों प्रिय है इसकी लेकिन मूलकथा योगिनीतंत्रम में आती है, जिसमें नारद जी से भगवान शिव ने बिल्व पत्र पसंद होने की कथा विस्तार से कही है.

इस ग्रंथ के अनुसार नारजी ने जब पूछा कि आपको इस संसार में सबसे प्रिय क्या है? और आप कैसे प्रसन्न होते हैं?

शिव जी ने कहा- नारदजी! मुझे भक्ति का भाव और सरल सहज मन से भक्ति करने वाले प्रियजन सबसे प्रिय हैं. यही नहीं मुझे जल के साथ-साथ बिल्वपत्र बहुत प्रिय हैं, जो अखंड बिल्वपत्र मुझे श्रद्धा से अर्पित करते हैं, मैं उन्हें अपने लोक में स्थान देता हूं.

नारद जी के जाने के बाद शिव जी ने पार्वती को कहा- हे देवी बिल्व के पत्ते मेरी जटा के हैं. त्रिपत्र यानी 3 पत्ते ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद की तरह हैं. जबकि शाखाएं समस्त शास्त्र स्वरूप हैं.

शिव कहते हैं- बिल्ववृक्ष को पृथ्वी का कल्पवृक्ष समझें, जो ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप है. स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था. इस तरह योगिनीतंत्रम में भगवान शिव ने पार्वती को बिल्व पत्र की पूरी कथा यहीं सुनाई है.

कैसे चढ़ाएं शिव जी को बिल्व पत्र?

शिव जी को बिल्व पत्र कई तरह से चढ़ाते हैं लेकिन कुछ बातों का सदैव ध्यान रखना चाहिए. बेलपत्र उल्टा रखकर अर्पण करना चाहिए. पत्र में चक्र और वज्र नहीं होने चाहिए. पत्र साबुत होने चाहिए.

कीड़ों द्वारा बनायें हुए सफेद चिन्हों को चक्र कहते हैं और डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि बिल्व पत्र कटे या फटे न हों और ये तीन से लेकर 11 दलों तक हों.

इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चूंकी रूद्र के 11 अवतार हैं, इसलिए शिव को 11 दलों वाले बिल्वपत्र प्रिय हैं.

शिव जी की पूजा में ध्यान रखें ये बातें

बिल्व पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों तक पाप नष्ट हो जाते हैं. शिव के साथ पार्वती जी की पूजा जरूर करनी चाहिए. पूजन करते वक्त रूद्राक्ष की माला पहनकर भस्म से तीन तिरछी लकीरों त्रिपुंड जरूर लगाएं.

फोटो साभार : http://dic.mp.nic.in
फोटो साभार : http://dic.mp.nic.in

 

ध्यान रखें शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं लेना चाहिए. शिव जी की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करें, यही नहीं शिव जी पर केंवड़ा व चम्पा के फूल भी नहीं चढ़ाने चाहिए.

श्रावण मास में शिव की पूजा का महत्व 

कहते हैं भगवान शिव बहुत भोले हैं. यदि उनसे सच्चे मन से प्रार्थना की जाए और उन्हें याद किया जाए तो वे हर पीड़ा और दुख को हर लेते हैं.

इस बार शनिवार से श्रावण महीना शुरू होने जा रहा है ऐसे में यदि आप शनि की साढ़े साती से पीड़ित हैं या फिर आपकी कुंडली में शनि पीड़ित हैं तो इस श्रावण माह में भगवान शिव की विशेष पूजा करें.

वैसे आप चाहें तो भगवान शिव की बारह महीने पूजा कर सकते हैं. लेकिन यदि आप सावन महीने में शिव जी को बिल्व पत्र और उनका अभिषेक करेंगे तो आपकी हर परेशानी दूर होगी और बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे.

(संदर्भयोगिनीतंत्रम और बिल्वाष्टकम्. कुछ अन्य बातोंं को विद्वानों से संपर्क कर आपसेे साझा किया गया है.हम उनकेे आभारी हैं.)     

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