Stress and health: कहीं आपकी बीमारी की वजह तनाव तो नहीं

एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार विविध समस्याओं को लेकर डॉक्टर्स के पास जाने वाले लोग शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से परेशान होते हैं. वहीं एक शोध से यह भी पता चला है कि अक्सर जब किसी शारीरिक या मानसिक चैलेंज का सामना करने में व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है तो, वह पहले मानसिक और बाद में शारीरिक रूप से परेशान रहने लगता है. दिमाग में टेंशन होने के कई कारण हो सकते हैं.

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एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार विविध समस्याओं को लेकर डॉक्टर्स के पास जाने वाले लोग शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से परेशान होते हैं. वहीं एक शोध से यह भी पता चला है कि अक्सर जब किसी शारीरिक या मानसिक चैलेंज का सामना करने में व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है तो, वह पहले मानसिक और बाद में शारीरिक रूप से परेशान रहने लगता है. दिमाग में टेंशन होने के कई कारण हो सकते हैं. 

पहचानें तनाव के लक्षण (know the common signs of stress)

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मस्तिष्क और पाचनतंत्र वेगस नर्व्स से जुड़े रहते हैं. स्ट्रेस्ड होने से शरीर में डाइजेशन में हेल्पफुल बैक्टीरिया की कमी आ जाती है और डाइजेशन बिगड़ने लगता है. कॉर्टिसोल से शरीर के इम्यून सेल्स डेमेज होने से बॉडी में जर्म और वायरस से लड़ने की क्षमता कम जाती है और तनावग्रस्त होने पर सर्दी-खांसी व छोटी-मोटी बीमारियां होने लगती हैं.

जब आप कुछ ज़्यादा ही चिंतित रहने लगे और खुद को डिप्रेस्ड महसूस करने लगे तो पैनिक अटैक का खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक तनाव रहने पर हमारी मैमोरी पर भी इसका असर पड़ता है. ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने लगती है. वक़्त रहते तनाव को कम नहीं किया जाए तो डिप्रेशन में जाने की आशंका बढ़ जाती है.

तनाव होने पर हारमोन कॉर्टिसोल स्किन सेल्स में इन्फ़्लेमेट्री कंपाउंड्स रिलीज़ करता है, जिससे सोरायसिस, एक्ज़िमा, एलोपीशिया, रोजेसी और ऐक्ने जैसी स्किन प्रॉब्लम बढ़ जाती हैं. नींद न आना और शरीर में थकान रहना भी तनाव के ही लक्षण हैं.  

जानिए तनाव के लक्षण, कारण, इलाज (what causes stress and treatment medication)

डाइजेशन सिस्टम बिगड़ने पर आप गुड बैक्टीरिया सप्लिमेंट्स ले सकते हैं. साथ ही अपने इम्यून सिस्टम को सुधरने के लिए अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर उसे बेहतर बनाएं. यदि स्मोकिंग और ड्रिंकिंग करते हैं तो तुरंत छोड़ दें. अपनी डाइट में फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज से बनी चीज़ें शामिल करें. 

डेली रूटीन में व्यायाम को शामिल करें, जिससे एन्डॉर्फ़िन हारमोन का स्त्राव होगा. एन्डॉर्फ़िन नैचुरल पेनकिलर है. आप योग और मेडिटेशन से लाभ प्राप्त कर सकते हैं. कई अध्ययनों में प्राणायाम को भी स्ट्रेस कम करने में मददगार माना गया है.

अचानक स्किन संबंधी समस्याएं शुरू होने पर पहले भरपूर नींद लेने की कोशिश करें. खाने में शक्कर की मात्रा को कम कर दें, इससे स्किन सेल्स का इन्फ़्लेमेशन कम होगा. ऐक्ने को हटाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा एक्सफ़ॉलिएट न करें. त्वचा के रूखेपन को कम करने तथा खुजली से निजात पाने के लिए किसी स्किन वाले डाक्टर से सलाह लें.

(नोट : यह लेख आपकी जागरूकता, सतर्कता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. यदि किसी बीमारी के पेशेंट हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.)