कैसे करें सनबाथ? कितना फायदेमंद है सूर्य स्नान

सनबाथ यानी की सूर्य की तपिश और गर्मी में बिना कपड़े के रहना. एक तरह से धूप में नहाना. सूर्य स्नान के कई फायदे हैं. नियमित रूप से सूर्य स्नान करते रहने से हर उम्र की हर बीमारी दूर होती है. स्त्री-पुरूष हो या बच्चे सनबाथ में सूर्य की किरणें शरीर में भीतर तक प्रवेश कर जाती है और बीमारियों के कीटाणुओं को नष्ट कर देती है.

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सनबाथ यानी की सूर्य की तपिश और गर्मी में बिना कपड़े के रहना. एक तरह से धूप में नहाना. सर्दियों में सनबाथ का मजा तो और भी बढ़ जाता है. सूर्य स्नान के कई फायदे हैं. नियमित रूप से सूर्य स्नान करते रहने से हर उम्र की हर बीमारी दूर होती है. स्त्री-पुरूष हो या बच्चे सनबाथ में सूर्य की किरणें शरीर में भीतर तक प्रवेश कर जाती है और बीमारियों कीटाणुओं को नष्ट कर देती है.

सूर्य स्नान का महत्व

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सूर्य स्नान यानी सनबाथ के कई फायदे हैं. सूर्य कि किरणें पसीने द्वारा शरीर में स्थित विकारों को बाहर निकालकर अपनी पोषक शक्ति से बॉडी को नई एनर्जी देती है. सूर्य की किरणें टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने, घावों को भरने तक में सहायक होती हैं. यूं तो सूर्य-स्नान किसी भी मौसम में किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ठंड का मौसम सबसे लाभकारी माना जाता है.

कब करना चाहिए सूर्य स्नान

सूर्य-स्नान के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है. दूसरे दर्जे का समय संध्याकाल का होता है. इसके लिए हल्की किरणें ही उत्तम होती है. तेज धूप में बैठने से अनेक त्वचा रोग हो सकते हैं. सूर्य-स्नान को आरंभ में आधे घंटे से ही शुरू करना चाहिए. फिर धीरे-धीरे इसे बढ़ाते हुए एक डेढ़ घंटे तक ले जाना चाहिए.

कैसे करें सूर्य स्नान

सूर्य-स्नान करते समय मात्रा तौलिया पहनकर ही धूप में बैठना चाहिए. शरीर बिना कपड़े का होना चाहिए ताकि सूर्य की किरणों को शरीर सोख सके. अगर एकांत और सुरक्षित स्थान हो तो तौलिया को भी हटाया जा सकता है. सूर्य-स्नान करते समय सिर को तौलिया या हरे पत्तों से ढक लेना चाहिए. केला और कमल जैसा ठंडी प्रकृति वाला पत्ता मिल जाए तो बहुत ही अच्छा होता है. नीम के पत्तों का गुच्छा बनाकर भी सिर पर रखा जा सकता है.

सूर्य स्नान में कौन से अंग रखें खुले

जितनी देर सूर्य-स्नान करें, उतने समय को चार भागों में बांटकर अर्थात् पेट का भाग, पीठ का भाग, दाई करवट और बाईं करवट को सूर्य की किरणों के सामने बारी-बारी से रखना चाहिए, जिससे हर अंग में समान रूप से धूप लग जाए. धूप सेवन करने के बाद ताजे पानी में भिगोकर निचोड़े हुए मोटे तौलिए से शरीर के हर अंग को रगड़ना चाहिए, जिससे गर्मी के कारण रोमकूपों द्वारा भीतर से निकाला हुआ विकार शरीर से ही चिपका न रह जाये. धूप का सेवन खाली पेट ही करना चाहिए. धूप सेवन के कम से कम दो घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कुछ नहीं खाना चाहिए.

किस स्थान पर करें सूर्य स्नान

सूर्य का स्थान ऐसा होना चाहिए जहां पर जोर से हवा के झोंके न आते हों. धूप सेवन के बाद स्वभावतः शरीर हल्का एवं फुर्तीला हो जाता है परंतु अगर ऐसा न हो तो देह और भारी मालूम पड़ने लगती है. अगर ऐसी बात हो तो कुछ देर और धूप स्नान करना चाहिए. अगर स्थिति और ऋतु अनुकूल हो तो सूर्य स्नान के बाद ताजे जल से स्नान कर लेना चाहिए. जिस दिन बादल हों या तेज हवा चल रही हो, उस दिन सूर्य स्नान नहीं करना चाहिए.

(नोट : यह लेख आपकी जागरूकतासतर्कता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. यदि किसी बीमारी के पेशेंट हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.)