navratri 2018: क्या है नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व

हमारे देश में कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में कन्या पूजन करने का बहुत महत्व है. कन्या पूजन से माता रानी भी प्रसन्न होती हैं और कन्या पूजन के बगैर नवरात्रि का पूजन भी अधूरा माना जाता है. राशि के अनुसार कन्या पूजन करने का भी विशेष महत्त्व बताया गया है. 

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हमारे देश में कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में कन्या पूजन करने का बहुत महत्व है. कन्या पूजन से माता रानी भी प्रसन्न होती हैं और कन्या पूजन के बगैर नवरात्रि का पूजन भी अधूरा माना जाता है. राशि के अनुसार कन्या पूजन करने का भी विशेष महत्त्व बताया गया है. 

कब करें कन्या पूजन 

बनारस के पंडित डॉ. रजनीश तिवारी बताते हैं कि सप्‍तमी तिथि से कन्‍या पूजन शुरू होता है. दुर्गाष्टमी और नवमी को भी कन्याओं को देवी का रूप मानकर घर में इनका स्वागत और पूजन कर खीर, पूरी सहित हलवा आदि व्यंजनों का भोजन करवाएं. इसके बाद अपनी शक्ति के अनुसार अन्न और धान्य का दान देकर विदा करें.

जाने कन्या पूजन की विधि

जिस भी दिन आप कन्या पूजन करना चाहते हैं, उसके एक दिन पहले सम्मान के साथ कन्‍या भोज और पूजन के लिए कन्‍याओं का आमंत्रण कर लें. कन्या भोजन के दिन कन्याओं के आगमन पर परिजनों के साथ मिलकर उनके पैर धुलाएं और पुष्प वर्षा से उनका स्वागत करें. 

इसके बाद कन्याओं को साफ और सुविधायुक्त जगह बिठाकर उके माथे पर अक्षत, फूल और कुंकुम लगाएं. इसके बाद देवी रूपी कन्याओं को उनकी इच्छा अनुसार भोजन कराएं. भोजन के बाद कन्याओं को सामर्थ्‍य अनुसार दक्षिणा, अन्न दान और उपहार भेंट कर पैर छूकर आशीष लें. 

कन्या पूजन में बालक का भी है महत्व 

कन्या पूजन के लिए आप दो से 10 वर्ष तक की कन्याओं का आमंत्रण कर सकते हैं. कम से कम 9 कन्याओं के साथ हनुमानजी के स्वरूप में एक बालक को भी आमंत्रित करें. कन्या पूजन में बालक के आमंत्रण और भोजन का उतना ही महत्व होता है, जितना देवी जी के पूजन में भैंरो का होता है. 

आयु अनुसार कन्या पूजन के लाभ 

नवरात्रि ही नहीं हमेशा ही कन्याओं को देवी मानकर सम्मानित करना चाहिए. नवरात्रि में अलग-अलग आयु की कन्याओं के पूजन से विभिन्न लाभ होते हैं. दो वर्ष की कन्या का पूजन आपको दुख और दरिद्रता से मुक्ति दिलाएगा. 

तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति का स्वरूप मानी जाती है और इनका पूजन परिवार में सुख-समृद्धि का कारक होता है. चार वर्ष की कन्या कल्याणी का रूप होती है. कल्याणी की पूजा से आपका कल्याण निश्चित है. पांच वर्ष की कन्या रोहिणी है और रोहिणी का मान-सम्मान व पूजन करने वाला हमेशा आरोग्य को प्राप्त होता है.

कलिका स्वरूप होती है छह वर्ष की कन्या. कालिका रूप का पूजन करने से आप राजयोग के हकदार होते हैं और विद्या व विजय की प्राप्ति भी होती है. सात वर्ष की कन्या चंडिका का रूप होती है और चंडिका आपको ऐश्वर्य प्रदान करती हैं. आठ वर्ष की कन्या शाम्‍भवी कहलाती है.

इसका पूजन करने से वाद-विवाद से छुटकारा मिलता है. नौ वर्ष की कन्या दुर्गा का स्वरूप होती है और इसका पूजन आपको शत्रुओं से मुक्त कर देगा. 10 वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूरे कर सुख देती हैं. 

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