मंगलवार को प्रभावकारी है हनुमानजी की भक्ति

"संकट कटे, मिटे सब पीरा, जो सुमरे हनुमत बलवीरा" यदि आप भी जीवन के किसी कठिनतम वक्त से गुजर रहे हैं, कोई न कोई समस्या आपको हमेशा घेरे रहती है, तो संकट मोचन बजरंगबली की शरण में जाएं. आपके हर संकट का निवारण राम भक्त हनुमानजी करेंगे. अपनी मनोकामना पूरी करने और संकटों से मुक्ति पाने के लिए श्रद्धा पूर्वक आपको प्रत्येक मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करना होगा

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“संकट कटे, मिटे सब पीरा, जो सुमरे हनुमत बलवीरा” यदि आप भी जीवन के किसी कठिनतम वक्त से गुजर रहे हैं, कोई न कोई समस्या आपको हमेशा घेरे रहती है, तो संकट मोचन बजरंगबली की शरण में जाएं. आपके हर संकट का निवारण राम भक्त हनुमानजी करेंगे. अपनी मनोकामना पूरी करने और संकटों से मुक्ति पाने के लिए श्रद्धा पूर्वक आपको प्रत्येक मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करना होगा.

क्यों आवश्यक है सुंदरकांड का पाठ

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मंगलवार को स्नान कर विधिवत हनुमानजी का पूजन करने के बाद सुन्दरकाण्ड का पाठ शुरू करें. पूरा पाठ करने में करीब दो घंटे का समय लगेगा. इसके साथ ही आप रोजाना कम से कम 11 दोहे पढ़े. जिस भी मनोकामना को लेकर आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं, उसकी सफलता लिए हनुमानजी से प्रार्थना कर पाठ की  करें.

सुंदरकांड से करें शुभ प्रसंग की शुरुआत

घर में किसी को भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करवाना चाहिए. सुंदरकांड के पाठ से घर में सुख-शांति आती है और जिस भी कार्य को आप वाले हों वह सफल होता है.

साथ ही इससे आपका आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति भी बढ़ता है. पूजा के समय हनुमान जी को लाल फूल और मिठाई का भोग लगाएं. लाल फूल हनुमान जी को बेहद प्रिय होते हैं. सुंदरकांड का पाठ करने के बाद हनुमान जी की आरती करनी चाहिए. 

ऐसे करें मंगलवार का व्रत 

मंगलवार को सूर्योदय से पहले स्नान कर घर के ईशान कोण में हनुमानजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. इसके बाद लाल वस्‍त्र पहनकर हाथ में जल ले व्रत का संकल्प करें. पूजन की शुरुआत में बजरंगबली के सामने घी का दीपक जलाएं और फूल माला या फूल चढ़ाएं.

मंगलवार व्रत कथा का पाठ कर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें.  बाद में आरती कर भगवन को भोग लगाएं. दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करें. 

धतूरे के पत्तों की चढ़ाएं माला 

मंगलवार और शनिवार के दिन स्नान करने के बाद हनुमानजी के मंदिर में जाकर भगवान को सिन्दूर चढ़ाएं. सिन्दूर चढ़ाने के बाद हनुमानजी को धतूरे के पत्तों की माला चढ़ाएं. इसके बाद मंदिर में ही बैठकर हनुमान चालीस और बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए.