Perming hair tips: बालों को खूबसूरत बना देती है पर्मिंग

बालों की पर्मिंग को लेकर बहुत से लोगों में है. पर्मिंग के बारे में भी बहुत कम लोगों को जानकारी है. देखा जाए तो पर्मिंग बालों को एक तरह से सजाने का आर्ट है. इस आर्ट में बालों को घुंघराला बनाया जाता है.

0 1,983

बालों की पर्मिंग के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. देखा जाए तो पर्मिंग बालों को एक तरह से सजाने का आर्ट है. इस आर्ट में बालों को घुंघराला बनाया जाता है. हालांकि कई लोगों के बाल स्वाभाविक रूप से घुंघराले होते हैं. लेकिन यदि इन्हें कृत्रिम रूप से बनाया जाए तो बालों को ऐसे ही घुंघराला करना या उनमें लहरें पैदा करना पर्मिंग कहलाता है. चाहे वह लड़का हो या लड़की बालों के घुंघरालेपन से सुंदरता बढ़ती है. आइए जानते हैं कितनी जरूरी है पर्मिंग

कितनी जरूरी है पर्मिंग? और कैसे होती है पर्मिंग (what is hair perming)

सम्बंधित लेख - पढ़िए

फैशन और बदलती लाइफ स्टाइल के चलते पर्मिंग का चलन बढ़ गया है. खासतौर पर कैमिकल के यूज से स्थायी और कई तरह के कर्लस के प्रसार से अस्थायी घुंघराले बाल बालों की कई स्टाइल लेकर फैशन की दुनिया में हाजिर हैं.

पर्मिंग से पहले बालों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए क्योंकि इससे बालों के छोटे-छोटे क्यूटिकल्स पर जो परतें जमी होती हैं, वे पानी के साथ धुल जाती हैं जिससे पर्मिंग लोशन को बालों के भीतरी ढांचे में प्रवेश करने में सहूलियत होती है.

पर्मिंग लोशन बालों के केराटिन में तब्दीली लाता है और उसके सल्फर बांड को तोड़ता है. इसके बाद वह बालों के रेशों की कोशिकाओं से सीधा संबंध बनाकर प्रत्येक बाल की भीतरी सतह तक पहुंचता है और बालों के रेशों को ढीला करता है. जब रेशे ढीले पड़ जाते हैं तो ये पर्मिंग रॉड (रोलर) के शेप के अनुसार मुड़ जाते हैं. एक बार कर्लर या रोलर लगाकर कुछ और लोशन लगा दिया जाता है और इसे सेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है. बालों के घुंघराला होने में लगने वाला समय बालों की प्रकृति पर निर्भर करता है.

जब बाल नये ढंग से बदल जाते हैं, तब इस पर ’न्यूट्रिलाइजर‘ लोशन को लगाया जाता है. इस लोशन में आक्सीडाइजिंग एजेंट होता है. यह बालों के रेशों के खुले सूत्रों को अच्छी तरह बंद करने या घूंघर या लहरों को स्थायी बनाने का काम करता है. बाल किस हद तक घुंघराले बनेंगे, यह बालों के आकार, प्रकार, कर्लरों के आकार-प्रकार तथा पर्मिंग लोशन की प्रकृति पर निर्भर करता है.

पतले और मजबूती से बांधने वाले कर्लर छोटे घूंघर बनाते हैं जबकि मध्यम आकार के ढीले बंधे कर्लर ढीले घूंघर या लहरें बनाते हैं. लहरें बालों की किस्म पर भी निर्भर करती हैं. अच्छे किस्म के मजबूत बालों की पर्मिंग ज्यादा अच्छी हो पाती है. अगर बालों की किस्म अच्छी नहीं होगी तो पर्मिंग भी अच्छी नहीं होगी.

कितनी देर रहते हैं पर्मिंग हेयर (How long do perms last in your hair)

पर्मिंग के बाद करीब 48 घंटे केरोटिन को प्राकृतिक रूप से कठोर होने में लगते हैं. इस दौरान बालों के और घूंघर के टूटने की संभावना अधिक रहती है. इस समय बालों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. शैम्पू का इस्तेमाल या कठोरता से खींच कर ब्रशिंग करने से इस समय बचना चाहिए.

एक बार पर्म हो जाने के बाद कुछ हफ्तों तक बाल बिल्कुल नहीं बदलते लेकिन नई वृद्धि, पुराने बालों जैसी ही होती है. धीरे-धीरे कर्ल ढीले पड़ने लगते हैं. खासतौर पर लंबे बालों के घूंघर जल्दी ढीले पड़ते हैं. चूंकि स्थायी पर्मिंग में रसायनों का प्रयोग होता है अतः इसे हमेशा प्रोफेशनल हेयर डेªसर से ही करवाना चाहिए.

टेक्निक और अलग-अलग पर्मिंग (know about perm types) 

पर्मिंग की विभिन्न तकनीकें हैं. इनमें से एक प्रचलित तकनीक है ’बॉडी पर्म‘. बॉडी पर्म के तहत बड़ी लहरें बनाई जाती हैं जिसमें बड़े कर्लर या रोलर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे बाल कर्ल होने के बजाय लहरदार और घने दिखाई देते हैं. ’रूट-पर्म‘ छोटे बालों के लिए अधिक उचित होता है. इसमें बालों की जड़ों के आस-पास पर्मिंग की जाती है. इससे कम घने बाल भी भरे-भरे दिखाई देते हैं.

ऐसी होती है पिनकर्ल पर्मिंग (know about pin curl perms short hair)

पिनकर्ल पर्मिंग भी हल्की लहरें और घूंघर बनाने के लिए की जाती है. इसमें पहले से घुंघराले बालों के एक हिस्से को विशेष आकार दिया जाता है. ’स्टेक पर्म‘ तकनीक में एक बराबर कटे बालों को कई प्रकार के कर्लरों की सहायता से सजाया जाता है. इसके अन्तर्गत बालों के ऊपरी हिस्से को छोड़कर मध्य और नीचे के बालों में कर्लर का प्रयोग किया जाता है. ’स्पाटल पर्म‘ एक रोमांटिक घूंघर बनाता है. इसमें ढेर सारे कर्लरों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे कम घने बाल भी खूब फैले-फैले दिखाई देते हैं.

’स्पॉट पर्म‘ तकनीक के अन्तर्गत बालों के खास हिस्से की पर्मिंग की जाती है. किसी खास हिस्से के बालों को लहरों में डालने के लिए उसी हिस्से के बालों को घुंघराला बना दिया जाता है. ’तिवपर्म‘ तकनीक सीधे और घुंघराले बालों की मिश्रित तकनीक है.

स्कीन का भी रखें ध्यान

पर्म करने से पहले यह देख लेना आवश्यक है कि सिर की त्वचा अधिक संवेदनशील तो नहीं है. अगर खोपड़ी की त्वचा एक्जिमा आदि से ग्रस्त हो तो पर्म के रसायन को न लगायें. पर्म करने से पहले सिर के बालों को अच्छी तरह झाड़कर सुलझा लें. फिर अच्छी तरह धोकर सुखाने के बाद पर्म करें.

नोट: यह लेख आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. बालों में किसी भी तरह के ब्यूटी बदलाव करने से पहले हेयर कंसल्टेंट या फिर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.