Build Self Confidence: आत्मविश्वास की कमी के कारण

कई लोग प्रतिभावान होने के बावजूद केवल खुद पर भरोसे की कमी के चलते वहां नहीं पहुंच पाते जहां उन्हें होना चाहिए. हर तरह ही सफलता का पहला सूत्र है खुद पर भरोसा होना कि यह कार्य मैं कर पाऊंगा और इसे मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता.

कहा जाता है दुनिया की आधी परेशानियां खुद पर विश्वास की कमी से होती है. खुद पर विश्वास का अर्थ होता है (Self confidence) आत्मविश्वास. आत्मविश्वास हर मुसीबत और चुनौती के सामने दुनिया का सबसे बड़ा अस्त्र है. आत्मविश्वास के आगे बड़े-बड़े काम बेहद आसानी से हो जातेे हैंं.

कई लोग प्रतिभा होने के बावजूद केवल खुद पर भरोसे की कमी के चलते वहां नहीं पहुंच पाते जहां उन्हें होना चाहिए. हर तरह ही सफलता का पहला सूत्र है खुद पर भरोसा होना कि यह कार्य मैं कर पाऊंगा और इसे मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता.

दरअसल, सफलता की सबसे बड़ी कुंजी आत्मविश्वास होती है. किसी भी काम को करने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत ही जरूरी होता है. यहां पर आत्मविश्वास से आशय स्वयं पर विश्वास और नियंत्रण से है. याद रखें केवल विश्वास ही नहीं बल्कि नियंत्रण भी जरूरी है क्योंकि विश्वास के साथ नियंत्रण ना होना अतिआत्मविश्वास का कारण बनता है. आत्मविश्वास उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है और जिसके पास दृढ़ निश्चय, मेहनत, लगन, साहस, वचनबद्धता आदि संस्कारों की सम्पति होती है.

आत्मविश्वास (improve self esteem) की कमी के कारण हमारेे व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर पड़ता है. कई बार आत्मविश्वास की कमी के कारण आने वाली कई बड़ी संभावनाएं हमसे छूट जाती हैं. आपके पास चाहे कितना भी ज्ञान क्यों न हो पर यदि आप आत्मविश्वास नहीं है तो आपका ज्ञान आपके लिए कुछ भी नहीं.

कई बार आपके सामने अपनी काबिलियत साबित करने का मौका आता है और उस वक्त पर आपका आत्मविश्वास अगर हिल गया तो आपको पीछे हटना पड़ता है.

ध्यान रखें, बिना आत्मविश्वास के चलते अच्छे से अच्छे प्रतिभावान लोग बने बनाए अवसर छोड़ देते हैं. यदि आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने आत्मविश्वास को बढ़ाएं. मैं यह काम कर सकता हूं, हां इसमें कुछ कमियां हैं लेकिन इसे सुधारा जाए तो अच्छे रिजल्ट लाए जा सकते हैं.

आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके (ways to build self confidence)

सकारात्मक और आशावादी रहें-
आत्मविश्वास पाने के लिए केंद्रित रहने और एक सकारात्मक रवैया (positive attitude) रखने की जरूरत है.
अगर आपकी लगातार आलोचना की जाए या आपके प्रयासों पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो आप बहुत आसानी से हतोत्साहित हो जाएंगे. अगर आपको कोई भी नकारात्मक संदेह है तो उन्हें सकारात्मक बयान या चुनौतियों में बदल दें. अपने आप को सकारात्मक बनाने रखें.

हमेशा आनंदित रहें- जो चीजें आपको वास्तव में (how to be happy always) आनंद देती हैं, वो करें. एक आर्ट गैलरी का दौरा करें, संगीत सुनें, कुछ दोस्तों के साथ क्रिकेट आदि खेल खेलें. ढूंढें आप क्या पसंद करते हैं और यह आप अक्सर करने के लिए सुनिश्चित रहें. इससे आप हमेशा तारो ताजा बने रहेंगे और आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी.

व्यक्तिगत लक्षण को सूचीबद्ध करें- अपने व्यक्तित्व के बारे में कुछ भी नोट करें जिसमें आप गर्व महसूस करते हैं, उदाहरण के लिए, क्या आप खुद को मेहनती, दयालु, या कल्पनाशील मानते हैं. इससे आपके मन में सकारात्मक सोच का संचार होगा.

बुनियादी जरूरतों को जानेंं- स्वयं का आत्मबल बढ़ाने का सबसे जरुरी पॉइंट आपको अपनी बुनियादी चीजों पर ध्यान देना होगा. मान लीजिए आप कोई भी काम करते हैं आप व्यापार करते हैं, नौकरी करते हैं, विद्यार्थी हैं सबको अपनी बुनियादी जरूरतों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है इससे आपके अंदर का विश्वास बढ़ता है.

कपड़े पहनने का तरीका- हमेशा ऐसे कपड़े पहनेंं जो आप पर अच्छे लगे. कपड़े कम ही खरीदें लेकिन अच्छे खरीदें. कपड़े तो सभी पहनते हैं लेकिन पहनने का तरीका सभी को नहीं आता.

कपड़े अपनी कद काठी के हिसाब से पहने जो आप पर सूट करें. यदि आप ऐसा करते हैं तो आप दिखने में अच्छे लगेंगे. लोग आपके कपड़े पहनने के तरीके की तारीफ करेंगे और इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा.

अपनी उपलब्धियों को याद करें- आत्मविश्वास को बढ़ने का यह एक बहुत अच्छा तरीका है. आपने अपने अतीत में जो भी उपलब्धियां हासिल की हैं उनके बारें में हफ्ते में एक बार जरूर सोचें. ऐसा करने से आप अपने आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ा सकते हैं. आप अपनी उपलब्धियों को एक जगह लिख भी सकते हैं और जब भी आपका आत्मविश्वास कम हो तो तुरंत उन्हें पढ़ लें.

गलतियों से न डरें- बहुत से लोग गलतियां करने से बहुत डरते हैं. उन्हें यह पता नहींं होता की ऐसा करना एक सफल जीवन के लिए बहुत जरूरी है. दुनिया का कोई ऐसा सफल इंसान नहीं हैं जिसने कभी कोई गलती नहीं की हो. बल्कि हमें तो गलतियों से सीख लेकर उसमेंं सुधार करना चाहिए.

आंखों से आंखें मिलाकर बात करें- जब भी किसी से मिलें तो उनसे आंखों से आंखें मिलाकर ही बातें करें. बहुत से लोग दूूसरोंं से बात करते समय इधर-उधर देखते रहते हैं और सामने वाले से नजरें चुराते रहते हैं. यह आत्मविश्वास की कमी होना माना जाता हैं. लोगोंं की आंखों से आंखें मिलाकर बात करने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और सामने खड़े व्यक्ति भी हमारी बातो में रुचि लेता है.

जोखिम लेने से न डरें- जोखिम लेना भी जीवन में सफल होने के लिए बहुत जरूरी है. बिना जोखिम के कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सकता. यदि सफल हुए तो आत्मविश्वास बढ़ेगा और यदि असफल हुए तो सीख या सबक मिलेगा. जब भी हम कुछ सीखते हैं तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है.

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