बद्रीनाथ धाम यात्रा : बद्रीनाथ कब जाना चाहिए, बद्रीनाथ के कपाट कब खुलते हैं?

बद्रीनाथ धाम (Badrinath) भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल में से एक है. ये छोटे चार धाम में से एक है. ये मंदिर हिन्दू देवता विष्णु को समर्पित मंदिर है. इस स्थान को धर्मों में वर्णित सबसे पवित्र स्थान माना जाता है. इसे भारत का एक प्राचीन मंदिर माना जाता है.

बद्रीनाथ धाम (Badrinath) भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल में से एक है. ये छोटे चार धाम में से एक है. ये मंदिर हिन्दू देवता विष्णु को समर्पित मंदिर है. इस स्थान को धर्मों में वर्णित सबसे पवित्र स्थान माना जाता है. इसे भारत का एक प्राचीन मंदिर माना जाता है. इसके निर्माण के साक्ष्य सातवी से नौवी शताब्दी में मिलते हैं. हिन्दू धर्म के लोग यहां तीर्थ यात्रा पर आते हैं. अगर आप भी आना चाहते हैं तो आपको बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) की जानकारी होना चाहिए.

बद्रीनाथ धाम कहां है? (Where is badrinath temple situated?)

बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) भारत के उत्तराखंड (Uttrakhand) राज्य के चमोली (Chamoli) जनपद में है. यहां अलकनन्दा नदी (Badrinath at alaknanda river) है जिसके तट पर बद्रीनाथ धाम है. इसे सबसे व्यस्त मंदिर माना जाता है यहां सालभर में 10 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री आते हैं. यहां भगवान विष्णु की शालिमग्राम से निर्मित 1 मीटर लंबी मूर्ति है. जिसे आदि शंकरचार्य ने 8वी शताब्दी में बद्रीनाथ के निकट नारद कुंड से निकालकर स्थापित किया था.

बद्रीनाथ धाम की कथा (Badrinath dham story)

पौराणिक लोक कथाओं के अनुसार बद्रीनाथ के आसपास का क्षेत्र भगवान शिव की भूमि के रूप में था. जब भगवान शिव ने अपनी जटाएं खोली तो उनकी जटाओं से गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई और 12 धाराओं में बट गई. इनका एक स्वरूप अलकनंदा है.

कथाओं के अनुसार जब भगवान विष्णु अपने ध्यान योग के लिए उचित स्थान ढूंढ रहे थे तो उन्हें अलकनंदा के समीप ये स्थान भा गया. उन्होने नीलकंठ पर्वत के पास बाल रूप में अवतार लिया और वे क्रंदन करने लगे. उनका रुदन सुनकर माता पार्वती का हृदय द्रवित हो गया और उन्होने बालक के सामने उपस्थित होकर मनाने का प्रयास किया बालक ने उनसे उस स्थान की मांग की और वह स्थान अपने ध्यानयोग के लिए ले लिया. बाद में यही पवित्र स्थान बद्रीनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

बद्रीनाथ कब जाएं? (When go to badrinath dham?)

बद्रीनाथ आप सालभर में जब चाहे तब नहीं जा सकते. इसकी वजह वहां का मौसम. बद्रीनाथ जिस स्थान पर है वहां पर्वत है और बर्फबारी होती है. इसलिए यहां बारिश और ठंड में जाने का सही समय नहीं है. वैसे इस महीने के द्वार 6 महीने के लिए खराब मौसम की वजह से बंद रहते हैं. इस मंदिर को अप्रैल के अंत से नवंबर की शुरवात तक खोला जाता है. अगर आप दर्शन करना चाहते हैं तो आपको इन्हीं महीनो को बीच में जाना होगा. स्वस्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो यहां गर्मियों में जाना फायदेमंद रहेगा क्योंकि ये एक ठंडा क्षेत्र है.

बद्रीनाथ कैसे जाएं? (How to reach at badrinath dham?)

बद्रीनाथ जाने का रास्ता थोड़ा कठिन और कई लोगों के लिए लंबा हो सकता है. अगर आप बद्रीनाथ से काफी दूर और दूसरे राज्य में रहते हैं तो आपको पहले अपने राज्य से उत्तराखंड के ऋषिकेश में आना होगा. यहां आप ट्रेन या बस से आ सकते हैं. अगर आप हवाई यात्रा करने की सोच रहे हैं तो आप इससे सिर्फ देहारादून तक आ सकते हैं. ऋषिकेश आने के बाद आप रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, जोशीमठ धाम की यात्रा करते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंच जाते हैं.

बद्रीनाथ के नियम (Rule for badrinath temple darshan)

बद्रीनाथ जाने के लिए परमिट की जरूरत होती है. यहां जाने से पहले अपने साथ अपना आधार कार्ड और परिचय पत्र रख लें. बद्रीनाथ जाने का परमिट जोशीमठ के एसडीएम द्वारा बनाया जाता है. इन परमिट के माध्यम से वहां पहुँचने वाले लोगों की संख्या को कंट्रोल किया जाता है. मंदिर में दर्शन करने के लिए प्रत्येक श्रद्धालु को टोकन दिये जाते हैं जो समय को इंगित करते हैं. प्रत्येक व्यक्ति को दर्शन करने के लिए 10 से 20 सेकंड दिये जाते हैं.

बद्रीनाथ जाने के बारे में यदि आप सोच रहे हैं तो आप एक साथ कई सारे तीर्थ घूम सकते हैं जो उत्तराखंड में है. कई ट्रेवल एजेंट आपको चार धाम यात्रा का पैकेज देते हैं जिसमें वे बद्रीनाथ के अलावा छोटे चार धाम के तीर्थ का पैकेज एक साथ देते हैं. आप इन्हें लेकर उत्तराखंड में कई तीर्थ स्थल पर दर्शन कर सकते हैं.

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