Calcium deficiency disease: कैल्शियम की कमी के लक्षण, जानिए शरीर में कब और किस मात्रा में जरूरी है कैल्शियम

शरीर में पीठ, कमर, जोड़, कंधों का हिस्सा, घुटने के आसपास जकड़न बनी रहती हो तो यह कैल्शियम की कमी का लक्षण हो सकता है. अक्सर सुबह उठने पर यह जकड़न बढ़ी हुई नजर आती हो या फिर मांसपेशियों में खिंचाव, कमर का झुकना, पिंडलियों में अचानक तेज दर्द होना भी कैल्शियम की कमी के लक्षण हो सकते हैं.

शरीर के विकास के लिए हर तरह के विटामिंस की जरूरत है. विटामिंस शरीर (importance of vitamins in human body) को सुचारू से चलाने, स्वस्थ्य रखने और कई तरह के संक्रामक रोगों से लड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं.

विटामिंस की पूर्ति शरीर में सामान्य खान-पान और हरी सब्जियों आदि से होती रहती है और हमारे शरीर को पोषण मिलता रहता है. शरीर के विकास के लिए सभी विटामिन की जरूरत होती है लेकिन इन्हीं में कैल्शियम (calcium) एक ऐसा खनिज तत्व है जो विटामिन की तुलना में एक सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. (calcium mineral function) कैल्शियम हड्डियों, दातों को मजबूत और स्वस्थ रखता है.

कैल्शियम क्या है? (what is calcium in hindi)
कैल्शियम एक मिनिरल्स यानी की खनिज है. शरीर में पाए जाने वाले अन्य (Calcium is a mineral that is necessary for life) खनिज तत्वों की तरह कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनिरल है. (calcium ke bare mein bataen) आपको जानकर आश्चर्य होगा कि शरीर में 99 फीसद कैल्शियम केवल दांतों और हड्डियों में होता है.

कैल्शियम की यह मात्रा कंकाल की संरचना (calcium ke bare mein jankari hindi mein) व उसकी हर तरह की क्रिया व गतिविधि को सहयोग देती है. इस तरह 99 के बाद जो महज 1 फीसद कैल्शियम होता है वह शरीर के अन्य कार्यों में सहयोग प्रदान करता है. (benefits of calcium) कैल्शियम की निश्चित और संतुलित मात्रा हमारे शरीर को मजबूत, चमकदार और ऊर्जावान बनाती है.

शरीर में कैल्शियम की कमी के लक्षण (calcium deficiency symptoms)
कैल्शियम पर्याप्त मात्रा से शरीर की कमजोर और पतली हड्डियां (bone and calcium levels) मजबूत तो होती ही हैंं साथ ही कैल्शियम से दिल की सेहत दुरुस्त रहती है, (calcium ki kami ke lakshan) यदि दिल कमजोर है तो फिर कैल्शियम अहम भूमिका निभाता है. इसके अतिरिक्त कैल्शियम से किडनी की पथरी नष्ट होती है, हड्डियां मजबूत होती हैं और यह थकान को भी कम करता है. महिलाओं में पीरियड संबंधी रोगों के उपचार में कैल्शियम फायदेमंद होता है.  

कैल्शियम शरीर की एक-एक कोशिकाओं के लिए  जरूरी है साथ ही यह नर्व्स, ब्लड, मसल्स और हार्ट की कार्यक्षमता को बढ़ाता है. आइए जानते हैं शरीर में कैल्शियम की कमी के लक्षण क्या हैं.

  1. यदि आपकी हड्डियों में लगातार दर्द बना हो तो आपको कैल्शियम की कमी (calcium ki kami) हो सकती है. बेहतर है आप डॉक्टर से सलाह लें.
  2. शरीर में पीठ,कमर, जोड़, कंधों का हिस्सा, घुटने के आसपास जकड़न बनी रहती हो तो यह कैल्शियम की कमी का लक्षण हो सकता है. अक्सर सुबह उठने पर यह जकड़न बढ़ी हुई नजर आती हो.
  3. मांसपेशियों में खिंचाव, कमर का झुकना, पिंडलियों में अचानक तेज दर्द भी कैल्शियम की कमी का लक्षण है.
  4. आपके बाल लगातार झड़ रहे हों, दांतों में बार-बार संक्रमण हो रहा हो, नाखून फट रहे हों तो यह कैल्शियम की कमी से हो सकता है.
  5. नींद नहीं आ रही हो, लगातार सुस्ती व थकान बनी रहती है तो कैल्शियम की जांच कराएं.
  6. भूख ना लगना और हाथ-पैरों की सुन्न रहना.
  7. मिसकैरेज, बांझपन मिर्गी के दौरे आना, त्वचा रूखापन, कमजोर याद्दाश्त होना.
  8. शरीर में कोलेस्ट्रोल  का स्तर बढ़ना, मसूड़ों के रोग होना, दिल का घबराना और असामान्य रूप से धड़कन का बढ़ जाना और कई बार ब्लड प्रेशर का बढ़ना भी कैल्शियम की कमी के लक्षण हो सकते हैं.

आपके शरीर में उपरोक्त में से कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. डॉक्टर आपके खून की जांच से शरीर में कैल्शियम की मात्रा की जांच करते हैं और (calcium deficiency disease) उसके मुताबिक कैल्शियम की गोली खाने की सलाह देते हैं.

शरीर में कैल्शियम की मात्रा कितनी होनी चाहिए. (calcium ki matra kitni honi chahiye)

हर खनिज तत्व और विटामिन की एक निश्चित और संतुलन मात्रा शरीर में होती है. (daily calcium requirement by age) कैल्शियम की मात्रा भी शरीर में संतुलन के साथ होती है. कैल्शियम यदि अधिक हो जाए तो शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है वहीं इसकी कमी के लक्षण आप जान चुके हैं. आइए जानते हैं शरीर में कैल्शियम की कितनी मात्रा होनी चाहिए.

कैल्शियम की शरीर में मात्रा: हमारे शरीर में (badam mein kitna calcium hota hai) कैल्शियम की 90 प्रतिशत मात्रा हड्डियों के साथ दांतों में स्टोर रहती है और जब भी शरीर को इसकी जरूरत होती है इससे वह खून में घुलकर मिलता रहता है.

बता दें कि लंबे समय तक यही कैल्शियम की मात्रा शरीर में जरूरत को पूरा करती रहती है, लेकिन जब वह भी मिलना बंद हो जाता है तो शरीर अलग-अलग तरह से लक्षण देकर कैल्शियम की आपूर्ति के संकेत देता है.

हमारे खून में कैल्शियम की मात्रा (calcium level in blood) 8.5 से 10.2 डेसी लीटर होनी चाहिए. कैल्शियम  की इससे ज्यादा या कम दोनोंं ही मात्रा शरीर पर बुरा असर डालती हैं.

आपके लिए जानना जरूरी है कि हड्डियों व दांतों को शक्ति व ऊर्जा देने के साथ ही कैल्शियम तन्त्रिकाओं और मांसपेशियों के लिए भी जरूरी है और वह उन्हें सुचारू रूप से क्रियाशील बनाता है.

ध्यान रखें शरीर में खून जमना या थक्के जमने तक में कैल्शियम की बड़ी भूमिका होती है. यही नहीं कैल्शियम सभी कोशिकाओं के अंदर कई केमिकल रिऐक्शन्स में भी हिस्सेदारी रखता है और अहम भूमिका निभाता है.

शरीर में कितनी होनी चाहिए कैल्शियम की मात्रा  (calcium diet in hindi)

एक सामान्य व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 1 ग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है. ध्यान रखें दूध एक ऐसी चीज है जिससे सबसे ज्यादा कैल्शियम सामान्य व्यक्ति लेता है.  250 ग्राम दूध में 250 ग्राम कैल्शियम उपलब्ध कराता है.

हमारे शरीर में हर विटामिन और खनिज एक संतुलित मात्रा में होना जरूरी है. (How can I check my calcium levels) कैल्शियम की भी एक संतुलित मात्रा है और (calcium supplements for women and men) वह महिला, पुरुष, बच्चों, बूढ़ों के लिए आवश्यक होती है.

आइए जानते हैं उम्र के हिसाब से शरीर को कितनी कैल्शियम की मात्रा और आवश्यकता होती है.

  • गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए 1200 मिलीग्राम होना जरूरी है.
  • 6 मास से छोटे बच्चों के लिए रोजाना 400 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है.
  • 6 मास से 1 वर्ष के बच्चों के लिए 600 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है.
  • 1 वर्ष से 10 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 800 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है.
  • 11 वर्ष से ऊपर सभी आयु वर्ग के लिए 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है.

कैसे जानें की शरीर में हो रही है कैल्शियम की कमी (How do I know if I have calcium deficiency)

मांसपेशियों में तकलीफ होना, जैसा की ऊपर बताया गया है. आपकी  मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और मरोड़ हो तो यह समझें कि यह कैल्शियम की कमी के शुरुआती संकेत हैं (what happens if there is not enough calcium in the body?) जिन्हें आपको प्राकृतिक तरीकों से पूरा करना चाहिए.

ऐसे ही यदि चलते वक्त या किसी भी तरह के मूवमेंट के दौरान जांघों और हाथ में दर्द आपको कैल्शियम की कमी का लक्षण बताता है. आप इन संकेतों पर ध्यान नहीं देते हैं तो फिर आपके लिए खतरे की घंटी है. ध्यान रखें इस स्थिति में कैल्शियम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.

थकान ज्यादा होने पर- आप बहुत जल्दी और ज्यादा थक जाते हैं तो आपको कैल्शियम की कमी हो सकती है. हालांकि आपको थकान कई वजह से हो सकती है. लेकिन ध्यान रखें कैल्शियम की कमी से जो थकान होती है उसमें चक्कर आना और ब्रेन फॉग भी हो सकता है. ब्रेन फॉग का अर्थ होता है असमंजस या कंफ्यूजन. किसी कार्य में ध्यान नही लगना, भूलना और सोचने में तकलीफ होना भी कैल्शियम की कमी का कारण हो सकता है. बेहतर है अपने डॉक्टर से सलाह लें.

रुखी त्वचा और नाख़ून- कैल्शियम की कमी त्वचा और नाखूनों को भी प्रभावित करती है. कैल्शियम की कमी के कारण स्किन रूखी और लाल तो होती ही है बल्कि उसमें खुजली हो सकती है. यही नहीं इसकी कमी से नाखून रूखे और इतने कमजोर हो सकते हैं कि खुद ब खुद टूटने लग सकते हैं.

कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग (hypocalcemia and calcium-deficiency)

हाइपोकैल्सिमिया (hypocalcemia): आपको बता दें कि यदि आपके शरीर में लगातार कैल्शियम की कमी बनी हुई है तो फिर आपको हाइपोकैल्सिमिया (Hypocalcemia) हो सकता है. शरीर में कैल्शियम की कमी जब हो जाती है तो इस स्थिति को हाइपोकैल्सिमिया (symptoms of hypocalcemia)   कहा जाता है. ध्यान रखें यह तब होता है जब खून में कैल्शियम का स्तर कम होता है.

ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस:  यदि आपके शरीर में लगातार भारी मात्रा में कैल्शियम  की कमी है तो फिर आपको ऑस्टियोपोरोसिस (what is osteoporosis) जैसी बीमारी हो सकती है. ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों का घनत्व (डेंसिटी) कम हो जाती है. यही नहीं हड्डियां इतनी कमजोर और भंगुर हो जाती हैं कि गिरने से, झुकने या छींकने-खांसने पर भी हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा बना रहता है. इस बीमारी के इलाज के लिए कैल्शियम ही जरूरी होता हैं.

दांतों में दर्द होने पर- जब कैल्शियम की कमी होती है, तब शरीर इसकी पूर्ति दांतों और हड्डियों से कर सकता है. इस वजह से दांतों की दिक्कतें शुरू होती हैं, जैसे कमजोर दांत, मसूड़ों में समस्या, दांतों में सड़न. शिशुओं में कैल्शियम की कमी से दांतों का निर्माण देर से हो सकता है. ऐसे में आपको कैल्शियम की जरूरत होती है.

बढ़ती उम्र के साथ- ज्यादातर लोगों को उम्र बढ़ने के साथ कैल्शियम की कमी का खतरा होता है. इसकी कई वजह हो सकती हैं जैसे- लंबे समय से खासकर बचपन में पर्याप्त कैल्शियम का सेवन न करना, कुछ दवाइयां, जिससे कैल्शियम का अवशोषण घट गया हो, कैल्शियम से भरपूर चीजों को पचा न पाना, हार्मोनल बदलाव, खासकर महिलाओं में, जेनेटिक कारक आदि के कारण कैल्शियम की जरुरत होती हैं, इसलिए उम्र के सभी पड़ाव पर कैल्शियम के सेवन का ध्यान रखना जरूरी होता है.

कैल्शियम के घरेलू स्रोत (calcium kisme paya jata hai)

प्राकृतिक रूप से कैल्शियम कई तरह की चीजों में (  best calcium rich food) पाया जाता है. यदि कैल्शियम की गोलियों की तुलना में घरेलू व प्राकृतिक चीजों से पूरी करना चाहते हैं (calcium ki kami kis cheez se dur hoti hai) तो कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोत (natural sources of calcium)  के रूप में दूध, पनीर, दही, हरी सब्जियां जो पत्तेदार हों, टमाटर और गाजर जैसी सब्जियां, अरबी और मूली के साथ पत्तागोभी व मटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है. (List of Calcium rich foods) सभी तरह की फ़लियां कैल्शियम की अच्छा सोर्स हैं, इसके साथ ही सीताफल, तुरई, लहसुन, अनानास, पपीता, लीची, जामुन, अमरूद, अनार, जैसे फल कैल्शियम का प्राकृतिक स्रोत हैं.

क्यों होती है शरीर में कैल्शियम की कमी?  (reason of calcium deficiency)

शरीर में कैल्शियम की कमी के कई कारण हैं (what causes calcium deficiency)  इसमें सबसे महत्वपूर्ण है आहार. यदि आप आहार ही पोषण वाला नहीं करते हैं या पर्याप्त मात्रा में ऐसी चीजें नहीं लेते हैं जिनमें कैल्शियम नहीं है तो फिर धीरे-धीरे कैल्शियम की कमी होगी.

आहार में ज्यादा मात्रा में मैग्नेशियम या फॉस्फोरस ले रहे हैं (what foods reduce calcium) तो कैल्शियम की कमी हो सकती है. इसमें आप यदि ज्यादा मात्रा में कोल्ड्रिंक, सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करते हैं, रिफाइंड अनाज, मीट का खाते हैं तो  यह कैल्शियम की कमी कारण बनता है.

विटामिन-डी और कैल्शियम दोनों ही (calcium aur vitamin d ke fayde) एक दूसरे के पूरक हैं. यदि विटामिन-डी की कमी है तो कैल्शियम शरीर में ठहरेगा ही नहीं बल्कि ड्रेन हो जाएगा. इस तरह विटामिन-डी की कमी से कैल्शियम की कमी का खतरा बना रहता है.

शरीर में एस्ट्रोजन हार्मौन का स्तर कम हो तो भी कैल्शियम की कमी हो सकती है. ऐसा अक्सर महिला खिलाड़ियों में होता है.

बहुत ज्यादा व्यायाम करना कैल्शियम की कमी का कारण बनता है. ध्यान रखें यदि व्यायाम कर ही रहे हैं तो हल्का करें, या फिर दूध, दही व कैल्शियम के सोर्स वाली चीजों का सेवन करें.

अधिक मात्रा में वसा युक्त खाना, प्रोटीन का अधिक सेवन या फिर शक्कर वाली चीजें खाने से शरीर में कैल्शियम की मात्रा पर असर होता है और कैल्शियम की कमी होती है.

शरीर में ज्यादा कैल्शियम के लक्षण और नुकसान (high calcium symptoms)

आपके शरीर में  कैल्शियम की निश्चित मात्रा होनी चाहिए. जहां एक ओर कैल्शियम की कमी से कई तरह के रोग हो सकते हैं वहीं कैल्शियम की अधिकता भी शरीर को नुकसान पहुंचाती है. आपको हाइपरकैल्शमिया (High Calcium Levels or Hypercalcemia) हो सकता है. यह शरीर में कैल्शियम की निश्चित मात्रा से ज्यादा होने वाला रोग है.  आइए जानते हैं कैल्शियम की अधिकता होने पर शरीर में कैसे लक्षण होते हैं. (calcium ki adhikta ke lakshan)

  • यदि शरीर में कैल्शियम की अधिक मात्रा हो तो कब्जियत रह सकती है.
  • भूख कम लगना कैल्शियम की अधिकता का कारण है.
  • दिल की धड़कन बढ़ना, डिप्रेशन व अनिद्रा होना
  • किडनी ब्लॉक होने का खतरा बढ़ जाता है, कई बार पथरी भी हो सकती है.
  • ज्यादा कैल्शियम लेने से हार्ट और ब्रेन को नुकसान पहुंच सकता है.

डिस्क्लेमर नोट: यह लेख आपकी जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. कैल्शियम शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है और इसकी कमी के कई तरह के लक्षण हो सकते हैं. आपको लगता है कि आपके शरीर में कैल्शियम की कमी या अधिकता है तो इस संबंध में डॉक्टर से सलाह जरूर लें. बिना डॉक्टरी सलाह के कैल्शियम की गोलियां लेना अथवा उसकी आपूर्ति रोकना आपके शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

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