High blood pressure : उच्च रक्तचाप की रोकथाम, लक्षण और उपचार

वर्तमान में हम कई बीमारियों से घिरे हैं इन्हीं बीमारियों में जो सबसे कॉमन बीमारी है वो है ब्लड प्रेशर का बढ़ना (high blood pressure). कई लोग इसे उच्च रक्तचाप, हायपरटेंशन, बीपी का हाई होना कहते हैं. हम सभी जानते हैं की हमारे शरीर में जो रक्त बहता है वो हमारे शरीर में मौजूद नसों में होकर बहता है. इसी रक्त के माध्यम से हमारे शरीर को ऊर्जा वाले तत्व मिलते हैं. अगर इस रक्त के प्रवाह में थोड़ी सी भी दिक्कत आती है तो हमारे शरीर मे बदलाव आना शुरू हो जाते हैं जिन्हें हम ब्लड प्रेशर का बढ़ना या घटना कह सकते हैं.

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वर्तमान में हम कई बीमारियों से घिरे हैं इन्हीं बीमारियों में जो सबसे कॉमन बीमारी है वो है ब्लड प्रेशर का बढ़ना (high blood pressure). कई लोग इसे उच्च रक्तचाप, हायपरटेंशन, बीपी का हाई होना कहते हैं. हम सभी जानते हैं की हमारे शरीर में जो रक्त बहता है वो हमारे शरीर में मौजूद नसों में होकर बहता है. इसी रक्त के माध्यम से हमारे शरीर को ऊर्जा वाले तत्व मिलते हैं. अगर इस रक्त के प्रवाह में थोड़ी सी भी दिक्कत आती है तो हमारे शरीर मे बदलाव आना शुरू हो जाते हैं जिन्हें हम ब्लड प्रेशर का बढ़ना या घटना कह सकते हैं.

ब्लड प्रेशर का बढ़ना (high blood pressure)

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ब्लड प्रेशर का संबंध हमारे शरीर में मौजूद नसों से होता है. हमारे शरीर में जो रक्त होता है उसका प्रवाह नसों में होता है अगर रक्त के प्रवाह के कारण नसों पर जो प्रभाव पड़ता है उसे ब्लड प्रेशर कहते हैं. अगर इन नसों में रक्त का प्रभाव बढ़ता है तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है.

आपका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा या घटेगा ये इस बात पर निर्भर करता है की आपका हृदय कितनी गति से पंप कर रहा है.
आपकी नसों में बहने वाले रक्त को कितने अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है. अगर बात हाइ ब्लड प्रेशर की करें तो वो मेडिकल गाइडलाइन के हिसाब से 130/80 mmHg से ज्यादा रक्त का दबाव हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आता हाई.

उच्च रक्तचाप के कारण (Causes of high blood pressure)

उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेशर दो तरह के होते हैं और इन दोनों के कारण भी अलग-अलग हैं.

प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर : इस तरह का हाई ब्लड प्रेशर अधिकतर युवायों में होता है. इस तरह के ब्लड प्रेशर बढ्ने का कारण कोई खास नहीं बल्कि उनकी अनियमित जीवन शैली होती है. इसके कुछ प्रमुख कारण मोटापा, नींद की कमी, अत्यधिक गुस्सा करना, मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन, तनाव, तैलीय पदार्थों और अस्वस्थ खान-पान है.

सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर : इस तरह का ब्लड प्रेशर का बढ़ना किसी बीमारी के कारण होता हैं. इसके कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, किडनी का कोई रोग, एड्रीनल ग्लैंड ट्यूमर, थायरॉइड की समस्या, अनुवांशिक कारणों से नसों में कोई खराबी, गर्भनिरोधक दवाओं का अधिक सेवन, सर्दी-जुकाम और दर्द की दवाओं का अधिक सेवन शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि का नशा करना आदि इसके प्रमुख कारण है.

उच्च रक्तचाप के लक्षण (symptoms of high blood pressure)

उच्च रक्तचाप काफी नुकसानदायक होता है इसलिए आपको ये जानना जरूरी है की आप उच्च रक्तचाप होने पर उसे पहचानेंगे कैसे. उच्च रक्तचाप को पहचानने के कुछ प्रमुख लक्षण हैं यदि आपको ये लक्षण नजर आये तो आप ब्लड प्रेशर के डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ.

उच्च रक्तचाप की शुरुवात होने पर मरीज के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहता है. कई बार लोग इस दर्द को सामान्य समझते हैं और दर्द की गोली खाकर भूल जाते हैं लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ा नुकसान करती है.

उच्च रक्तचाप के और भी लक्षण है जैसे : सांसों का तेज चलना और कई बार सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में दर्द की समस्या, तनाव होना, सिर में दर्द, आंखों से दिखने में परिवर्तन होना जैसे धुंधला दिखना, पेशाब के साथ खून निकलना, सिर चकराना, थकान और सुस्ती लगना, नाक से खून निकलना, नींद न आना, दिल की धड़कन बढ़ जाना.

ब्लड प्रेशर की रीडिंग (reading of high blood pressure)

आपने देखा होगा की डॉक्टर जब आपका ब्लड प्रेशर चेक करते हैं तो मीटर में रीडिंग देखते हैं. इन रीडिंग में दो रीडिंग शामिल होती है. पहली सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक. इन दोनों रीडिंग को उच्चतम रीडिंग और निम्नतम रीडिंग भी कहा जाता है. आपका ब्लड प्रेशर हर समय अलग रहता है. अगर आप आराम की स्थिति में है तो आपका ब्लड प्रेशर कम आएगा और अगर आप तनाव की स्थिति में हैं तो आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा. आराम के समय सामान्य रक्‍तचाप में उच्‍चतम रीडिंग यानी सिस्टोलिक 100 से 140 तक और डायस्‍टोलिक यानी निचली रीडिंग 60 से 90 के बीच होती है. अगर कई दिन तक किसी व्‍यक्ति का रक्‍तचाप 140/90 बना रहता है तब उसे हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या है.

उच्च रक्तचाप से नुकसान (diseases by high blood pressure)

उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेशर काफी खतरनाक होता है और इसका सीधा असर आपके हृदय पर होता है.

– ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण आपके हृदय तक रक्त पाहुचने वाली धमनियाँ सख्त अथवा मोती हो सकती है. इस वजह से उनकी चौड़ाई कम हो जाती है जिसके फलस्वरूप एन्‍जिनिया, हार्ट डिजीज और कोरोनेरी हार्ट डिजीज होने का अंदेशा काफी बढ़ जाता है.

– आपके शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण हार्ट अटैक जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है.

– अगर किसी महिला को उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो ये उसकी प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत दे सकती है. गर्भावस्था के दौरान अक्सर देखा गया है की महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ ही जाता है ऐसे में अगर आपका पहले से बढ़ा हुआ है तो फिर और ज्यादा दिक्कत हो जाती है.

– गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण महिला को झटके आ सकते हैं और इस कारण से उसमें पल रहा भ्रूण भी प्रभावित हो सकता है. हालांकि डॉक्टर की देखरेख में रहकर दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

उच्च रक्तचाप का उपचार (treatment of high blood pressure)

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. आजकल दवाई के जरिये आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकते हैं. इसके साथ ही डॉक्टर आपको जीवनशैली में बदलाव और खानपान में बदलाव के लिए भी कहते हैं जिससे आप जल्दी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर पाएंगे. अपनी जीवन शैली में आप निम्न बदलाव करके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं.

– अपने आहार में नमक का सेवन कम करें.

– ऐसे आहार का सेवन करे जो आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित रख सकें.

– गुस्सा और तनाव को बेहद कम कर दें क्योंकि जब भी आप ये दोनों करेंगे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा ही बढ़ेगा.

– शराब, सिगरेट और ड्रग्स से दूर रहें. इनके सेवन से आपका ब्लड प्रेशर बढ़ता है. अगर आपको ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या है और आप इनसे दूर रहते हैं तो आपको काफी राहत मिलेगी.

– नियमित व्यायाम और योग से भी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह लें. वे जिस योग और व्यायाम को बताए उसे करें और ये भी जाने की उन व्यायाम और योग को कितनी देर तक करना है.

ब्लड प्रेशर का बढ़ना यानि रक्तचाप दुनियाभर में एक गंभीर बीमारी बनकर उभरी है. हालांकि इसका इलाज है लेकिन आपको पहले ये जानना जरूरी है की आपको ब्लड प्रेशर की समस्या है या नहीं. आप पहले लक्षणों के जरिये इस बात का पता लगाएँ की आपको ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत हैं या नहीं. इसके बाद डॉक्टर की सलाह मानें. अगर आप थोड़ी सी भी लापरवाही बरतते हैं तो ये आगे जाकर हार्ट अटैक तक पहुच सकता है.

नोट: यह लेख आपकी जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. यदि आप संबंधित बीमारी से ग्रस्त हैं अथवा बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी तरह के उपाय ना करें और बीमारी को लेकर धारणा ना बनाएं. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक है.

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