दुनिया भर में चर्चित हैं पाकिस्तान के हिंदू ये मंदिर

हिन्दू धर्म और धार्मिक स्थलों की चर्चा होते ही हमारी आंखों के सामने भारत भर के हज़ारों प्रसिद्ध तीर्थ और मंदिरों के दृश्य आ जाते हैं. आप में से शायद कम ही लोगों को जानकारी होगी कुछ अन्य देशों में भी बहुत फेमस हिन्दू तीर्थ स्थल हैं. शायद आपको यकीन न हो लेकिन हमारे सबसे बड़े प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के भी कई इलाकों में हिन्दू तीर्थ स्थल हैं और इनके दर्शन करने प्रतिवर्ष हज़ारों हिन्दू श्रद्धालु पाकिस्तान जाते हैं. 

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हिन्दू धर्म और धार्मिक स्थलों की चर्चा होते ही हमारी आंखों के सामने भारत भर के हज़ारों प्रसिद्ध तीर्थ और मंदिरों के दृश्य आ जाते हैं. आप में से शायद कम ही लोगों को जानकारी होगी कुछ अन्य देशों में भी बहुत फेमस हिन्दू तीर्थ स्थल हैं. शायद आपको यकीन न हो लेकिन हमारे सबसे बड़े प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के भी कई इलाकों में हिन्दू तीर्थ स्थल हैं और इनके दर्शन करने प्रतिवर्ष हज़ारों हिन्दू श्रद्धालु पाकिस्तान जाते हैं. 

हिंगलाज शक्तिपीठ

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पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची जिले के बाड़ीकलां में हिंगलाज माता का मंदिर पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ है. हिंगलाज माता मंदिर को हिंगलाज देवी, हिंगुला देवी और नानी मंदिर के नामों से भी जाना जाता है. यह मंदिर सनातन धर्म के प्रधान 51 शक्तिपीठों में से एक है. धार्मिक कथाओं के अनुसार हिंगलाज ही वह जगह है, जहां माता का सिर गिरा था. यहां माता सती कोटटरी और भगवान शिव भीमलोचन भैरव के रूप में प्रतिष्ठित हैं.

महाभारत कालीन कटासराज मंदिर

पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र स्थित पंजाब प्रांत के चकवाल शहर से करीब दक्षिण में कोहिस्तान नमक पर्वत श्रृंखला है. इस पर्वत श्रृंखला में महाभारतकालीन कटासराज नाम का गांव बसा हुआ है और गांव में स्थित है भगवान राम, हनुमान और शिव के मंदिर.

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सती के वियोग में शिव इतना रोए कि उनके आंसू नहीं रुके और उन्हीं आंसुओं के कारण 2 तालाब बन गए. इनमें से एक राजस्थान के पुष्कर में है और दूसरा यहां कटाशा में है. पौराणिक कथाओं में उल्लेख शिव ने सती से शादी के बाद कई साल कटासराज में ही गुजारे थे. यह मंदिर करीब 900 साल पुराना है.

भक्त प्रह्लाद निर्मित नृसिंह मंदिर

पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में भक्त प्रह्लाद ने भगवान नृसिंह के सम्मान में एक मंदिर बनवाया था. इसे प्राचीनकाल में ‘भक्त प्रह्लाद का मंदिर’ के रूप में जाना जाता था और इसका नाम प्रह्लादपुरी मंदिर है. मुल्तान के विश्वप्रसिद्ध किले के अंदर बना यह मंदिर किसी जमाने में मुल्तान शहर की पहचान हुआ करता था.

आज भी होली के समय इस मंदिर में विशेष रूप से पूजन की जाती है. वैसे इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं नरसिंह भगवान ने एक खंभे से निकलकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का वध किया था. मान्यता यह भी है कि होली का त्योहार और होलिकादहन की प्रथा भी यहीं से आरंभ हुई.

15 सौ साल पुराना पंचमुखी हनुमान मंदिर

करांची में बने इस 1500 साल पुराने पंचमुखी हनुमान मंदिर में काफी भक्त पूजन के लिए जाते हैं. नागरपारकर के इस्लामकोट में पाकिस्तान का यह इकलौता ऐतिहासिक राम मंदिर है. एक और पंचमुखी हनुमान मंदिर कराची के शॉल्जर बाजार में ही है.

पेशावर का गोरखनाथ मंदिर

पाकिस्तान के पेशावर में गोरखनाथ का मंदिर स्थित है. यह मंदिर करीब 160 साल पुराना है. आजादी के समय भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद से ही यह मंदिर बंद पड़ा हुआ था. लेकिन पेशावार हाईकोर्ट के आदेश पर नवंबर 2011 में इसे दोबारा खोला दिया गया है.

सिंध का गौरी मंदिर

गौरी मंदिर पाक के सिन्ध प्रांत के थारपारकर जिले में बना हुआ है. पाकिस्तान के इस जिले में अधिकतर आदिवासी निवास करते हैं. जिन्हें थारी हिन्दू कहा जाता है. मध्यकाल में बने इस मंदिर में हिन्दू और जैन धर्म के अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई हैं.

मरी इंडस मंदिर

पंजाब के कालाबाग में स्थित यह मंदिर मरी नामक जगह पर है. यह इलाका पहले कभी गांधार प्रदेश का हिस्सा था. पांचवी सदी में बना यह मंदिर स्थापत्य की दृष्टि से अद्भुत है. हालांकि सरकार की उपेक्षा के कारण यह मंदिर अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. 

हज़ार साल पुराण है वरुणदेव मंदिर

देश का विभाजन होने के बाद साल 1947 में करीब एक हज़ार साल पुराने इस अद्भुत मंदिर को भू-माफिया ने हथिया लिया था. साल 2007 में पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने इस बंद पड़े क्षतिग्रस्त मंदिर को पुनः तैयार करवा दिया, लेकिन देखरेख नहीं होने से मंदिर फिर क्षतिग्रस्त होने लगा है.

मुस्लिम भी करते हैं स्वामीनारायण के दर्शन 

करीब 164 वर्ष पुराने स्वामी नारायण मंदिर में हिन्दुओं के साथ ही कई मुस्लिम भी पहुंचते हैं. यह मंदिर सिंध प्रांत के कराची में स्थित है. मंदिर में बनी धर्मशाला में सभी लोगों के ठहरने की व्यवस्था है.

(नोट : यह लेख आपकी जागरूकता, सतर्कता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकर से सलाह जरूर लें.)