इंटरनेट की दुनिया में 300 रुपए में बिकता है आपका डाटा

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फेसबुक पर डेटा चोरी होने के बाद दुनियाभर में डेटा सिक्योरिटी को लेकर बहस छिड़ी हुई है. बड़े-बड़े टेक टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट अपना अपना सजेशन दे रहे हैं. लेकिन कंटेंट मार्केटिंग एजेंसी Fractl की नई रिपोर्ट के मुताबिक डार्क वेब की दुनिया में चंद रुपयों में आपका डेटा बिक रहा है.

Fractl एजेंसी ने ये रिपोर्ट डार्क वेब से लेकर वॉल स्ट्रीट मार्केट और ड्रीम प्वाइंट तक रिसर्च करने के बाद तैयार की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक आपके जीमेल अकाउंट से लेकर फेसबुक और बाकी ऐप्लीकेशन पर डाला गया डेटा महज चंद रुपयों की खातिर चुराकर, इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

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कितने में बिक रहा डेटा?
Fractl की रिपोर्ट के मुताबिक डार्क वेब पर फेसबुक लॉगिन महज 5.20 डॉलर यानि 336 रुपए में बिक रहा है. इसके जरिए क्रिमिनल आपके पर्सनल डेटा को हैक कर अपने मन मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं. फेसबुक के अलावा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली PayPal पर मौजूद आपके पूरे आर्थिक डेटा को महज 16 हजार रुपए में हासिल किया जा सकता है.

अगर आपके पूरे जीमेल डेटा की बात करें तो आपको हैरानी होगी कि कोई भी महज 65 रुपए में हैकर की मदद से आपकी इनफार्मेशन चुरा सकता है. इसमें आपके जरूरी मेल के अलावा बैकिंग डिटेल्स भी शामिल हो सकती हैं.

इंटरनेट पर A टू Z इंफोरमेशन मौजूद
इंटरनेट की दुनिया को सुरक्षित कहने वाले कितना भी दावा कर लें लेकिन रियल में आपकी हर इनफार्मेशन को हैक किया जा सकता है. Fractl की रिपोर्ट के मुताबिक आपकी पूरी ऑनलाइन आइडेंटिटी, जिसमें पर्सनल आइडेंडिटी नंबर, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य इनफार्मेशन महज 1200 डॉलर में हैक की जा सकती है.

किसे बेचा जाता है आपका पर्सनल डेटा?
साइबर स्काउट के संस्थापक एडम लेविस के मुताबिक ‘हैकिंग दरअसल डिमांड और सप्लाई का खेल है.’ आज मार्केट में आपकी पर्सनल इनफार्मेशन को खरीदने वालों की भरमार है. इनमें कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां तैयार हैं. हैकर्स आपकी जानकारियां चुराकर जितना जल्दी हो सकता है, कंपनियों को बेच देते हैं.

कार्बन ब्लैक सिक्योरिटी फर्म के स्ट्रैटेजिस्ट रिक मैकइलेरी के मुताबिक बीते साल 5.3 अरब रिकॉर्ड एक्सीडेंट से लीक हुए थे. जबकि 2.6 अरब रिकॉर्ड को हैकिंग कर चुराया गया.

दुनिया की बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए यूजर्स के निजी डेटा का सहारा ले रही हैं. कंपनियां उस पैटर्न को समझकर अपनी आगे की नीतियां निर्धारित करती हैं.

किन लोगो की इनफार्मेशन चराते है हैकर्स?
सिक्योरिटी फर्म जेवेलिन के वरिष्ठ वाइस प्रेसिडेंट अल पास्कुल के मताबिक हैकर्स के निशाने पर अमीर लोग होते हैं. उदाहरण के लिए उन्होंने बताया कि एक स्टुडेंट की बजाए रिटायर शख्स उनका आसाना निशाना होगा. क्योंकि उसके पास सेविंग मनी कही ज्यादा होती है.

कुछ इसी तरह इलेक्शन के दौरान सबसे ज्यादा मांग वोटरों के डेटा की होती है. ऐसे में हैकर्स के निशाने पर इलेक्शन करने वाली संस्थाएं होती है. पास्कुल ने तो यहां तक बताया कि हैकर्स आसानी से वोटिंग मशीनों में सेंध लगा सकते हैं.