GSTIN : जीएसटिन क्या होता है, जीएसटिन के अंकों का क्या मतलब होता है?

कई लोग सोचते हैं की बिजनेस (How to do business) करना काफी आसान काम होता है लेकिन ये जितना आसान लगता है उससे काफी ज्यादा मुश्किल भी है क्योंकि इसमें लगने वाले टैक्स (Tax on business) के बारे में कई लोगों को जानकारी नहीं होती. कई लोग ये नहीं जानते की बिजनेस शुरू करने पर उन्हें किन तरीकों के सर्टिफिकेट (Certificate for business taxation) बनवाने पड़ते हैं. खैर अगर आप कोई बिजनेस शुरू कर रहें हैं तो आपको GST नंबर (GST number for business) की जरूरत होती है ताकि आप जो खरीद रहे हैं उस पर GST दे सकें और जो बेच रहें हैं उस पर GST ले सकें. GST लेने के लिए आपको GST नंबर की जरूरत होती है जिसे GSTIN कहते हैं.

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कई लोग सोचते हैं की बिजनेस (How to do business) करना काफी आसान काम होता है लेकिन ये जितना आसान लगता है उससे काफी ज्यादा मुश्किल भी है क्योंकि इसमें लगने वाले टैक्स (Tax on business) के बारे में कई लोगों को जानकारी नहीं होती. कई लोग ये नहीं जानते की बिजनेस शुरू करने पर उन्हें किन तरीकों के सर्टिफिकेट (Certificate for business taxation) बनवाने पड़ते हैं. खैर अगर आप कोई बिजनेस शुरू कर रहें हैं तो आपको GST नंबर (GST number for business) की जरूरत होती है ताकि आप जो खरीद रहे हैं उस पर GST दे सकें और जो बेच रहें हैं उस पर GST ले सकें. GST लेने के लिए आपको GST नंबर की जरूरत होती है जिसे GSTIN कहते हैं.

GSTIN क्या होता है? (What is GSTIN?)

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आप अगर बहुत पहले से बिजनेस कर रहे हैं तो आपने VAT का नाम सुना होगा जो आपकी कंपनी या संस्था प्रॉडक्ट बनाती है उसकी manufacturing पर लगता है. इसके अलावा भी कई टैक्स आपको बिजनेस करने के लिए सरकार को देना पड़ता है. इन सभी टैक्स की जगह अब GST यानि goods and service tax ने ले ली है.

जो लोग पहले VAT सिस्टम में आते थे उन्हें पहले TIN नंबर मिलता था. इसी तरह GST के आने के बाद से बिजनेस करने वालों को TIN की जगह GSTIN दिया जाता है. GSTIN 15 डिजिट का नंबर होता है और इसमें कुछ अंक आपके PAN नंबर के होते हैं.

GSTIN के अंकों में क्या होता है? (GSTIN letter meaning)

GSTIN के 15 अंक होते हैं जो अलग-अलग भागों में विभाजित होते हैं. इसमें हर भाग का अपना अलग मतलब होता है. GSTIN के पहले जो दो अंक होते हैं वो भारत के राज्य का कोड होता है. ये उस राज्य का कोड होता है जिस राज्य में बिजनेस किया जा रहा है. भारत के हर राज्य के निम्न GST Code है.

01-जम्मू कश्मीर, 02-हिमाचल प्रदेश, 03-पंजाब, 04-चंडीगढ़, 05-उत्तराखंड, 06-हरियाणा, 07-दिल्ली, 08-राजस्थान, 09-उत्तर प्रदेश, 10-बिहार, 11-सिक्किम, 12-अरुणाचल प्रदेश, 13-नागलैंड, 14-मणिपुर, 15- मिजोरम, 16-त्रिपुरा, 17-मेघालय, 18-असम, 19-पश्चिम बंगाल, 20-झारखंड, 21-ओड़ीसा, 22-छत्तीसगढ़, 23-मध्य प्रदेश, 24-गुजरात, 25-दमन दीव, 26-दादर एवं नगर हवेली, 27-महाराष्ट्र, 28-आंध्र प्रदेश, 29-कर्नाटक, 30-गोवा, 31-लक्ष्यद्वीप, 32-केरल, 33-तमिलनाडु, 34-पॉण्डिचेरी, 35-अंडमान निकोबार

GSTIN में तीसरे से लेकर बारहवे अंक के बीच में 10 अंक होते हैं जो व्यापारी के PAN अंक होते हैं.

GSTIN का तेरहवाँ अंक ये दर्शाता है की आपका जो बिजनेस है वो कितने नंबर का बिजनेस है. इसे समझने के लिए मान लेते हैं की आपके दो बिजनेस है. एक बिजनेस आपने 2017 में शुरू किया और दूसरा 2018 में तो 2017 वाले को 1 अंक मिलेगा और 2018 वाले को दूसरा. अगर आप एक ही साल में कई बिजनेस शुरू करते हैं तो भी सबसे पहले वाले बिजनेस को 1 अंक और उसके बाद वाले को आगे के अंक मिलेंगे. अगर आपके पास 10 से ज्यादा बिजनेस हैं तो फिर उसके आगे A,B,C,D…… अक्षर आपको दिये जाएंगे.

GSTIN के 14वें अक्षर में आपको सिर्फ Z मिलेगा. इसका यहाँ कोई मतलब नहीं है. इसे भविष्य को लेकर किसी प्रयोग के विकल्प में रखा गया है.

GSTIN का 15वां अंक एक चेकसम कोड होता है जो computer generated होता है. ये आपके GSTIN के 14 अंकों का योग होता है.

GSTIN का क्या उपयोग है? (Use of GSTIN)

– GSTIN GST के नेटवर्क पर दर्ज होते हैं जिससे ये आप जिस व्यक्ति से GST ले रहे हैं और जिसे GST दे रहें हैं उनकी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है और प्रोसैस काफी तेज हो जाता है.

– सामान की बिक्री करने वाला जैसे ही अपने बिक्री रिटर्न में उसे GSTIN के साथ चड़ाता है आगे चलकर खरीद करने वाले कारोबारी को अपने अकाउंट में वह सौदा अपने आप दर्ज मिलता है. बाद में अपनी ख़रीदारी का रिटर्न भरते समय इन्हे अलग से दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती है.

– Product code के अनुसार उनकी खरीद-बिक्री पर आपकी टैक्स देनदारी आपके अकाउंट में दिखती है.

GST भारत में एक अच्छी पहल है जिसके माध्यम से products manufacturing पर लगने वाले ढेर सारे टैक्स की जगह सिर्फ एक टैक्स GST ने ले ली है. इसके माध्यम से टैक्सेशन काफी आसान हो गया है. सारी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाने से सब कुछ पारदर्शी हो गया है.