Satya Nadella : माइक्रोसॉफ्ट के सीइओ सत्या नडेला की कहानी

भारत के ऐसे कई शख्स हैं जिनके नाम का डंका पूरी दुनिया में गूंज रहा है. ऐसे ही एक शख्स है सत्या नडेला (Satya nadella). सत्या नडेला हर साल किसी न किसी बिजनेस सूची में टॉप पर रहते हैं. वे सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ (microsoft current ceo) नहीं बल्कि एक अक्लमंद बिजनेस पर्सन भी हैं. माइक्रोसॉफ्ट को आगे बढ़ाने में उनका काफी योगदान रहा है.

भारत के ऐसे कई शख्स हैं जिनके नाम का डंका पूरी दुनिया में गूंज रहा है. ऐसे ही एक शख्स है सत्या नडेला (Satya nadella). सत्या नडेला हर साल किसी न किसी बिजनेस सूची में टॉप पर रहते हैं. वे सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ (microsoft current ceo) नहीं बल्कि एक अक्लमंद बिजनेस पर्सन भी हैं. माइक्रोसॉफ्ट को आगे बढ़ाने में उनका काफी योगदान रहा है.

सत्या नडेला का बचपन (Satya nadella biography)

सत्या नडेला का जन्म (satya nadella birth) आंध्रप्रदेश के हैदराबाद में 19 अगस्त 1967 को हुआ था. वे एक तेलगु परिवार से हैं और उनके पिता (satya nadella father) बुक्कापुरम नाडेला एक आईएएस थे. सत्या नडेला बचपन से ही पड़ने में काफी होशियार थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद के बेगमपेट में स्थित हैदराबाद पब्लिक स्कूल (satya nadella school) से हुई थी. उन्हें बचपन से ही चीजों को बनाने का बड़ा शौक था. जब वो थोड़े बड़े हुए तो उन्हें लगा कि उनका भविष्य कंप्यूटर साइंस में ही है.

सत्या नडेला की पढ़ाई (Satya nadella education)

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. साल 1988 में उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली थी. इसके बाद वे अमेरिका चले गए जहां पर उन्होने
विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस में एम.एस किया. साल 1990 में उनकी ये डिग्री भी पूरी हो गई. इसके बाद उन्होंने शिकागो विश्वविधालय से एमबीए की पढ़ाई की.

सत्या नडेला के करियर की शुरूवात (Satya nadella career)

सत्या नडेला ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सन माइक्रोसिस्टम (satya nadela in sun micro system) में कंपनी के टेक्नोलॉजी टीम में काम किया. कुछ समय यहां काम करने के बाद उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट कंपनी को ज्वाइन किया. यहां भी वे डायरेक्ट सीईओ नहीं बने. बल्कि अपनी सफलता और अपने हुनर के दम पर सफलता की सीढ़ी चढ़ते रहे.

माइक्रोसॉफ्ट और सत्या नडेला (Satya nadella and Microsoft)

साल 1992 में सत्या नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट को ज्वाइन किया था. तब से लेकर वे आज तक जुड़े हैं. शुरूवात में वे एक सर्वर ग्रुप के रूप में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े थे. इसके बाद वे विभिन्न कार्य जैसे सॉफ्टवेयर डिविजन, ऑनलाइन सर्विसेज, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म पर काम करते रहे और फिर मुखिया बनकर सर्वर डिविजन में वापस आ गए.

सत्या नडेला का माइक्रोसॉफ्ट में योगदान (Satya nadella job in microsoft)

माइक्रोसॉफ्ट को आगे ले जाने में उन्हीं का योगदान है. माइक्रोसॉफ्ट में उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रतिनिधित्व किया और कंपनी को दुनिया का सबसे बड़ा क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया. माइक्रोसॉफ्ट में ऑनलाइन सर्विसेज डिविजन में उन्होंने बतौर वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में काम किया. इसके अलावा बिजनेस डिवीजन में वे उपाध्यक्ष बने. इसके बाद कंपनी ने उन्हें ‘सर्विस एंड टूल’ कंपनी का उपाध्यक्ष बना दिया.

क्लाउड कंप्यूटिंग और सत्या नडेला (Cloud computing and satya nadella)

आपको माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस तो याद ही होगा. जिसमें आप एम.एस वर्ड और एक्सेल चलाते हैं. ये पहले ऑफलाइन हुआ करते थे. लेकिन सत्या नडेला इसे क्लाउड नेटवर्क पर लेकर आए ताकि लोगों को अपनी फाइलों को अपने साथ रखकर घूमना न पड़े. माइक्रोसॉफ्ट के डेटाबेस, विंडोज सर्वर और डेवलपर टूल को क्लाउड प्लेटफॉर्म पर लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. वर्तमान में वे माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानि सीईओ हैं. माइक्रोसॉफ्ट के अभी तक कुल तीन सीईओ हुए हैं. पहले तो बिल गेट्स खुद ही थे. जिनकी यह कंपनी है. दूसरे सीईओ स्टीव बॉमर बने थे. और तीसरे सीईओ सत्या नडेला है.

सत्या नडेला पर्सनल लाइफ (Satya nadella personal life)

सत्या नडेला की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने साल 1992 में अनुपमा नडेला से विवाह किया था. अनुपमा सत्या के पिता के दोस्त की बेटी है. इनके तीन बच्चे जिसमें एक बेटा और दो बेटियां हैं. वे अपने परिवार के साथ वाशिंगटन में रहते हैं. सत्या नडेल को भारतीय काव्य का बेहद शौक है. इसके अलावा वे क्रिकेट खेलते हैं.

साल 2019 में फार्च्यून द्वारा जारी बिजनेस पर्सन रैंकिंग में उन्हें पहला स्थान मिला है. बिजनेस के मामले में काफी आगे की सोचते हैं और यही कारण है कि वे माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी के सीईओ हैं. कंपनी को आगे ले जाने के लिए उन्होंने काफी ज़्यादा मेहनत की है.

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