साफ और शुद्ध खाना: लंच और डिनर में छिपी है सेहत

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दिल्ली-मुंबई हो या फिर पटना भोपाल यहां तक कि कोई भी गांव या कस्बा चटकारे और स्ट्रीट फूड का स्वाद सभी का ईमान हिला देता है. सुबह-शाम पार्कों में, सिनेमाघरों के पास से कितने लोग स्नैक्स या चाट पकौड़े खाकर लौटते हैं. चाट, खोमचे वालों बिक्री लगभग बराबर ही है और ग्राहक तेजी से बढ़े हैं. इतने कि दुकानदार का माल खत्म हो जाता है, लेकिन खाने की वाले का मन नही भरता. यह खराब लत है और पेट की बीमारियों का बड़ा कारण. बदलती लाइफ-स्टाइल के बीच प्रश्न यही है कि क्या खाया जाए और क्या नहीं?

क्या खाया जाए?

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दुनिया में दो ही तरह का खाना खाया जाता है. वेजिटेरियन और नॉनवेजिटेरियन यानी की शाकाहारी और मांसाहारी. प्रकृति के मुताबिक वेजिटेरियन खाना हमारी हेल्थ के लिए सबसे जरूरी और उपयोगी है. बॉडी को फिट और मजबूत बनाने के लिए न्यूट्रिशन देने वाले फूड जैसे घी, दूध, फल, ड्राय फ्रूट्स ब्लड, मसल्स और फैट बढ़ाने वाले सोर्स हैं, लेकिन हरी साग-सब्जी कई बीमारियों के इन्फेक्शन से बचाती है. आर्थिक तंगी वाले लोग ड्राय फ्रूट्स यानी की सूखे मेवे खरीदने में असमर्थ होंगे, लेकिन इसकी कमी पौष्टिक तत्व देने वाले सस्ते अमरूद, गाजर, खजूर से पूरी की जा सकती है.

क्या नहीं खाया जाए

रेस्टॉरेंट और ढाबों का खाना हेल्थ के लिए हानिकारक है. घर में सबकुछ है लेकिन लोग मसालेदार सब्जी, चटपटा साग, चटनी खा रहे हैं. सफेद रोटी मिलों के उस आटे से बनाई जाती है जिसे तैयार करने में गेहूं के ऊपरी भाग को छीलकर सभी पोषक तत्वों को भूसी में फेंक दिया जाता है. सोखदार शाक-सब्जियों को इतनी चिकनाई से भूना जाता है कि उनके विटामिन चूल्हे पर ही समाप्त हो जाते हैं. वे केवल नाम मात्र के स्वाद के लिए रह जाती हैं. अगर खाना ताजा और साफ है तो देखेंगे कि चटकारे की लत दूर हो जाएगी और हेल्थ बढि़या.

कैसे खाएं?

खाना खाना लाइफ की सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है,लेकिन इस जरूरी हिस्से को सबसे आसानी और तेजी से निपटाया जाता है. ऑफिस में काम करते हुए, तो कभी ट्रेन पकड़ते हुए तो कभी चलते-फिरते. क्या खाया और क्या पचा? कितना पोषण मिला जैसे सवाल कभी पूछे ही नहीं गए.

आइए जानते हैं कैसे खाना खाया जाता है.

खाते समय विचारों को पवित्र और मन को प्रसन्न रखें. यह आदत खाए डाइजेशन को बेहतर करेगी. ब्लड बढ़ेगा और हेल्थ सुधरेगी.

खाने के दौरान बातें ना करें. खाने-पीने की चीजों को धूल, मक्खियों से बचाएं. फल अच्छी तरह धोएं फिर खाएं.

डाइजेशन के लिए दवाइयों औषधियों का रोज यूज ना करें. इनका प्रयोग बार-बार करने पर पाचन शक्ति इतनी कमजोर हो जाती है कि औषधि के बिना भोजन नहीं पचा सकते.

चिकनाई में तले हुए पकवान थोड़ी मात्रा में वे उतने ही खाएं व जिन्हें पचाने में आंतों और शरीर को भारीपन का अनुभव न हो. इतना अधिक न खाएं कि पेट में गैस और पानी के लिए जगह न रहें.

भोजन से पहले और बाद में हाथ- पैर, मुंह तथा दांतों की सफाई का ध्यान रखिये. इनकी गंदगी से भी रोग उत्पन्न होते देर नहीं लगती. खाने के साथ अनेक चीजें खाने से पेट में गड़बड़ी उत्पन्न होती है, इसलिए उसे अच्छी तरह चबा-चबाकर खाने की आदत डालिए.

रात का रखा हुआ बासी भोजन कभी न करें. गरम चीजें खाकर एकदम ठण्डा पानी या आईस्क्रीम आदि ना खाएं. दांत खराब हो सकते हैं.

जूठा खाना और किसी के जूठे बर्तन में न खाएं.हाथ के नाखूनों को काट दें और साफ रखें. भोजन करने के बाद पेशाब कर लेना सबसे फायदेमंद होता है.