Tokenization System से बदला Online Payment का तरीका

दुनियाभर में साइबर फ्रॉड और निजता के हनन जैसे मामले सामने आ रहे हैं. इन्हीं से बचने के लिए भारत सरकार ने Tokenization System शुरू किया है.

बैंक द्वारा बैंकिंग के तरीकों में हर साल कुछ न कुछ बदलाव किया जाता है. इन्हीं बदलावों में एक खास बदलाव Tokenization भी है. अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं और पेमेंट अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से करते हैं तो Tokenization का सीधा असर आप पर पड़ेगा. Tokenization के जरिये ऑनलाइन पेमेंट करने में थोड़ा सा बदलाव हुआ है, जो आप पर सीधा असर करेगा.

Tokenization क्या है? (What is Tokenization in Banking?)

दुनियाभर में साइबर फ्रॉड और निजता के हनन जैसे मामले सामने आ रहे हैं. इन्हीं से बचने के लिए भारत सरकार ने Tokenization System शुरू किया है. इस सिस्टम की मदद से ई कॉमर्स कंपनीयां आपके डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के डाटा को स्टोर नहीं कर पाएंगी. इसका सीधा लाभ आपको ये मिलेगा कि आपको अपने कार्ड की डिटेल्स का चोरी होने का खतरा नहीं रहेगा.

क्यों लाया गया Tokenization System? (Use of Tokenization Banking) 

अभी तक आप जब ई कॉमर्स साइट पर शॉपिंग करते थे और उसका पेमेंट आप अपने कार्ड के माध्यम से करते थे तो साइट पर सबसे पहले आपको कार्ड की डिटेल्स फिल करनी होती थी. इसमें कार्ड का 16 अंकों का नंबर, सीवीवी नंबर, एक्स्पायरी डेट आदि फिल करना होती थी. इसे आप एक बार फिल कर देते थे तो कंपनी आपके डाटा को सेव कर लेती थी. जब आप दूसरी बार शॉपिंग करते थे तो आपको सिर्फ अपनी डिटेल्स को वेरिफ़ाई करना होता था. मतलब ये सारी डिटेल्स आपको दोबारा नहीं फिल करनी होती थी.

इस पूरे प्रोसेस में आपके कार्ड का डाटा ई कॉमर्स कंपनियों के पास रहता था. यानी आपकी जो संवेदनशील बैंकिंग डिटेल्स हैं वो ई कॉमर्स कंपनियों के पास है. ई कॉमर्स कंपनियां इस डिटेल्स का अपने हिसाब से भी उपयोग कर सकती हैं! इसी से बचने के लिए Tokenization System को शुरू किया गया है.

कैसे काम करेगा Tokenization System? (How Tokenization Works?)

अभी तक ई कॉमर्स साइट पर क्या होता था. इसे तो आप समझ चुके हैं. चलिये अब जानते हैं कि Tokenization System कैसे काम करेगा?

डिजिटल लेनदेन में पहले कंपनियाँ आपका डाटा स्टोर कर लेती थी लेकिन नए साल की शुरुआत से इस सिस्टम को बंद कर दिया गया है. जिसके चलते आपको हर बार पेमेंट करने पर सारी डिटेल्स फिल करनी होगी. लेकिन इस झंझट से बचने के लिए Tokenization System को शुरू किया गया है.

इस सिस्टम के जरिये आपकी कार्ड की डीटेल एक युनिक वैकल्पिक कोड में बदल जाएगी. इसके इस्तेमाल से आप transaction कर पाएंगे. इस प्रक्रिया में सिर्फ आपको CVV Number और OTP की जरूरत पड़ेगी.

जैसे आप किसी वेबसाइट पर पेमेंट करने के लिए गए. वहां आप एक बार अपने कार्ड की डीटेल फिल करें. इसके बाद एक टोकन जनरेट हो जाएगा. इस टोकन का इस्तेमाल आप सिर्फ इसी वेबसाइट पर कर पाएंगे. इसे एक्सेस करने के लिए आपको सिर्फ अपने कार्ड में से CVV नंबर डालना है. इसके बाद एक ओटीपी आएगा जिसे फिल करके तथा अपना पिन डालकर आप अपना पेमेंट कर पाएंगे.

क्या सभी वेबसाइट पर चलेगा एक ही टोकन? (Is Tokenization Safe?) 

Tokenization System के तहत आपको वेबसाइट के जरिये एक टोकन जनरेट करके दिया जाएगा. लेकिन ये टोकन सिर्फ उसी वेबसाइट के लिए लागू होगा जिसके जरिये इसे जनरेट किया गया है.

जैसे आपने पहले flipkart से शॉपिंग की और वहां token generate हुआ. लेकिन अगली बार आप Amazon पर शॉपिंग करने चले गए और वहां आपको कार्ड से पेमेंट करना है तो वहां flipkart ने जो टोकन जनरेट किया था वो नहीं चलेगा. वहां एक नया टोकन जनरेट होगा जो सिर्फ Amazon पर ही काम करेगा. इस तरह आप जितनी अलग-अलग वेबसाइट पर पेमेंट करने जाएंगे. वहां अलग-अलग टोकन जनरेट होंगे.

Tokenization System को आपकी बैंकिंग सुरक्षा के लिए शुरू किया गया है. इसके जरिये कोई भी कंपनी आपकी डीटेल को स्टोर करके नहीं रख पाएगी. पहले ई कॉमर्स कंपनियां आपको अपनी डिटेल्स उनकी वेबसाइट पर सेव करने के लिए कहती थी जिससे डाटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता था. लेकिन इस सिस्टम में आपका डाटा Encrypted ढंग से सेव किया जाएगा. जिससे आपका डाटा चोरी होने का खतरा नहीं रहेगा.

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