Ukraine Russia News: आखिर क्या है रूस-यूक्रेन विवाद? क्या तीसरे विश्वयुद्ध की ओर जा रही दुनिया?

रूस और यूक्रेन विवाद गहराता जा रहा है. इसे तीसरे विश्वयुद्ध का आगाज भी कहा जा रहा है. क्योंकि एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ यूक्रेन के साथ कई पश्चिमी देश है.

रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है. पूरी धरती का करीब 11.52 प्रतिशत भूभाग रूस के पास है. रूस के पास में एक और देश है जिसका नाम यूक्रेन है. रूस और यूक्रेन की बॉर्डर पर रूस ने अपनी सेना को तैनात किया है और माहौल बिलकुल युद्ध वाला है. रूस और यूक्रेन विवाद गहराता जा रहा है. इसे तीसरे विश्वयुद्ध का आगाज भी कहा जा रहा है. क्योंकि एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ यूक्रेन के साथ कई पश्चिमी देश है.

रूस और यूक्रेन विवाद क्या है? (Russia and Ukraine war controversy) 

रूस और यूक्रेन विवाद की जड़ इसके इतिहास में छुपी है. साल 1918 से पहले यूक्रेन रूसी साम्राज्य के अधीन हुआ करता था. लेकिन 1918 में यूक्रेन ने अपनी आज़ादी की घोषणा कर दी. साल 1922 में यूक्रेन सोवियत संघ का सदस्य बन गया लेकिन सोवियत संघ की नीतियों की वजह से यूक्रेन में विद्रोह छिड़ गया और यूक्रेन ने खुद को सोवियत संघ से आज़ाद कर लिया. यूक्रेन ने साल 1991 में अपनी आज़ादी का ऐलान करके 1996 में डेमोक्रेसी को अपनाया.

इस पूरे इतिहास में यूक्रेन एक देश है जो रूस का पड़ोसी देश है. इसका जुड़ाव सांस्कृतिक रूप से रूस के साथ रहा है. कई रूसी लोग भी यहाँ रहते हैं. जब यूक्रेन आजाद हुआ तो यहाँ के लोग दो हिस्सों के समर्थक हुए. एक बड़ा तबका पश्चिमी देशों और नाटो को समर्थन करता था जबकि दूसरा हिस्सा रूस का समर्थन करता था. यूक्रेन की आबादी का छठा हिस्सा रूसी मूल का है जिसके चलते यूक्रेन का रूस से सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है.

रूस और यूक्रेन का विवाद तो सालों से चल रहा है लेकिन इसकी असल शुरुआत होती है साल 2014 से. इस साल यूक्रेन ने रूस समर्थक राष्ट्रपति को उनके पद से हटा दिया था. इस बात से नाराज होकर रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्राइमिया प्रायद्वीप को अपने कब्जे में ले लिया. इसके साथ ही वहाँ के अलगाववादियों को रूस ने अपना समर्थन दिया जिसने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया. इसी विवाद में अभी तक 14 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

यूक्रेन इस समस्या से निकालने के लिए पश्चिमी देशों के साथ मिलकर रहना चाहता है तथा नाटो का सदस्य बनना चाहता है. वहीं रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन नाटो का सदस्य बने. यूक्रेन के नाटो के सदस्य बनने की खबर के चलते ही रूस ने बॉर्डर पर एक लाख हथियारबंद सैनिक तैनात कर दिए.

नाटो क्या है? (What is NATO in Hindi?) 

दूसरे विश्वयुद्द के भयानक परिणाम देखने के बाद पूरा विश्व चिंतित हो उठा. भविष्य में कोई ऐसी घटना न हो इसलिए कई देशों ने एकजुट होकर संयुक्त राष्ट्र का गठन किया. इसे शक्ति प्रदान करने के लिए NATO नाम का एक और संगठन बनाया गया. इसका Full Form ‘North Atlantic Treaty Organization’ है.

NATO एक सैन्य संगठन है जिसमें 30 देशों सदस्य है. ये 30 देश अपनी सेनाओं को दूसरे देशों के साथ जरूरत पड़ने पर साझा करते हैं. जैसे मान लीजिये यूक्रेन अगर नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस फिर उस पर हमला कर देता है तो NATO अपनी सेना भेजकर रूस के विरुद्ध जवाबी कार्यवाही करेगा. इसी वजह से रूस यूक्रेन के नाटो के सदस्य बनने के खिलाफ है.

रूस क्यों कर रहा यूक्रेन का विरोध (Russia and Ukraine controversy) 

रूस एक बहुत ही बड़ा और पावरफुल देश है. रूस नाटो से ये चाहता है कि यूक्रेन कभी भी नाटो का सदस्य न बने. रूस ने नाटो देशों पर आरोप लगाया है कि वे लगातार यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच तनाव को भड़का रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि रूस अब पीछे नहीं हटने वाला है.

यूक्रेन क्या चाहता है? (Ukraine war 2022) 

साल 2014 में रूसी समर्थक राष्ट्रपति हटाने पर रूस ने क्राइमिया पर कब्जा कर लिया था. वहीं रूस का अलगाववादियों को भी समर्थन है. जिस वजह से यूक्रेन में परेशानी के हालत पैदा हो रहे हैं. यूक्रेन पश्चिमी देशों की मदद लेना चाहता है. यूक्रेन अपनी संप्रभुता को बचाने की कोशिश में है.

रूस यूक्रेन पर कोई हमला या सैन्य कार्यवाही न करे इसके लिए सभी पश्चिमी देश एकजुट है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि रूस ने यदि यूक्रेन पर हमला किया तो उस पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाएंगे जिनके बारे में कभी देना सुना न गया हो.

रूस यदि यूक्रेन पर हमला करता है या फिर अपनी सेना का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ करता है तो पश्चिमी देश एकजुट होकर रूस का सामना करेंगे. वहीं हो सकता है नाटो यूक्रेन को अपना सदस्य बनाने पर सहमति दे. ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े देश के साथ पश्चिमी देशों की जंग तीसरे विश्वयुद्द से कम नहीं होगी.

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