आखिर क्यों दक्षिण भारत में ही ज्यादा निवेश कर रही हैं चीनी कंपनियां?

भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजार में स्मार्टफोन बाजार का स्थान एक नबंर पर है. कई चीनी कंपनियां तो अब भारत में ही अपने स्मार्टफोन बनाती हैं. चीनी कंपनियों ने भारत में मोबाइल फोन बनाने की शुरुआत साल 2015 से की थी. 10 प्रमुख चीनी कंपनियां हैं जो भारत में ही भारतीय और वैश्विक बाजारों के लिए स्मार्टफोन बनाती हैं.

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हाल ही में मीडिया में ये खबरें थीं कि चीन भारतीय बाजार में निवेश करने के बाद बेहद डरा हुआ है. उसे इस बात का डर है कि अगर युद्ध हुआ तो भारत दुश्मन राष्ट्र वाले कानून के तहत उसके निवेश को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर सकता है. उससे पहले एक खबर दक्षिण भारत से आई थी. कर्नाटक के एक मंत्री ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया था कि दक्षिण भारत के भौगोलिक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए बैंगलुरू को भारत की उप राजधानी घोषित किया जाए.

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बहरहाल, दोनों खबरों के अलग मायने हैं जो बताते हैं कि चीन से भारतीय प्रतिरक्षा के प्रति एक नए प्रकार की चुनौती के संकेत मिल रहे हैं. फिलहाल यह चुनौती साफ तौर पर नहीं दिख रही है लेकिन आने वाले समय में यह गंभीर समस्या खड़ी करने वाली हो सकती है.

क्यों साउथ इंडिया में निवेश कर रहा है चीन

चंडीगढ़ के एक प्राइवेट डिफेंस स्टडी ग्रुप की मानें तो चीन अपनी लगती सीमा पर से भारत का ध्यान बांटने के लिए दक्षिण भारत में नए प्रकार का मोर्चा खोल सकता है. आप इस बात पर गौर करें तो चीनी कंपनियों का ज्यादातर निवेश दक्षिण भारत में है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की जबरदस्त धमक है. जानकारों की मानें तो यह धमक नरेन्द्र मोदी की सरकार में और बढ़ी है.

 

इन कपंनियों ने बढ़ाया निवेश

भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजार में स्मार्टफोन बाजार का स्थान एक नबंर पर है. कई चीनी कंपनियां तो अब भारत में ही अपने स्मार्टफोन बनाती हैं. चीनी कंपनियों ने भारत में मोबाइल फोन बनाने की शुरुआत साल 2015 से की थी. 10 प्रमुख चीनी कंपनियां हैं जो भारत में ही भारतीय और वैश्विक बाजारों के लिए स्मार्टफोन बनाती हैं.

देश में मिडिल क्लास ग्रुप में सबसे ज्यादा फोन इसी कंपनी के बिकते हैं. खासतौर से रेडमी नोट 04 और रेडमी 04 मॉडल देश का सबसे ज्यादा बिकनेवाला मॉडल है. कंपनी की आंध्र प्रदेश की श्रीसिटी में विनिर्माण इकाई है, जहां वह मेड इन इंडिया स्मार्ट फोन्स का निर्माण करती है. श्याओमी ने भारतीय बाजार में साल 2014 के जुलाई में ई-मार्केटप्लेस फ्लिपकार्ट के माध्यम से प्रवेश किया था. उसके बाद कंपनी साल 2015 से अपने स्मार्टफोन का निर्माण भारत में करना शुरू कर दिया.

इन चीनी दिग्गज स्मार्टफोंस कंपनियों का गढ़ है साउथ इंडिया

श्रीसिटी आंध्र प्रदेश का एक नियोजित एकीकृत बिजनेस सिटी है, जहां कई मध्यम दर्जे के उद्योग स्थापित हैं. कंपनी जल्द ही भारत में सबसे लोकप्रिय रेडमी नोट 04 का आगामी संस्करण रेडमी नोट 05 लॉन्च करने वाली है, जिसके लिए कंपनी और निवेश करने वाली है. यह निवेश भी दक्षिण भारत में ही होगा. ऐसे ही चीनी कंपनी लेनोवो है जिसका कारोबार भारत समेत दुनिया के 60 देशों में फैला हुआ है और कंपनी के उत्पादों की बिक्री 160 देशों में की जाती है. यह कंपनी भी इंडिया में श्रीपेरुम्बुदूर में अपने स्मार्टफोन का निर्माण करती है. इसी तरह पिछले कुछ महीनों में वीवो और चीन की एक अन्य कंपनी ओप्पो को स्मार्टफोन भारतीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं.

 

इन कंपनियों ने भी अपने निवेश के लिए दक्षिण भारत को ही चुना है. चीन की ही एक और कंपनी ओप्पो का निवेश उत्तर भारत के अलावा दक्षिण भारत के तमिलनाडु के चेन्नई में भी है. चीन की कूलपैड समूह ने भारत में स्मार्टफोन के निर्माण के लिए वीडियोकॉन समूह के साथ साझेदारी की है. भारत में बेचे जाने वाले इस कंपनी के स्मार्टफोन को महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित फैक्ट्री में असेंबल किया जाता है. कूडपैड के भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों में कूलपैड कूलप्ले 06, कूलपैड कूलप्ले 01 और कूडपैड नोट 05 शामिल हैं. ऐसे एक नहीं है कई ब्रैैंड और दिग्गज कंपनियाा हैं जो साउथ इंडिया में आ रही हैं. वहांं निवेश कर रही है.

आखिर क्यों कर रहा है चीन ऐसा

सवाल यह हम उठता है कि भारत के दक्षिणी हिस्सों पर ड्रैगन अपनी ताकत क्यों बढ़ा रहा है. खास बात यह है कि चीन हमारी रणनीतिक घेरेबंदी के लिए बांग्लादेश और श्रीलंका में भी निवेश के साथ अपनी सेना भी रखने की योजना बना रहा है. यदि वह इस योजना में सफल रहा तो भारत पूर्ण रूप से चीनी शिकंजे में फंस सकता है.

क्या करना चाहिए है इंडिया को

चीन अपने आर्थिक साम्राज्यवाद को आगे बढ़ा रहा है उससे साफ जाहिर होता है कि भारत उसकी जद में है. चीन की कंपनियां वर्तमान सरकार में बड़ी तेजी से भारत में अपना पांव फैला रही है. लेकिन हमें चीन के इस अप्रत्यक्ष हमले से बचकर रहना होगा. कोशिश करनी होगी कि स्वदेशी कंपनियों को आगे बढ़ाया जाए. और सरकार भी अपने स्तर पर चौकन्नी रहे.

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