टीवी की लाइफ को रीयल मानकर तो नहीं जी रहे आपके बच्चे?

पिछले कुछ वर्षों से मीडिया, फिल्म टी वी एक्टर एक्ट्रेसेस, खिलाड़ी इनका प्रभाव जवान बच्चों पर कुछ ज्यादा ही दिखाई देने लगा है. पहनावे, बात करने, बालों के विभिन्न स्टाइल, बॉडी लैंग्वेज, शारीरिक बनावट की नकल काफी होने लगी है.

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पिछले कुछ वर्षों से मीडिया, फिल्म टी वी एक्टर एक्ट्रेसेस, खिलाड़ी इनका प्रभाव जवान बच्चों पर कुछ ज्यादा ही दिखाई देने लगा है. पहनावे, बात करने, बालों के विभिन्न स्टाइल, बॉडी लैंग्वेज, शारीरिक बनावट की नकल काफी होने लगी है. बच्चों के साथ-साथ कई पेरेंटस भी इस प्रभाव से अछूते नहीं हैं.

बदल रही है सोसायटी

पिछले कुछ समय में बड़े शहरों के बच्चों की सोच में काफी अंतर आया है. बच्चे खुद को साबित करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. विशेषकर फिल्में टीवी, मैग्जीन के मॉडल्स, एक्ट्रर्स को देखकर वे उनकी नकल करने का जुनून उन पर सवार हो जाता है. वे उनकी तरह स्लिम व खूबसूरत दिखाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. खाना-पीना छोड़ना भी उनके लिए मुश्किल नहीं है. सुंदरता के लिए वे अपनी स्किन पर कुछ भी कराने और लगाने के लिए तैयार हैं शरीर पर टैटू गुदवाना, पियर्सिंग कराना उन्हें अच्छा लगता है. परिणाम कुछ भी हो, वे उसकी परवाह किए बिना कॉपी करना चाहते हैं. इस प्रकार कई बच्चे, किशोर, जवान ईटिंग डिस्आर्डर के शिकार बन जाते हैं. ऐसे में पेरेंटस की ड्यूटी बनती है कि वे बच्चों के रोल मॉडल बनें और सिलेब्रिटीज की असलियत उन्हें बताएं.

दिखावे से बचाएं

मेल सिलेब्रिटीज अपने सिक्स पैक, एट पैक्स से बच्चों को प्रभावित करते हैं, वहीं फीमेल सिलेब्रिटीज अपने छरहरे शरीर वाले फिगर से प्रभावित करती हैं. बच्चे भी उनसे प्रभावित होकर उनके जैसा बनने की सोचते हैं. नतीजतन बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. लड़कियां खाना पीना छोड़ कर पतला होना चाहती हैं या दवाइयों का सहारा लेकर, लड़के हाई प्रोटीन डाइट लेकर तरह तरह की एक्सरसाइज करने लगते हैं. ऐसे में पेरेंटस को चाहिए कि वो बच्चों को समझाएं कि मॉडल्स की फिगर और दांतों की सफेदी में फोटोग्राफिक तकनीक का भी हाथ होता है. हर इंसान की बॉडी शेप अलग होती है जो कुदरत की देन है. थोड़ा बहुत बदलाव हम ध्यान देकर कर सकते हैं.

एक्सरसाइज की आदत डलवाएं

बच्चों को प्रारंभ से हल्के फुल्के व्यायाम करने की प्रेरणा दें. हो सके तो प्रातः या शाम की सैर के समय उन्हें साथ ले जाएं. अगर बच्चा किसी खेल में विशेष रुचि लेता है और उसे खेलने का शौक भी है तो उसके खेल को आगे तक ले जाने में मदद करें. कोई कोचिंग दिलवायें. खेलों से भी बच्चों में आत्म विश्वास विकसित होता है, इसलिए जरूरी है बच्चों की शारीरिक एक्टीविटीज का ध्यान रखें. अगर नृत्य बच्चे को पसंद है तो उसे नृत्य क्लास में शामिल कराएं. हो सके सांय के समय वॉक पर अवश्य ले जाएं अगर वो किसी अन्य एक्टीविटी में बिजी हैं.

 

Image source: pixabay.com
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बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ावा दें

बच्चों की नकारात्मक सोच दूर करने में मदद करें. इसके लिए पहले स्वयं को सकारात्मक बनायें. बच्चों के सामने स्वयं कोई ड्रेस पहनने पर सबके विचार न जानें, मसलन मैं बुरी तो नहीं लग रही, मोटी तो नहीं लग रही, क्या यह कलर मुझे सूट कर रहा है या नहीं. बच्चे अगर आपको ड्रेस और ब्यूटी के प्रति इतना जागरूक देखेंगे तो वे भी हर ड्रेस पहनने के बाद नखरे करेंगे. हर समय यह रोना भी न रोयें कि मैं मोटी हो रही हूं बल्कि रोल मॉडल बनें. पौष्टिक आहार का सेवन उनके सामने करें, अपनी डाइट पर कंट्रोल करें, आभूषणों और कपड़ों के प्रति अत्यधिक लगाव न दिखाएं. इस प्रकार बच्चे भी वहीं सीखेंगे. हर ड्रेस में उनका आत्म विश्वास बढ़ाएं जब तक कि वह बहुत वल्गर न हो.

पौष्टिक आहार दें

अपने बच्चों को पौष्टिक आहार लेने के लिए उत्साहित करें. कौन सा आहार या भोजन स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाला है और कौन सा हानिकारक है, इस बारे में उन्हें समझाएं. बच्चों को समझाएं कि वेट कम करने के स्थान पर वे हेल्दी डाइट लें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें. बच्चों को अधिक खाने के लिए प्रेरित न करें. इससे उनका वजन बढ़ेगा. पेरेंटस को स्वयं भी डाइटिंग न कर शारीरिक गतिविधियां बढ़ानी चाहिए और कम वसा वाला रेशेदार, कम कैलोरी वाला खाना लेना चाहिए.

छोटी-छोटी बातों में सहयोग करें

कभी-कभी बच्चे मोटे, गिट्ठे, बहुत पतले होते हैं. उनकी लुक्स के लिए टिप्पणी न करें क्योंकि आत्मविश्वास अधिक जरूरी है परफेक्ट फिगर से. बच्चों को जिम जाने की सही उम्र समझाएं. बाहर के लोग यदि बच्चों की लुक्स पर टिप्पणी दें तो उसे पॉजिटिव लें. उन्हें बच्चों को यह सब कहने के लिए मना करें और स्वयं किसी डाइटीशियन और एक्सरसाइज टेªनर की देखरेख में डाइट प्लान करवायें और व्यायाम के लिए उत्साहित करें.

स्वयं रोल मॉडल बनें

अगर हम कोशिश करके खुद को सुधार कर उनका रोल मॉडल बनें तो अधिक प्रभाव पड़ेगा. सीमित पौष्टिक आहार लेकर, नियमित व्यायाम कर, प्रातः समय पर उठकर, रात्रि में समय पर सोकर, टीवी बहुत न देखकर, न्यूज देखकर, कंप्यूटर पर कम से कम समय बिता कर फालतू की सर्च न करके उन्हें सही राह दिखायें. जब बच्चा घर में ऐसा वातावरण देखेगा तो शायद वो भी आपको कापी करने का प्रयास करेगा और आपकी कही बात को मानने का प्रयास करेगा.

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