खनिज और लवण के भंडार हैं ज्वालामुखी, जमीन को बनाते हैं उपजाऊ

पृथ्वी के सातों महाद्वीप, उपमहाद्वीप एवं भूखंडों में कुल मिलाकर चार सौ से छः सौ बीस ज्वालामुखी पर्वत हैं. कम ही लोग जानते हैं कि ज्वालामुखी बहुत उपजाऊ और खनिज पदार्थों के भंडार भी होते हैं.

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ज्वालामुखी पर्वतों को हो-हल्ला करने वाले पड़ोसी के नाम से कुछ ज्यादा ही जाना जाता है. खासकर जापानी इलाकों में शोर करने वाले मेहमान को लोग बहुत अच्छी तरह से पहचानते हैं. अनुमानतः तीन हजार फुट ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत की क्रूर कहानियां काफी प्रचलित हैं. वैसे हाल में ही भूगोल शास्त्रियों ने इस पर खासी रिसर्च की है.

ज्वालामुखी की भौगोलिक कहानी

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पृथ्वी के सातों महाद्वीप, उपमहाद्वीप एवं भूखंडों में कुल मिलाकर चार सौ से छः सौ बीस ज्वालामुखी पर्वत हैं. सागर तल में सक्रिय संख्या लगभग पांच सौ है, लेकिन सभी ज्वालामुखी ज्यादा भयंकर नहीं होते. कुछ तो सिर्फ राख उगलकर ही संतोष पा जाते हैं. ऐसे ही कुछ ज्वालामुखियों के आसपास गांव भी बसे हुए हैं. इटली के ‘विस्टवियस’ ज्वालामुखी की जमीन फलों के बगीचों के लिए वरदान है जिसमें अंगूर की बाडि़यां बहुत विख्यात हैं. धान की खेती के मामले में जापान एवं फिलीपीन कम नहीं हैं जिससे मनुष्य भरपूर लाभ उठाता है. ज्यादातर ज्वालामुखी पर्वतों की तलहटियां ज्यादा उपजाऊ होती हैं क्योंकि ज्वालामुखी के लावे के कारण मिट्टी में पहले ही वृक्ष-वनस्पतियों के लिए उपयोगी लवण होते हैं.

ज्वालामुखी में होती है बागवानी

अमेरिका के अधिकांश ज्वालामुखी पर्वतों की उपत्यकाओं में कहवे की बागवानी बहुत अच्छी की जाती है. भूगोल शास्त्रियों का कहना है कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया के ज्यादातर ऊंचे पर्वत जो आकाश में उड़ते बादलों को रोक कर उनसे बारिश के रूप में टैक्स वसूलते हैं और नीचे के मैदानों को हरा-भरा और उपजाऊ बनाते हैं. ज्वालामुखी पर्वतों की क्रियाशीलता से ही उत्पन्न हुए हैं. इन सबके अलावा ज्वालामुखी कार्बनडाइऑक्साइड पैदा करते हैं, जो वनस्पतियों के जीवन के लिए उतनी ही उपयोगी है जितनी कि जीव-जन्तु के लिए ऑक्सीजन जरूरी होती है. इस प्रकार से ज्वालामुखी खेती के लिए सहायक सिद्ध हुए हैं.

सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी

विश्व के सभी ज्वालामुखी को दो भागों में बांट दिया गया है- सक्रिय एवं निष्क्रिय जिसे मुर्दा भी कहते हैं. जो ज्वालामुखी अभी थोड़े-बहुत क्रियाशील रह चुके हैं, वे सक्रिय कहे जाते हैं. निष्क्रिय ज्वालामुखी उसे कहते हैं जो कि पहले सक्रिय थे, लेकिन अब एकदम ही ठंडे पड़े हैं.

सक्रिय ज्वालामुखी को दो अवस्था में बांटा गया है: पहला क्षुब्ध ज्वालामुखी एवं दूसरी शांत अवस्था. क्षुब्ध दशा में ज्वालामुखी में लावा आ सकता है, नहीं तो सिर्फ विस्फोट के बाद ही शांत हो जाता है. वैसे विस्फोट हो या उफान, रासायनिक रचना, गैसों तथा भाप ज्वालामुखी के अंदर तत्व की उपस्थिति पर निर्भर है. शांत अवस्था में ज्वालामुखी पर्वत सिवा थोड़ी सी, वह भी कभी-कभी राख उगलने के अतिरिक्त कुछ नहीं करते. यहां तक कि कई बार वर्षों तक वे इतने क्रियाशील भी नहीं दिखते लेकिन ऐसा कभी भी नहीं समझना चाहिए कि शांत ज्वालामुखी पर्वत खतरनाक कम होते हैं क्योंकि कभी कभी ये एकाएक भी फट जाते हैं.

ज्वालामुखी में होती हैं ये उपयोगी चीजें

ठण्डे ज्वालामुखी के लावे में कई उपयोगी वस्तुएं पायी जाती हैं. इनमें से एक ओसिडियन भी है. यह एक तरह का प्राकृतिक कांच है जो अपनी चमक एवं स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है. पुराने जमाने में ओसिडियन (कांच) का प्रयोग आभूषण एवं सजावट के समान बनाने में होता था. मैक्सिको पठार के हिडाल्गो राज्य में पाचुला के समीप अच्छी किस्म का ओसिडियन अब भी पाया जाता है. इसका दूसरा स्रोत इंनियन सागर में स्थित लोस द्वीप है.

मिलते हैं उपयोगी खनिज पदार्थ

ज्वालामुखी की दूसरी देन भ्रामक पत्थर भी है. यह बड़ी ही उपयोगी होती है. इमारतों के निर्माण के साथ झामे के तौर पर भी इसका उपयोग किया जाता है. इक्वेडोर की एंडील पर्वत-श्रेणी में स्थित लाटाकुंभा सिर्फ भ्रामक के पत्थर से रचित है. सबसे अच्छा भ्रामक पत्थर लिपरी टापू में होता है जो इटली देश के कब्जे में है.

Image source: Pixabay.com
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आमतौर से ज्वालामुखी से प्राप्त होने वाली वस्तु सिर्फ गंधक ही है जो कि पुराने ज्वालामुखी विवरों में से प्राप्त की जाती है. ऐसा नहीं माना जाता कि ज्वालामुखी सिर्फ अभिशाप है.ज्वालामुखी फटने की जानकारी अनुभवों से कुछ समय पहले प्राप्त कर लेने से मानव की संपत्ति को बुरे समय से पहले भी बचा लिया जाता है. वर्तमान काल में ज्वालामुखी की अपार शक्ति का रचनात्मक उपयोग करने की बात आज कुछ अंशों में पूरी हो रही है.

दुनिया में है अजीब ज्वालामुखी
इटली के लाडरिलों नामक स्थान पर भूमि में बहुत से ऐसे भी ज्वालामुखी हैं, जिनमें से प्राकृतिक भाप निकलती है. इस भाप को एक इलेक्ट्रिसिटी का प्रोडक्शन केंद्र में पहुंचाकर तीन लाख किलोवॉट बिजली तैयार की जा रही है और आइसलैंड में ज्वालामुखी पर्वतों के द्वारा गरम पानी के कुण्डों की भरमार है क्योंकि वहां इन कुण्डों के गरम पानी से घरों को गरम रखने की व्यवस्था है. वैसे कहने का असली मतलब यह है कि ज्वालामुखी पर्वत से मनुष्य कुछ अपनी दैनिक आवश्यकताओं की भी पूर्ति करता रहता है. इसलिए ज्वालामुखी बेहद काम के और उपयोगी भी होते हैं.