Hartalika teej 2019 : हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, पूजन सामाग्री, तीज कथा

महिलाएं साल भर में कई सारे व्रत रखती हैं लेकिन उस सब में हरतालिका तीज (hartalika teej 2019 in hindi) की महिमा अपरमपार है. ये व्रत कई सारी महिलाएं पूरे उत्साह के साथ एक त्योहार की तरह करती है. इस व्रत को रखना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि इसमें बिना कुछ खाये पिये 24 घंटे से अधिक समय तक रहना पड़ता है और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी पड़ती है. हरतालिका तीज (hartalika teej) का व्रत करने के लिए हरतालिका तीज की पूजा (hartalika teej puja) कैसे करना है और इसका क्या महत्व है, हरतालिका तीज की पूजन सामग्री (hartalika teej pujan samagri) और हरतालिका तीज की कथा (hartalika teej katha) के बारे में जानना जरूरी है.

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महिलाएं साल भर में कई सारे व्रत रखती हैं लेकिन उस सब में हरतालिका तीज (hartalika teej 2019 in hindi) की महिमा अपरमपार है. ये व्रत कई सारी महिलाएं पूरे उत्साह के साथ एक त्योहार की तरह करती है. इस व्रत को रखना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि इसमें बिना कुछ खाये पिये 24 घंटे से अधिक समय तक रहना पड़ता है और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी पड़ती है. हरतालिका तीज (hartalika teej) का व्रत करने के लिए हरतालिका तीज की पूजा (hartalika teej puja) कैसे करना है और इसका क्या महत्व है, हरतालिका तीज की पूजन सामग्री (hartalika teej pujan samagri) और हरतालिका तीज की कथा (hartalika teej katha) के बारे में जानना जरूरी है.

हरतालिका तीज का महत्व

पूरे सालभर की तीज में हरतालिका तीज का विशेष महत्व (hartalika teej mahatv) है. ‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘हरत’ और ‘आलिका’ हरत का मतलब होता है अपहरण और आलिका का मतलब सहेली. पौराणिक मान्यता के अनुसार माँ पार्वती की सहेली उन्हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती है क्योंकि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते हैं और माँ पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती है. इस गुप्त जगह पर जाकर माँ पार्वती ने हरतालिका तीज का व्रत किया और भगवान शिव से विवाह करने का संकल्प लिया.

भारत में सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्‍था है. महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्‍य का वरदान देते हैं. वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्‍त‍ि होती है.

हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त (hartalika teej shubh muhurt)

तृतीया तिथि प्रारंभ: 01 सितंबर 2019 को सुबह 08 बजकर 27 मिनट से.
तृतीया तिथि समाप्‍त: 02 सितंबर 2019 को सुबह 4 बजकर 57 मिनट तक.

अगर आप 01 सितंबर को व्रत कर रही हैं तो पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
प्रात: काल हरतालिका पूजा मुहूर्त: सुबह 08 बजकर 27 मिनट से सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक.

अगर आप 02 सितंबर को व्रत कर रही हैं तो सूर्योदय होने के बाद दो घंटे के भीतर तीज पूजन कर लें. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से सुबह 08 बजकर 58 मिनट तक है.

हरतालिका तीज पूजन सामाग्री

हरतालिका तीज का व्रत करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है पूजन सामग्री (hartalika teej pujan saamagri) जिसे व्रत के के पहले जुटा लें. हरतालिका तीज के लिए निम्न पूजन सामाग्री की आवश्यकता होती है – गीली मिट्टी, बेल पत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल और फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनेऊ, वस्‍त्र, मौसमी फल-फूल, नारियल, कलश, अबीर, चंदन, घी, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, दूध और शहद.

मां पार्वती की सुहाग सामग्री: मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, सुहाग पिटारी.

हरतालिका तीज का व्रत कैसे करते हैं?

हरतालिका तीज (hartalika teej vrat vidhi) के व्रत को कठिन व्रत में से एक माना जाता है. इस व्रत को निर्जल करना पड़ता है. व्रत के पारण से पहले यानि पूरे होने से पहले पानी की एक बूंद ग्रहण करना वर्जित माना गया है. इस व्रत को करने के लिए व्रत वाले दिन सुबह-सवेरे स्‍नान करने के बाद “उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र का उच्‍चारण करते हुए व्रत का संकल्‍प लिया जाता है.

हरतालिका तीज पूजन विधि

हरतालिका व्रत की पूजन विधि (hartalika teej pujan vidhi) सबसे अहम है. इसकी पूजा प्रदोश काल में की जाती है. हरतालिका तीज के दिन इस प्रकार शिव-पार्वती की पूजा की जाती है:

– सबसे पहले शाम के समय स्नान करें और नए वस्त्र धारण करें.
– इसके बाद गीली मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती और उनके बेटे भगवान गणेश की प्रतिमा बनाए.
– इस प्रतिमा को केले के पत्ते पर विराजमान करें.
– इसके बाद एक कलश स्थापित करें और उसका पूजन करें.
– इसके बाद दूध, दही, शक्कर, शहद और घी से पंचामृत बनाएँ.
– आपके द्वारा खरीदी गई सुहाग की सामाग्री को अच्छी तरह सजाकर माँ पार्वती को अर्पित करें.
– शिवजी को भी वस्त्र अर्पित करें.
– अब हरतालिका तीज व्रत कथा को सुने.
– हरतालिका तीज की कथा सुनने के बाद सबसे पहले गणेश जी और फिर शिवजी और फिर माँ पार्वती की आरती उतारें.
– अब भगवान की परिक्रमा करें.
– इसके बाद रात में जागरण करें और सुबह स्नान करें.
– स्नान करने के बाद माँ पार्वती का पूजन करें उन्हें सिंदूर चढ़ाएं.
– फिर ककड़ी और हल्‍वे का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद ककड़ी खाकर व्रत का पारण करें.
– सभी पूजन सामग्री को एकत्र कर किसी सुहागिन महिला को दान दें.

हरतालिका तीज की कथा

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार शिव जी ने माता पार्वती जी को इस व्रत के बारे में (hartalika teej story) विस्तार पूर्वक समझाया था. मां गौरा ने माता पार्वती के रूप में हिमालय के घर में जन्म लिया था. बचपन से ही माता पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में पाना चाहती थीं और उसके लिए उन्होंने कठोर तप किया. 12 सालों तक निराहार रह करके तप किया. एक दिन नारद जी ने उन्हें आकर कहा कि पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु आपकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं. नारद मुनि की बात सुनकर महाराज हिमालय बहुत प्रसन्न हुए. उधर, भगवान विष्णु के सामने जाकर नारद मुनि बोले कि महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती से आपका विवाह करवाना चाहते हैं. भगवान विष्णु ने भी इसकी अनुमति दे दी.

फिर माता पार्वती के पास जाकर नारद जी ने सूचना दी कि आपके पिता ने आपका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया है. यह सुनकर पार्वती बहुत निराश हुईं उन्होंने अपनी सखियों से अनुरोध कर उसे किसी एकांत गुप्त स्थान पर ले जाने को कहा. माता पार्वती की इच्छानुसार उनके पिता महाराज हिमालय की नजरों से बचाकर उनकी सखियां माता पार्वती को घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा में छोड़ आईं. यहीं रहकर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप शुरू किया जिसके लिए उन्होंने रेत के शिवलिंग की स्थापना की. संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का वह दिन था जब माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की. इस दिन निर्जला उपवास रखते हुए उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया.

उनके कठोर तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए माता पार्वती जी को उनकी मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया. अगले दिन अपनी सखी के साथ माता पार्वती ने व्रत का पारण किया और समस्त पूजा सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया. उधर, माता पार्वती के पिता भगवान विष्णु को अपनी बेटी से विवाह करने का वचन दिए जाने के बाद पुत्री के घर छोड़ देने से व्याकुल थे. फिर वह पार्वती को ढूंढते हुए उस स्थान तक जा पंहुचे. इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें अपने घर छोड़ देने का कारण बताया और भगवान शिव से विवाह करने के अपने संकल्प और शिव द्वारा मिले वरदान के बारे में बताया. तब पिता महाराज हिमालय भगवान विष्णु से क्षमा मांगते हुए भगवान शिव से अपनी पुत्री के विवाह को राजी हुए.

इस तरह हरतालिका तीज की पूजा करनी है. हरतालिका तीज की पूजन विधि आपको किताब में भी मिल सकती है जिसमें काफी विस्तार से आपको बताया जाता है. कई लोग पूजा करने के लिए किताब लाते हैं जिंसमें हरतालिका तीज की पूजन विधि, कथा तथा महत्व के बारे में बताया जाता है. अगर आप विस्तार से इसकी पूजा के बारे में जानना चाहते हैं तो किताब को जरूर पढ़ें.

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