मकर लग्न के ग्रहों की स्थिति, सारगर्भित विवेचना

आकाश में 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग को मकर लग्न (makar lagna) कहते हैं. जिस जातक के जन्म के समय आकाश के पूर्वी क्षितिज में यह भाग उदित होता है उस जातक का लग्न मकर माना जाता है. मकर राशि (makar rashi) का तत्व पृथ्वी है और इनकी राशि का स्वामी शनि है. मकर राशि के लाग जिम्मेदार, अनुशाषित, आत्म नियंत्रण वाले होते हैं.

आकाश में 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग को मकर लग्न (makar lagna) कहते हैं. जिस जातक के जन्म के समय आकाश के पूर्वी क्षितिज में यह भाग उदित होता है उस जातक का लग्न मकर माना जाता है. मकर राशि (makar rashi) का तत्व पृथ्वी है और इनकी राशि का स्वामी शनि है. मकर राशि के लाग जिम्मेदार, अनुशाषित, आत्म नियंत्रण वाले होते हैं.

मकर लग्न में चंद्र (makar lagna me chandra)

मकर लग्न में चंद्र सातवे भाव का अधिपति होता है. सातवे भाव का अधिपति होने के कारण चंद्रमा स्त्री, कामवासना, चोरी, झगड़ा, अशांति, उपद्रव, अग्निकांड जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. इन विषयों में अगर आपका चंद्र बलशाली है तो आपको काफी अच्छा फल देगा और आपको इन बुरी चीजों से बचा कर रखेगा.

मकर लग्न में सूर्य (Makar lagna me surya)

मकर लग्न में सूर्य आठवे भाव का अधिपति होता है. आठवे भाव का अधिपति होने के कारण व्याधि, जीवन, आयु, मृत्यु का कारण, मानसिक चिंता, समुद्र यात्रा, नास्तिक विचारधारा, ससुराल, दुर्भाग्य, दरिद्रता, आलस्य, जेलयात्रा, अस्पताल, भूत-प्रेत, जादू-टोना जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है.

मकर लग्न में मंगल (Makar lagna me mangal)

मकर लग्न में मंगल चौथे और ग्यारहवे भाव का अधिपति होता है. चौथे भाव का अधिपति होने के कारण मंगल भूमि भवन, वाहन, मित्र, साझेदारी, शांति, जल, जनता, स्थायी संपत्ति, दया, परोपकार, छल-कपट, अंतकरण की स्थिति, जलीय पदार्थों का सेवन, धन संचय, झूठा आरोप, अफवाह, प्रेम संबंध, प्रेम विवाह जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. वहीं ग्यारहवे भाव का अधिपति होने के कारण मंगल चंद्र लोभ, लाभ गुलामी, संतान हीनता, कन्या संतति, रिश्तेदार, रिश्वतखोरी, बेईमानी जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है.

मकर लग्न में बुध (Makar lagna me budh)

मकर लग्न में बुध छठे भाव का अधिपति होता है. छठे भाव का अधिपति होने के कारण बुध बीमारी, कर्ज, दुश्मन, चिंता, शंका, पीड़ा, ननिहाल, असत्य भाषण, योगाभ्यास, जमींदारी, साहूकारी, वकालत, व्यसन, ज्ञान, अच्छा या बुरा व्यसन जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. उपरोक्त विषय में शुभ फल के लिए आपकी राशि में बुध की स्थिति बलशाली होनी चाहिए.

मकर लग्न में गुरू (Makar lagna me guru)

मकर लग्न में गुरू बारहवे भाव का अधिपति होता है. बारहवे भाव का अधिपति होने के कारण गुरू निद्रा, यात्रा, हानि, दान, व्यय, दंड, विदेश यात्रा, भोग ऐश्वर्य, लंपटगिरी, परस्त्री गमन, व्यर्थ भ्रमण जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. आपकी कुंडली में गुरू बलशाली है तो आपको उपरोक्त विषय में शुभ फल देगा और अगर आपका गुरू कमजोर है तो आपको इन विषयों में अशुभ फल मिलेंगे.

मकर लग्न में शुक्र (Makar lagna me shukra)

मकर लग्न में शुक्र पांचवे और दसवे भाव का अधिपति होता है. पांचवे भाव का अधिपति होने के कारण शुक्र बुद्धि, आत्मा, स्मरण शक्ति, विद्या ग्रहण करने की क्षमता, शक्ति नीति, आत्मविश्वास, प्रबंध कुशलता, देव भक्ति, देश भक्ति, नौकरी का त्याग, धन मिलने के उपाय, अनायास धन मिलने की संभावना, व्रत, पुत्र संतान, स्वाभिमान, अंहकार आदि विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. दसवे भाग का अधिपति होने के कारण शुक्र राज्य, मान प्रतिष्ठा, कर्म, पिता, प्रभुता, व्यापार, अधिकार, ऐश्वर्य भोग, कीर्तिलाभ, नेतृत्व, विदेश यात्रा, पैतृक संपत्ति जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है.

मकर लग्न में शनि (Makar lagna me shani)

मकर लग्न में शनि पहले और दूसरे भाव का अधिपति होता है. पहले भाव का अधिपति होने के कारण शनि आपके रूप, चिन्ह, जाति, शरीर, आयु, सुख-दुख, विवेक, मस्तिष्क, व्यक्ति के स्वभाव, आकृति और उसके संपूर्ण व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है. दूसरे भाव का अधिपति होने के कारण शनि कुल, आंख, नाक, कान, गला, स्वर, आभूषण, सौंदर्य, गायन कुटुंब का प्रतिनिधित्व करता है.

मकर लग्न में राहु (Makar lagna me raahu)

मकर लग्न में राहु नवम भाव का अधिपति होता है. नवम भाव का अधिपति होने के कारण राहु धर्म, पुण्य, भाग्य, गुरू, ब्राह्ममा, देवता, तीर्थ यात्रा, भक्ति, मानसिक वृत्ति, भाग्योदय, पिता का सुख, तीर्थ यात्रा, दान, इत्यादि विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. उपरोक्त विषय में शुभ फल के लिए राहु की स्थिति का बलशाली होना जरूरी है.

मकर लग्न में केतु (Makar lagna me ketu)

मकर लग्न में केतु तीसरे भाव का अधिपति होता है. तीसरे भाव का अधिपति होने के कारण केतु नौकर, चाकर, सहोदर, अभक्ष्य पदार्थों का सेवन, क्रोध, भ्रम लेखन, कंप्यूटर, मोबइल, अकाउंट्स, पुरूषार्थ, साहस, शौर्य, दासता, योगाभ्यास जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है. अगर आपका केतु बलशाली है तो आपको उपरोक्त विषय में शुभ फल देता है.

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