Research: आंतों और दिमाग के बीच हार्मोन्स से अच्छे मैसेंजर हैं न्यूराॅन्स

जब मामला पेट से जुड़ा होता है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. क्योंकि हमें भूख लगने पर इसकी सीधी जानकारी दिमाग तक पहुंचती है. इसका एक कारण हमारी आंतों और दिमाग के बीच हार्मोन्स से होने वाली कनेक्टिविटी है. हाल में हुई रिसर्च में आंतों और ब्रेन के बीच न्यूराॅन्स के माध्यम से भी कनेक्टिविटी होने की बात पता चली है. इस रिसर्च के पहले तक हार्मोन्स को ही दोनों के बीच मैसेंजर माना जाता था. 

जब मामला पेट से जुड़ा होता है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. क्योंकि हमें भूख लगने पर इसकी सीधी जानकारी दिमाग तक पहुंचती है. इसका एक कारण हमारी आंतों और दिमाग के बीच हार्मोन्स से होने वाली कनेक्टिविटी है. हाल में हुई रिसर्च में आंतों और ब्रेन के बीच न्यूराॅन्स के माध्यम से भी कनेक्टिविटी होने की बात पता चली है. इस रिसर्च के पहले तक हार्मोन्स को ही दोनों के बीच मैसेंजर माना जाता था. 

क्या की गई रिसर्च (What went Research)

डरहम यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट डिएगो बोहोरव्केज ने यह खोज की. उन्होंने इलेक्ट्राॅन माइक्रोस्कोप की मदद से की गई रिसर्च में पाया कि आंतों की तह में हार्मोन्स पैदा करने वाली कोशिकाओें जैसे उभार होते हैं. इन उभारों का आकार उन कोशिकाओं के जैसा था, जो कि दो न्यूराॅन्स के बीच कनेक्टिविटी बनाने में काम आते हैं. साइंटिस्ट डिएगो के मुताबिक ये उभार ही न्यूराॅन्स की आवाजाही में मदद करते हैं.

चूहों पर भी किया गया प्रयोग (Experiments were performed on rats)

रिसर्च को पुख्ता रूप देने के लिए साइंटिस्ट ने अपनी टीम के साथ मिलकर चूहों पर कुछ प्रयोग किए. इसके लिए चूहों की आंतों की तह में एक चमकदार वायरस इंजेक्ट किया गया. यह वायरस न्यूराॅन्स के संपर्क बिन्दुओं (सायनेप्स) के माध्यम से फैलता है.

साइंस रिसर्च मैग्जीन में बताया गया कि हार्मोन्स बनाने वाली इन कोशिकाओं में चमक पैदा हुई और यह चमक तेजी से दूसरी कोशिकाओं में भी फैल गई. जबकि आसपास के सेल्स वेगस न्यूराॅन्स की सेल्स थीं. जिससे साबित होता है कि हार्मोन्स बनाने वाली ये सेल्स न्यूराॅन्स के माध्यम से आगे बढ़ती हैं.

Neurons faster than hormones

डरहम यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट डिएगो बोहोरव्केज और उनकी टीम ने इस रिसर्च में पाया कि हार्मोन्स पेट की जिस जानकारी को दिमाग तक पहुंचाने में लगभग 10 मिनट का टाइम लेते हैं, उसी संदेश को न्यूराॅन्स महज चंद सेकंड्स में दिमाग तक पहुंचा देते हैं. इससे साबित होता है कि हार्मोन्स की तुलना में न्यूराॅन्स कहीं अधिक अच्छे और तेज संदेश वाहक हैं.

मोटापे की समस्या से मिलेगा निजात

हार्मोन्स बनाने वाली सेल्स के उभार वेगस न्यूराॅन्स के साथ जुड़कर सायनेप्स तैयार करते हैं. जिससे न्यूराॅन्स के माध्यम से चल रहे संदेश से दिमाग को पेट भरने की जानकारी जल्दी मिल जाती है. इसी तरह मोटापे की समस्या से निपटने के लिए इस जानकारी का उपयोग किस तरह किया जाए, इसकी कोशिश की जा रही है. 

error: Content is protected !!