Job: नौकरी बदलने से पहले रखें इन बातों का ख्याल

सभी अपनी उन्नति के लिए प्रयास करते हैं. अक्सर लोग एक कंपनी को छोड़कर दूसरी कंपनी में भी जॉब ऑपर्चुनिटी तलाशते हैं. किसी एक कंपनी को छोड़ने और दूसरी कंपनी को ज्वाइन करने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है. 

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सभी अपनी उन्नति के लिए प्रयास करते हैं. अक्सर लोग एक कंपनी को छोड़कर दूसरी कंपनी में भी जॉब ऑपर्चुनिटी तलाशते हैं. किसी एक कंपनी को छोड़ने और दूसरी कंपनी को ज्वाइन करने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

नई जॉब शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान 

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किसी भी कंपनी को ज्वाइन करने से पहले आपको ऑफर लेटर, प्रोबेशन पीरियड, नोटिस पीरियड, मेडिकल इंश्योरेंस, पीएफ और पे-रोल की जानकारी ले लेनी चाहिए. इन बिंदुओं पर ध्यान नहीं देना आपको महंगा पड़ सकता है. बाद में हाथ मलने से अच्छा है कि आप पहले ही इन बिंदुओं पर ध्यान दे लें.

क्या है ऑफर लेटर? (What is the offer letter)

किसी कंपनी में इंटरव्यू के बाद और ज्वानिंग से पहले एक लेटर दिया जाता है, जिसमें आपकी सैलरी संबंधी सारी डिटेल का उल्लेख रहता है. इसे ही ऑफर लेटर कहते हैं. कई बार जल्दबाजी या लापरवाही के चलते एम्प्लाई ऑफर लेटर लिए बिना ही जॉब स्वीकार कर ली हैं. 

किसी भी कंपनी में जॉब ज्वाइन करने पहले उससे ऑफर लेटर मांगें और ध्यान पूर्वक उसे पढ़कर स्वीकार करें. कई बार जब आप नई कंपनी ज्वाइन करते हैं तो आपसे पुरानी कंपनी का ऑफर लेटर मांगा जाता है, इसलिए कंपनी से ऑफर लेटर की हार्ड कॉपी भी लेना चाहिए. 

ज़रूर पूरा करें प्रोबेशन पीरियड (Probation Period)

सरकारी या निजी किसी भी सेक्टर आपको जॉब छोड़ने के लिए प्रोबेशन पीरियड पूरा करना आवश्यक होता है. कंपनियों का प्रशासन इस दौरान आपके काम के आकलन करता है. इस पीरियड में आपकी छोटी से छोटी गलती कंपनी को आपके खिलाफ कार्रवाई करने का मौका दे सकती है. 

समझें क्या है नोटिस पीरियड (What is notice period)

नौकरी छोड़ने के कुछ नियम होते हैं, इनमें से एक नियम होता है नोटिस पीरियड को पूरा करने का. नौकरी ज्वाइन करते समय ही कंपनियां आपको जॉब छोड़ते वक्त एक निश्चित नोटिस पीरियड तय कर देती हैं. इस्तीफ देने के बाद आपको कंपनी में यह पीरियड पूरा करना होता है. 

मेडिकल इंश्योरेंस है आपका हक 

कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लेबर कानून के तहत कंपनियों की ओर से एम्प्लाई को मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है. इसका प्रीमियम कर्मचारी की सैलरी से काटा जाता है. बीमार होने पर आपको और आपकी फैमिली को इस बीमा के माध्यम से मेडिकल कवर दिया जाता है.

निकाल सकते हैं कर्मचारी भविष्य निधि

कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कर्मचारी की सैलरी का कुछ हिस्सा और उतना ही हिस्सा कंपनी की ओर से डाला जाता है. इसे आप रिटायरमेंट के बाद निकाल सकते हैं. साथ ही कुछ जरूरी कार्यों के लिए भी इसे आप बीच में निकाल सकते हैं. 

पे-रोल बारे में एचआर से जानें 

आज कल कई कंपनियों ने कर्मचारियों को पे-रोल के स्थान पर कॉन्ट्रैक्ट पर रखना शुरू कर दिया है. कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाने वाले कर्मचारी पे-रोल पर नहीं रहते. कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाने वाले कर्मचारी को कंपनी पीएफ और मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं नहीं देती. इसलिए नौकरी ज्वाइन करते वक्त पे-रोल को लेकर बातचीत कर लें.

जॉब छोड़ने से पहले कर लें विचार  

जॉब ज्वाइन करने के साथ ही छोड़ते वक्त भी बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए. किसी मामूली समस्या या किसी बात पर ऑफिस में असहज महसूस करने या फिर किसी छोटे-मोटे विवाद या बहस को लेकर नौकरी छोड़ने का निर्णय लेना गलत हो सकता है. इसलिए किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले खूब सोच-विचार कर लें.

समस्या को समझें 

कोई भी जॉब आसानी से नहीं मिलती है और ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि नौकरी छोड़ने का फैसला लेने से पहले हम असल वज़ह को पहचानें. यदि आपकी प्रोफेशनल लाइफ पसर्नल लाइफ में दखल देने लगे तो फिर जॉब छोड़ने का निर्णय आपका ठीक है. 

हालांकि आप जॉब छोड़ने का निर्णय लेते समय अपने करीबी साथियों और एम्पलॉयर से चर्चा करें. यदि उनके पास आपकी समस्या का समाधान हो तो उसे भी सुनें. यह भी जान लें कि जॉब छोड़ने के क्या परिणाम होंगे. नौकरी छोड़ने का अंतिम निर्णय लेते ही अपने ऑफिस के कंप्यूटर से पर्सनल डाटा हटा दें.

(नोट : यह लेख आपकी जागरूकता, सतर्कता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. अधिक जानकारी के लिए करियर काउंसिल से सलाह जरूर लें.)