Shakuntala Devi : मैथ की वंडरवुमन शकुंतला देवी की कहानी

गणित के नाम से बहुत सारे स्टूडेंट को स्कूल में डर लगता है. कई स्टूडेंट तो इससे दूर भागते हैं लेकिन हमारे देश की एक महिला है जिन्हें बचपन से ही जब वो स्कूल भी नहीं जाती थी तब से गणित से प्यार था और दुनिया उन्हें ‘मानव कम्प्युटर’ और ‘मानव कैल्कुलेटर’ के नाम से पुकारती थी. इस महिला का नाम ‘शकुंतला देवी’ था और इनके नाम पर बॉलीवुड में फिल्म (Shakuntala devi movie) बन रही है जिसमें शकुंतला देवी का किरदार विद्या बालन निभा रही हैं.

गणित के नाम से बहुत सारे स्टूडेंट को स्कूल में डर लगता है. कई स्टूडेंट तो इससे दूर भागते हैं लेकिन हमारे देश की एक महिला है जिन्हें बचपन से ही जब वो स्कूल भी नहीं जाती थी तब से गणित से प्यार था और दुनिया उन्हें ‘मानव कम्प्युटर’ और ‘मानव कैल्कुलेटर’ के नाम से पुकारती थी. इस महिला का नाम ‘शकुंतला देवी’ था और इनके नाम पर बॉलीवुड में फिल्म (Shakuntala devi movie) बन रही है जिसमें शकुंतला देवी का किरदार विद्या बालन निभा रही हैं.

शंकुंतला देवी कौन थी? (Shakuntala devi biography)

शकुंतला देवी (Shakuntala devi) को मैथ यानि गणित की वंडर वुमन कहा जाता है क्योंकि उनके सामने गणित का कितना भी कठिन सवाल क्यों न रख दो वो पलक झपकते ही उसका जवाब दे देती थी. शकुतला देवी का जन्म (Shakuntala devi birth) 4 नवंबर 1939 को बंगलुरु में हुआ था. उनके पिता (Shakuntala devi father) एक सर्कस के कलाकार थे. सबसे पहले उनके पिता को ही उनकी गणित की क्षमता का पता चला था.

शकुंतला देवी (Shakuntala devi) के बारे में कहा जाता है की वे जब तीन साल की थी तब वे अपने पिता के साथ ताश खेल रही थी. उस समय वे हर बार अपने पिता को हरा देती थी. उनके पिता ने जब उनसे पूछा तो उन्होने बताया की वे अपनी स्मरण शक्ति और ताश के पत्तों के क्रम के आधार पर उनको हारा देती है. वे जब ताश खेलती थी तब उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी लेकिन उनका परिचय गणित से हो चुका था.

शकुंतला देवी (Shakuntala devi) के पिता को जब उनकी बेटी की इस गणितीय क्षमता के बारे में पता चला तो उन्होने सर्कस छोड़ कर शकुंतला देवी पर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना शुरू कर दिया. इससे शकुंतला देवी को काफी लोकप्रियता मिली. शकुंतला देवी ने 6 साल की उम्र में मैसूर विश्वविद्यालय में एक बड़े कार्यक्रम में अपनी गणित क्षमता का प्रदर्शन किया. शकुंतला के पिता काफी गरीब थे इस कारण उन्हें अच्छे स्कूल में शिक्षा हासिल नहीं करा पाये लेकिन उनकी लोकप्रियता के चलते उन्हें शिक्षा हासिल करने का मौका भी मिला.

शकुंतला देवी की उपलब्धियां (Shakuntala devi achievement)

शकुंतला देवी गणित की जादूगर थी क्योंकि जिस समय वे मुश्किल सवालों के जवाब चुटकियों में बता देती थी उस समय दुनिया में कम्प्युटर और कैल्कुलेटर का इतना वर्चस्व नहीं था. उनके नाम पर गणित में कई उपलब्धियां हैं.

– 6 साल की उम्र में उन्होने मैसूर विश्वविद्यालय में अपनी योगयता का प्रदर्शन किया. इसके 2 साल बाद अन्नामलाई विश्वविद्यालय में उन्होने प्रदर्शन किया.

– 1977 में अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में उन्हें आमंत्रित किया गया था जहां उन्हें 201 का 23वां रूट बताने के लिए कहा गया था जो उन्होने सिर्फ 50 सेकंड में बता दिया था. उस समय उनका जवाब देखने के लिए कम्प्युटर में अलग से एक प्रोग्राम को तैयार करना पड़ा था.

– शकुंतला देवी एक बार बीबीसी रेडियो के प्रोग्राम में गई थी. इस प्रोग्राम में उनसे अंकगणित का एक जटिल सवाल पूछा गया था. उन्होने तुरंत इसका जवाब दिया. लेकिन जो आरजे का जवाब था वो गलत था और शकुंतला देवी का जवाब सही. इस घटना ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलाई थी.

– शकुंतला देवी से आप पिछली सदी की कोई सी भी तारीख और दिन को बता सकती थी. अगर आपने उनसे पूछा की 1850 में 2 फरवरी को कौन सा दिन था तो वे इस बताने में पल भर का भी समय नहीं लेती.

– 18 जून 1980 को शकुंतला देवी ने 13 अंकीय दो संख्याओं 7,686,369,774,870 तथा 2,465,099,745,779 का गुणा मानसिक रूप से करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. उन्होने सिर्फ 28 सेकंड में इसका सही उत्तर 18,947,668,177,995,426,462,773,730 दिया था.

– शकुंतला देवी केवल एक मिनट में बड़ी से बड़ी संख्या का घनमूल बता सकती थी.

– शकुंतला देवी इन सभी के साथ ज्योतिष शास्त्र की जानकार तथा एक अच्छी लेखक भी थी.

शकुंतला देवी की किताबें (Shakuntala devi books)

शकुंतला देवी गणित की जादूगर तो थी साथ ही वे एक अच्छी लेखिका भी थीं. उनकी लिखी प्रमुख किताबें हैं.

द जॉय ऑफ नंबर्स
एस्ट्रोलॉजी फॉर यू
परफेक्ट मर्डर
द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुयल

शकुंतला देवी का वैवाहिक जीवन (Shakuntala devi personal life)

शकुंतला देवी की शादी 1960 में कलकत्ता के एक बंगाली आईपीएस अधिकारी पारितोष बनर्जी के साथ हुई थी. इनकी शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली. किसी कारणवश 1979 में वे अपने पति से अलग हो गई तथा 1980 में ये अपनी बेटी के साथ बंगलुरु लौट आई. यहाँ आकार वो सेलिब्रिटीज और राजनीतिज्ञों को ज्योतिष परामर्श देती थी. अपनी ज़िंदगी के अंतिम दौर में वे बहुत कमजोर हो गई थीं. लंबी बीमारी के चलते 21 अप्रैल 2013 को बंगलुरु में उनका निधन हो गया.

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