सुषमा स्वराज : मुसीबत में फंसे लोगों के लिए ‘माँ’ थीं पहली महिला विदेश मंत्री ‘सुषमा’!

भारत में वैसे तो कई नेता हैं लेकिन इनमें से कुछ ही नेता ऐसे होते हैं जिनके नाम आपके ज़हन में होते हैं और आप उन्हें जिंदगी भर याद रखते है. 'सुषमा स्वराज' (sushma swaraj) भी एक ऐसा ही नाम है जो भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर के लोगों के ज़हन में है. सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर (sushma swaraj political career) काफी लंबा और शानदार है जिसके हर पहलू से कोई न कोई व्यक्ति जुड़ा है. 2014 में मोदी सरकार के आने पर सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री (ex foreign minister) बनाया गया था. विदेश मंत्री रहते हुए उन्होने विदेश में रह रहे भारतीय लोगों के लिए एक 'माँ' की भूमिका निभाई. उन पर मुसीबत पड़ने पर वे एक ढाल की तरह खड़ी रही. उनके कई सारे योगदान हैं जिन्हें भूलना नामुमकिन है.

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भारत में वैसे तो कई नेता हैं लेकिन इनमें से कुछ ही नेता ऐसे होते हैं जिनके नाम आपके ज़हन में होते हैं और आप उन्हें जिंदगी भर याद रखते है. ‘सुषमा स्वराज’ (sushma swaraj) भी एक ऐसा ही नाम है जो भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर के लोगों के ज़हन में है. सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर (sushma swaraj political career) काफी लंबा और शानदार है जिसके हर पहलू से कोई न कोई व्यक्ति जुड़ा है. 2014 में मोदी सरकार के आने पर सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री (ex foreign minister) बनाया गया था. विदेश मंत्री रहते हुए उन्होने विदेश में रह रहे भारतीय लोगों के लिए एक ‘माँ’ की भूमिका निभाई. उन पर मुसीबत पड़ने पर वे एक ढाल की तरह खड़ी रही. उनके कई सारे योगदान हैं जिन्हें भूलना नामुमकिन है.

सुषमा स्वराज का जन्म और शिक्षा

भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का जन्म (sushma swaraj birth place) 14 फरवरी 1952 को हरियाणा राज्य की अंबाला छावनी में हुआ था. उनके पिता (sushma swaraj father) हरदेव शर्मा आरएसएस के प्रमुख सदस्य थे. सुषमा स्वराज (sushma swaraj education) ने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया था. 1970 में उन्हें अपने कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था.

सुषमा स्वराज को तीन साल लगातार एसडी कॉलेज छावनी में एनसीसी की बेस्ट कैडेट और राज्य की बेस्ट वक्ता भी चुना गया. इसके बाद उन्होने पंजाब विश्वविधालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की और साल 1973 में उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला.

सुषमा स्वराज का करियर

साल 1973 में सुषमा स्वराज (sushma swaraj career) भारतीय सर्वोच्च न्यायलय में वकील के तौर पर काम किया. यहीं उनके सहकर्मी बने स्वराज कौशल जो खुद वहाँ पर एक वकील थे. आगे चलकर 13 जुलाई 1975 को स्वराज कौशल से सुषमा का विवाह हुआ और दोनों राजनीति की ओर अग्रसर हुए.

सुषमा स्वराज के पति

सुषमा स्वराज के पति (sushma swaraj husband) स्वराज कौशल (swaraj koushal) हैं. वे सर्वोच्च न्यायलय में एक वकील के पद पर थे. बाद में वे 6 साल के लिए राज्यसभा सांसद भी रहे. इसके अलावा वे मिज़ोरम के राज्यपाल भी रह चुके हैं. सुषमा स्वराज का राजनीति में आने में उनके पति स्वराज कौशल का काफी योगदान है.

सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर

सुषमा स्वराज के राजनीतिक सफर (sushma swaraj political career starting) की शुरुवात एबीवीपी यानि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई. 70 के दशक में ही वे एबीवीपी से जुड़ी थीं. उनके पति कौशल सोशलिस्ट नेता जॉर्ज फ़र्नान्डिस के करीबी थे इस वजह से साल 1975 में वे जॉर्ज फ़र्नान्डिस की कानूनी टीम का हिस्सा बन गई. इमरजेंसी के समय उन्होने जेपी नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ में हिस्सा लिया था.

सुषमा स्वराज बीजेपी में कैसे आईं?

इमरजेंसी के खत्म होने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी (sushma swaraj bjp party join) से जुड़ी और यहीं से मुख्य रूप से उनके राजनैतिक करियर की शुरुवात हुई. सुषमा स्वराज के राजनैतिक करियर के कुछ मुख्य उपलब्धियां निम्न हैं.

– साल 1977 में उन्होने हरियाणा विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा और जीता. 1977-79 तक वे चौधरी देवी लाल की सरकार में श्रम मंत्री रही और सबसे कम उम्र में (25 साल की उम्र में) केबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया. 1979 में 26 वे हरियाणा में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी.

– 1987 से 1990 तक वह फिर से अंबाला छावनी में विधायक रहीं और राज्य शिक्षा मंत्री (sushma swaraj education minister) बनीं.

– साल 1990 में उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में चुना गया. राज्यसभा सदस्य के रूप में वे 1996 तक रही.

– साल 1996 में दक्षिण दिल्ली से सांसद का चुनाव जीती और 13 दिन वाली वाजपेयी सरकार में प्रसारण मंत्री बनीं.

– साल 198 में वे फिर से दक्षिण दिल्ली से सांसद का चुनाव जीती और इस बार उन्होने दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली.

– 12 अक्टूबर 1998 को वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी. हालांकि वे इस पद पर ज्यादा समय तक नहीं रही. 3 दिसंबर 1998 को उन्होने विधानसभा सीट से इस्तीफ़ा दे दिया और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई.

– साल 1999 में उन्होने कर्नाटक के वेल्लारी से सोनिया गांधी के खिलाफ (sushma swaraj fight election against sonia gandhi) चुनाव लड़ा जिसमें वे हार गई. साल 2000 में वे वापस से उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सांसद के रूप में वापस लौट आईं.

– साल 2000 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभाजन के वक़्त उन्हें उत्तराखंड स्थानांतरित किया गया. उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर 2000 से जनवरी 2003 तक रही. 2003 में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया, और मई 2004 में राजग की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही.

– साल 2009 में उन्होने मध्य प्रदेश के विदिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ा और इसमें जीत हासिल की. इसके बाद वह लोकसभा में विपक्ष की नेता बन गई.

– 2014 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए और उन्होने विदिशा (sushma swaraj constituency) से चुनाव लड़ा. इस बार भी उन्हें जीत हासिल हुई और इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया. वे देश की पहली महिला विदेश मंत्री बनी.

विदेश मंत्री रहते हुए उन्होने कई ऐसे काम किए जिन्हें भूलना मुमकिन नहीं हैं. उन्होने विदेश में फसे कई लोगों की मदद बिना देर किए की. गीता नाम की एक महिला जो बोल नहीं सकती उसे उसके परिजनों से मिलने की कोशिश की. यूएन में पाकिस्तान को सभी देशों को सामने आतंकवाद को लेकर करारा जवाब दिया. 2018 में जब उन्होने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए यूएन में पाकिस्तान पर निशाना साधा तो विश्व भर के मीडिया की नजरे उन पर टिक गई.

सुषमा स्वराज ने स्वस्थ खराब होने के कारण साल 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. इस कारण वे मोदी सरकार 2.0 में मंत्री भी नहीं बनी. स्वस्थ खराब होने के कारण कार्डिएक अटैक की वजह से 6 अगस्त 2019 को उनका निधन हो गया. उनके परिवार में उनके पति स्वराज कौशल तथा उनकी (sushma swaraj daughter) पुत्री बांसुरी स्वराज (bansuri swaraj) है जो लंदन के इनर टेंपल में वकालत करती हैं.

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