समय पर नहीं भरा लोन तो जानिए क्या है आपके अधिकार?

अगर आप EMI भरने में विफल हो जाते हैं तो आपके द्वारा खरीदी गई चीज बैंक द्वारा जब्त की जा सकती है. ऐसे में समय पर लोन नहीं भरने पर (EMI Default Right) आपके क्या अधिकार हैं आप इस लेख में जान पाएंगे.

एक समय हुआ करता था जब लोग किसी चीज को खरीदने के लिए पैसे इकट्ठे करके उस चीज का दाम चुकाते थे लेकिन अब लोग Loan लेते हैं और कोई भी चीज खरीद लेते हैं. जैसे घर, वाहन, मोबाइल, कंप्यूटर आदि. लेकिन लोन पर किसी भी चीज को लेने पर आपको हर महीने Regular EMI भरनी होती है. अगर आप EMI भरने में विफल हो जाते हैं तो आपके द्वारा खरीदी गई चीज बैंक द्वारा जब्त की जा सकती है. ऐसे में समय पर लोन नहीं भरने पर (EMI Default Right) आपके क्या अधिकार हैं आप इस लेख में जान पाएंगे.

#1. नोटिस देना जरूरी

जब भी कोई व्यक्ति Loan EMI भरने में विफल होता है तो बैंक एकदम से संपत्ति को जब्त नहीं कर सकती और न ही उसे नीलाम कर सकती है. जब आप ईएमआई नहीं भरते हैं तो बैंक आपको पहले कॉल करती है और किश्त चुकाने के लिए कहती है. इसके बाद यदि आप 90 दिनों तक भुगतान नहीं करते हैं तो आपको डिफ़ाल्ट लोन भरना होगा और आप NPA हो जाते हैं. इसके बाद कस्टमर को बैंक की तरफ से एक नोटिस जारी किया जाता है जिसमें उसे पिछली सभी ईएमआई भरने के लिए कहा जाता है.

इसके बाद भी यदि कोई कस्टमर 5 महीने तक EMI नहीं भर पाता है तो फिर बैंक कोर्ट के जरिये नोटिस जारी करवाती है. कोर्ट द्वारा भेजा गया नोटिस एक लीगल नोटिस होता है जिसमें सेटलमेंट करने के लिए कहा जाता है. नोटिस में खा जाता है कि पहले आपकी संपत्ति का आंकलन किया जाएगा उसके बाद बैंक द्वारा उसे नीलाम कर दिया जाएगा. नीलामी को एक महीने के भीतर किया जाता है. अगर आप बैंक से पहले से बातचीत करते हैं तो हो सकता है वो आपको और समय दे लेकिन यदि आप लोन को भरने में कोई दिलचस्पी न दिखाये तो आपके पास आपकी संपत्ति गँवाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रहेगा.

#2. सही दाम पाने का अधिकार

आप किसी संपत्ति को खरीदने के लिए लोन लेते हैं और उसका लोन नहीं चुका पाते हैं तो बैंक उस संपत्ति की नीलामी करता है. लेकिन नीलामी करते वक़्त बैंक ऐसा नहीं कर सकता कि नीलामी की रकम संपत्ति की असल वैल्यू से कम कर दे. संपत्ति की बिक्री से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान संपत्ति का उचित मूल्य बताते हुए नोटिस जारी करती है. इसमें रिजर्व प्राइस, तारीख और नीलामी के समय का भी जिक्र होता है. अगर लोन लेने वाले को लगता है कि बैंक नीलामी में संपत्ति की रकम को कम रख रहा है तो लोन लेने वाला व्यक्ति नीलामी को चुनौती दे सकता है. इस मामले में लोन लेने वाले को संपत्ति को नीलाम करने के लिए एक नया खरीदार ढूँढने का हक है जो बैंक के जरिये उस संपत्ति को बिकवा सके.

#3. बकाया राशि पाने का अधिकार

जब आप लोन को चुकाना बीच में बंद करते हैं तो आप खरीदी गई संपत्ति का कुछ हिस्सा बैंक में पे कर चुके होते हैं. जैसे आपने कोई घर खरीदा तो 20 से 30 प्रतिशत तो आपने डाउनपेमेंट दे दिया, उसके बाद दो तीन साल तक किश्त भरी. ऐसे में आप काफी सारी रकम संपत्ति की चुका चुके हैं. अब जब भी नीलामी होगी तो आपको ये अधिकार है कि बैंक का सेटलमेंट हो जाने के बाद जो रकम बच रही है वो आपको मिले. आपको उस रकम को पाने का पूरा अधिकार है. वहीं अगर आपको ये लगता है कि बैंक उसे सही कीमत पर नीलाम नहीं कर रही है तो आप नीलामी को चुनौती दे सकते हैं.

#4. बैंक या एजेंट धमका नहीं सकते

कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान लोन की वसूली के लिए रिकवरी एजेंट की सेवाएँ लेते हैं. कई बार रिकवरी एजेंट लोन लेने वाले व्यक्ति के साथ बहुत बदतमीजी करते हैं. कभी भी उनके घर पहुँच जाते हैं, उन्हें सार्वजनिक रूप से बेज्जत करते हैं, उन्हें धमकाते हैं, बदसलूकी करते हैं. लेकिन उन्हें इस तरह की बदसलूकी करने का कोई अधिकार नहीं है. वे ग्राहक के घर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक जा सकते हैं और लोन वसूली कर सकते हैं. यदि कोई एजेंट आपके साथ दुर्व्यवहार करता है तो आप इसकी शिकायत बैंक में कर सकते हैं यदि बैंक आपकी बात को नहीं मानता है तो आप आगे बैंकिंग ओम्बड्समैन को इसकी शिकायत कर सकते हैं.

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