Bhanu Athaiya Birthday : देश के लिए पहला ऑस्कर जीतने वाली महिला, 100 + फिल्मों में किया था काम

भानु अथैया ने अपने करियर में कई अवार्ड जीते लेकिन उनमें से सबसे खास ऑस्कर अवार्ड रहा. इस अवार्ड के कारण उन्हें दुनियाभर में पहचान मिली.

ऑस्कर अवार्ड एक ऐसा अवार्ड है जिसे जीतना भारतीय सिनेमा जगत के लिए सपना है. पिछले कुछ सालों में बमुश्किल ही भारत ने ऑस्कर अवार्ड जीता है. लेकिन क्या आप ऐसी महिला के बारे में जानते हैं जिन्हें भारत की पहली ऑस्कर जीतने वाली महिला कहा जाता है. भानु अथैया (Bhanu Athaiya) भारत की वो महिला हैं जिनहोने सबसे पहले अपने टैलेंट के दम पर भारत को ऑस्कर अवार्ड दिलाया. ऑस्कर जीतने वाली भानु अथैया अब इस दुनिया में तो नहीं है लेकिन उनसे जुड़ी कुछ खास बातें हैं जो आपको जरूर जानना चाहिए.

भानु अथैया जीवनी (Bhanu Athaiya Biography) 

भानु अथैया का जन्म 28 अप्रैल 1929 (Bhanu Athaiya Birthday) को कोल्हापुर में हुआ था जो ब्रिटिश भारत के कोल्हापुर स्टेट में आता था. इनके परिवार में तीसरी संतान थी और इनके माता-पिता की कुल सात संतान थीं. इनके पिता अन्नासाहेब (Bhanu Athaiya Father)  एक सेल्फ मेड आर्टिस्ट और फोटोग्राफर थे. इनहोने फिल्म ‘बाबूराव पेंटर’ में भी काम किया था. जब भानु 11 साल की थीं तभी इनके पिता गुजर गए थे. तब माँ ने ही इनका लालन-पालन किया.

भानु अथैया शिक्षा (Bhanu Athaiya Education and college) 

उनकी स्कूली शिक्षा से संबन्धित जानकारी तो नहीं मिलती है लेकिन कॉलेज की पढ़ाई भानु ने मुंबई के सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से की थी. भानु अपने कॉलेज के दिनों में काफी ब्राइट स्टूडेंट हुआ करती थी. कॉलेज के दिनों में ही उन्होने Lady in Repose नाम का आर्टवर्क बनाया था जिसके लिए कॉलेज की तरफ से उन्हें गोल्ड मैडल दिया गया था.

भानु अथैया करियर (Bhanu Athaiya Career as an Artist) 

भानु ने अपने करियर की शुरुआत आर्टिस्ट के तौर पर मुंबई में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही कर दी थी. बाद में वे Progressive Artist Group की सदस्य बनी और और Exhibition में अपने आर्टवर्क को दिखाने लगीं. इसके बाद उन्होने पार्ट टाइम फैशन इलस्ट्रेटर के रूप में भी काम किया. भानु ने कुछ फैशन मैगजीन को अपने डिज़ाइन दिये जो उन्हें काफी पसंद आए. इसके बाद उनके लिए बॉलीवुड का रास्ता खुल गया.

बॉलीवुड में कैसे आईं भानु अथैया (Bollywood Debute of Bhanu Athaiya) 

साल 1956 में भानु अथैया को गुरु दत्त के कॉस्ट्यूम डिज़ाइन करने का मौका मिला. गुरुदत्त उस समय फिल्म सीआईडी के लिए काम कर रहे थे. इस फिल्म में किया गया काम गुरुदत्त को बेहद पसंद आया और उन्हें फिल्म ‘प्यासा’ के लिए भी कॉस्ट्यूम डिज़ाइन करने का काम दिया गया. इसके बाद भानु के लिए बॉलीवुड में करियर बनाने के रास्ते खुल गए और उन्हें एक के बाद एक फिल्में मिलने लगी.

भानु अथैया ने कैसे जीता ऑस्कर अवार्ड? (Bhanu Athaiya and Oscar Story) 

भानु अथैया को अपने करियर में फिल्में मिलती जा रही थी तभी साल 1983 के आसपास उन्हें एक इंडो ब्रिटिश फिल्म में कॉस्ट्यूम डिज़ाइन करने का काम मिला. ये फिल्म भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर बनाई गई थी और इस फिल्म में भानु को महात्मा गांधी का कॉस्ट्यूम डिज़ाइन करना था. भानु अथैया ने अपना काम बखूबी किया और फिल्म पूरी होने के बाद इस फिल्म ने बेस्ट कॉस्ट्यूम का अवार्ड जीता. इस तरह बेस्ट कॉस्ट्यूम के लिए भानु अथैया को ऑस्कर अवार्ड मिला. और इस तरह भानु अथैया देश की पहली ऑस्कर जीतने वाली महिला बन गई.

100 से भी ज्यादा फिल्मों में किया काम (Bhanu Athaiya Filmography) 

भानु अथैया के नाम पर 110 से भी ज्यादा फिल्में हैं. भारतीय फिल्म जगत में उनका महत्वपूर्ण योगदान है. उनकी प्रमुख फिल्में स्वदेश, लगान, 1942 लव स्टोरी, अजूबा, अग्निपथ, चाँदनी, हीरो हीरालाल, सल्तनत, रज़िया सुल्तान, राम तेरी गंगा मैली, पुकार, प्रेम रोग, रॉकी, द बर्निंग ट्रेन, कर्ज, मीरा, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, जानी दुश्मन, सत्यम शिवम सुंदरम, शालीमार, गंगा की सौगंध, हेराफेरी, नागिन, चोर मचाए शोर, बिदाइ, अनामिका, कीमत, रास्ते का पत्थर, अपना देश, मेरे जीवन साथी, मेरा नाम जोकर, पत्थर के सनम, आम्रपाली आदि हैं.

भानु अथैया ने अपने करियर में कई अवार्ड जीते लेकिन उनमें से सबसे खास ऑस्कर अवार्ड रहा. इस अवार्ड के कारण उन्हें दुनियाभर में पहचान मिली. साल 2012 में भानु ने ऑस्कर अवार्ड को फिर से एकेडमी को लौटा देने की बात कही. उनका कहना था कि उन्हें लगता है कि वे उस ट्रॉफी का ध्यान नहीं रख पाएँगी. ये एकेडमी के ऑफिस में सुरक्षित रहेगी और लोग इसे देख पाएंगे. साल 2015 में उन्होने इसे वापस कर दिया था.

अपने जीवन के अंतिम दिनों में भानु अथैया के दिमाग में ट्यूमर हो गया था. इस वजह से उन्हें लकवा हो गया था. उनका एक ओर का शरीर काम नहीं कर रहा था. अंत में अक्टूबर 2020 में 91 वर्ष की उम्र में उनका देहांत हो गया.

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