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समाज और संस्‍कृति

वृक्षों के कारण है पृथ्वी पर जीवन, भारत में कैसे बचेंगे पेड़?

हाल ही में दिल्ली में इमारतें बनाने के लिए कुछ इलाकों में 17,000 बड़े-बड़े पेड़ों को काटा जाना था. जबकि इस फैसले पर माननीय दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाकर बड़ा अहम फैसला लिया. क्या आप जानते हैं पेड़, हर साल 53 टन कार्बन डाईऑक्साइड और 200 कि.ग्रा.…

टेस्ट ट्यूब बेबी के 40 साल: क्या है IVF और कैसे हुई शुरू Test Tube baby तकनीक

लुईस ब्राउन वह पहली बच्ची थी जिसका जन्म टेस्ट ट्य़ूब बेबी नाम से लोकप्रिय टेक्नॉलॉजी के ज़रिए हुआ था. आज वह 40 वर्ष की है और उसके अपने बच्चे हैं. इन 40 वर्षों में दुनिया भर में 60 लाख से अधिक ‘टेस्ट ट्यूब बच्चे’पैदा हो चुके हैं और कहा जा रहा…

15 अगस्त 2018: कहां गया जन का भारत?

जिस आजादी और संप्रभुता को पाने के लिये जन ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया हो, वही जन आज आजादी के 72वे बरस में उसके जश्न को दूर खड़ा निहार रहा है. सोच रहा है आजादी तो अमीरों के बस की बात है. उसकी हैसियत ही कहां है? आजादी के लिये शामिल होने…

लड़कियों को चुननी होगी संघर्ष की अलग राह

बदलाव के बाद भी समाज में सफल लड़कियों और महिलाओं की संख्या गिनी-चुनी है. अन्य महिलाएं इनके जैसा बनना या करना चाहती है, किन्तु बन नहीं पाती क्योंकि राह संघर्षपूर्ण है. संघर्ष के लिए जिजीविषा चाहिए, दृढ़ इच्छा शक्ति, अदम्य साहस व हौंसला…

घर से बाहर कितनी सुरक्षित हैं वर्किंग वुुमन और लड़कियां?

जॉब और करियर की तलाश में लड़कियां जहां अकेले रहने को मजबूर हुई है वहीं घरों में काम करने वाली महिलाओं संख्या भी बढ़ी है. लेकिन इस संख्या के बढ़ने के साथ लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले भी बढ़ रहे हैं. घर की …

कहानी साड़ी की: फैशन बिगड़कर बदल गए लेकिन नहीं बदला भारतीय परिधान..!

भारत में परिधान के रूप में साड़ियों का प्रचलन कितना पुराना है इसके बारे में कोई भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं है. लेकिन हजारों फैशन बदलने के बाद आज भी साड़ियां ज्यों की त्यों बनी हुई है. करोड़ों महिलाएं आज भी साड़ी पहनती हैं और इसमें कोई दो राय…

क्यों हो रहा समाज का नैतिक पतन? कैसी है नई पीढ़ी?

नैतिक मूल्यों का अचानक गिरना 20वीं शताब्दी से ही शुरू हुआ? आपके जमाने से या आपके किसी बुजुर्ग रिश्तेदार या दोस्त के जमाने से? बल्कि यह कृत्य होना तो एक सदी पहले ही हो चुका था. सन् 1914 में जब पहला विश्वयुद्ध हुआ, तब से नैतिक मूल्यों का…

भारतीय संस्कृति में क्यों आस्था के केंद्र हैं मंदिर

तीर्थ स्थलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को जानना जरूरी है. देश की एकता, अखंडता और समृद्धि में तीर्थस्थलों की सकारात्मक भूमिका रही है. देश की सभ्यता एवं संस्कृति का संरक्षण तीर्थ स्थल करते आए हैं. यही वजह है कि विदेशी आक्रमणकारियों ने सर्वप्रथम…

Right to Education Act ने कितनी बदली भारत में शिक्षा?

9 साल पहले यानी 4 अगस्त 2009 को शिक्षा के अधिकार कानून यानी की राइट टू एजुकेशन एक्ट संसद में पास हुआ. यह बीते दशकों में इंडिया की बड़ी उपलब्धि थी. लेकिन खामियों और इसके क्रियान्वयन में सरकारों की उदासीनता से इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले…

थाली में खाना मत छोड़िए, दुनिया भूखी है और हिंदुस्तान कुपोषण पर शर्मिंदा..!

विश्व की 47 प्रतिशत आबादी केवल भारत, चीन, अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया में बसती है. सवाल यह है कि टेक्नॉलॉजी के बूते पूरी दुनिया में चल रही विकास की बयार में आज भी विश्व में महिलाओं, बूढ़ों बच्चों की ऐसी दुनिया है जो भूखी है, कुपोषण का…
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