ज्योतिष में चन्द्र ग्रह का महत्व और कुंडली के 12 भावों में चन्द्र का महत्व

चंद्रमा भले ही वैज्ञानिक दृष्टि से एक उपग्रह हो लेकिन ज्योतिषी इसे ग्रह मानते हैं और इसे स्त्री ग्रह कहा जाता है. चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. इसकी वजह से हमारा मन स्थिर और चंचल होता है.

भविष्य में झाँकने के लिए हर व्यक्ति कभी न कभी अपनी कुंडली को किसी अच्छे ज्योतिषी को दिखवा ही देता है. ज्योतिषी भी ग्रहों की चाल देखकर बता देते हैं की आपकी लाइफ में क्या अच्छा और बुरा हो सकता है. ज्योतिष के अनुसार 9 ग्रह होते हैं और चंद्रमा उनमें से एक है. खगोलीय दृष्टि से चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है जो पृथ्वी के चक्कर लगता है. लेकिन ज्योतिष में इसका अपना अलग महत्व है.

चन्द्र ग्रह

चंद्रमा भले ही वैज्ञानिक दृष्टि से एक उपग्रह हो लेकिन ज्योतिषी इसे ग्रह मानते हैं और इसे स्त्री ग्रह कहा जाता है. चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. इसकी वजह से हमारा मन स्थिर और चंचल होता है. लेकिन खगोलीय दृष्टि से चंद्रमा समुद्र में ज्वार लाने से लेकर ग्रहण लगाने तक में योगदान देता है. आसमान में हमें सूर्य और चंद्रमा आकार में समान ही नजर आते हैं.

चन्द्र का महत्व

चंद्रमा एक मनुष्य के मन, मस्तिष्क, मनोबल आदि का कारक होता है. ज्योतिष के अनुसार इसकी स्वामी राशि कर्क है. गति की बात की जाए तो सभी ग्रहों में तेज गति चंद्रमा की होती है. ये अपने भाव बहुत जल्दी-जल्दी बतलता है. ये लगभग सवा दो दिनों में ही अपना गोचर एक राशि से दूसरी राशि में कर लेता है. राशिफल को ज्ञात करने के लिए ज्योतिषी चन्द्र राशि से ही गणना करते हैं.

चन्द्र का प्रभाव

चंद्रमा यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न भाव में बैठा होता है तो वह व्यक्ति सुंदर और आकर्षक होता है. इसके अलावा वह साहसी और धैर्यवान होता है. जातक का स्वभाव शांत होता है. वह अपने सिद्धांतों को अधिक महत्व देता है. सिद्धांतवादी होने के साथ-साथ वह सामाजिक भी होता है. ये मानसिक रूप से सुखी होते हैं. माता के साथ संबंध अच्छे रहते हैं. जब चंद्रमा कमजोर होता है तो इन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है.

कुंडली के 12 भावों में चन्द्र का फल

कुंडली के पहले भाव में चन्द्र का फल : पहले भाव में बैठा चन्द्र आपको ऐश्वर्य से परिपूर्ण बनाता है. आप अपना खुद का व्यावसाय स्थापित करते हैं. आपका शरीर थोड़ा स्थूल होता है. आपकी रुचि गायन में अधिक होती है.

कुंडली के दूसरे भाव में चन्द्र का फल : दूसरे भाव में बैठे चन्द्र के कारण आपको अपने घर से दूर विदेश में रहना पड़ सकता है. आपकी भाषा मधुर होती है. आप सुंदर, सहनशील और शांतिप्रिय होते हैं.

कुंडली के तीसरे भाव में चन्द्र का फल : कुंडली के तीसरे भाव में बैठे चन्द्र के कारण आप अपने पराक्रम के धन कमा सकते हैं. आप धार्मिक, यशस्वी और आस्तिक बनते हैं.

कुंडली के चौथे भाव में चन्द्र का फल : चौथे भाव में बैठा चन्द्र आपको दानी, सुखी और उदार बनाता है. इन्हें बहुत ही गुणी पत्नी मिलती है. ये शेयर मार्केट से आसानी से पैसा कमा पाते हैं. ये क्षमा करने में अव्वल होते हैं.

कुंडली के पांचवे भाव में चन्द्र का फल : पांचवे भाव में बैठा चन्द्र का असर आपकी बुद्धि पर पड़ता है. जातक का स्वभाव चंचल होता है. वे सदाचारी, क्षमावान और शौकीन होते हैं.

कुंडली के छठे भाव में चन्द्र का फल : छठे भाव में बैठे चंद्रमा के कारण जातक किसी न किसी रोग से घिरे रहते हैं. इनकी आयु कम होती है और इन्हें धन को खर्च करने में खूब मजा आता है.

कुंडली के सातवे भाव में चन्द्र का फल : यहाँ बैठा चन्द्र आपको सभ्य और धैर्यवान बनाता है. इसके कारण आप अच्छे नेता, वकील, व्यापारी और विचारक बन सकते हैं. इन्हें अपने गुणों के कारण खुद पर अभिमान रहता है.

कुंडली के आठवे भाव में चन्द्र का फल : आठवे भाव में चन्द्र के रहने से जातक को व्यापार में खूब लाभ मिलता है. ये ईर्ष्यालु प्रवृति के होते हैं. इन्हें कोई न कोई विकार रहता है.

कुंडली के नौवे भाव में चन्द्र का फल : ये जातक को धर्म का पालन करने वाला, कार्यशील और न्यायप्रिय बनाता है. नौवे भाव में बैठा चंद्रमा जातक को विद्वान और साहसी बनाता है. ये जातक धनवान भी होते हैं.

कुंडली के दसवे भाव में चन्द्र का फल : दसवे भाव में बैठे चन्द्र के कारण व्यक्ति अपने कार्य में कुशल होता है. वह बुद्धिमान और दयालु होता है. समाज में उसकी प्रतिष्ठा होती है. वह दूसरों के हित के बारे में सोचने वाला व्यक्ति होता है.

कुंडली के ग्यारहवे भाव में चन्द्र का फल : व्यक्ति गुणवान होता है. संपत्ति से युक्त होता है. उसे दीर्घायु प्राप्त होती है और वह राज कार्यों में दक्ष होता है.

कुंडली के बारहवे भाव में चन्द्र का फल : इस भाव में चन्द्र होने के कारण आपको नेत्र व कफ रोग हो सकते हैं. इस भाव का चंद्रमा आपको क्रोधी, एकांतप्रिय, मृदुभाषी और चिंताशील बनाता है.

चन्द्र के उपाय

– नित्य शिवलिंग पर दूध और सफ़ेद पुष्प चढ़ाएं.
– सोमवार को सुंदरकाण्ड करें.
– चावल, चाँदी, दूध का दान करें.
– बुजुर्ग महिला या माता की सेवा करें.
– शिव चालीसा का नियमित पाठ करें.

यंत्र – चन्द्र यंत्र
मंत्र – ओम भास्काराय नमः
रत्न – माणिक्य
रंग – पीला/ केसरिया
जड़ – बेल मूल

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