Chardham Yatra : चारधाम कौन से हैं, चारधाम यात्रा का क्या महत्व है?

हिन्दू धर्म का हर व्यक्ति अपने जीवन में चारधाम की यात्रा (Chardham Yatra) पर जाता है. इस चार धाम यात्रा को एक धार्मिक यात्रा माना गया है. वैसे तो चार धाम द्वारका, बद्रीनाथ, रामेश्वरम और पुरी को माना जाता है लेकिन हिन्दू धर्म के अनुयायी उत्तराखंड में बसे हुए चार तीर्थ स्थानों के दर्शनों के लिए जाते हैं.

हिन्दू धर्म का हर व्यक्ति अपने जीवन में चारधाम की यात्रा (Chardham Yatra) पर जाता है. इस चार धाम यात्रा को एक धार्मिक यात्रा माना गया है. वैसे तो चार धाम द्वारका, बद्रीनाथ, रामेश्वरम और पुरी को माना जाता है लेकिन हिन्दू धर्म के अनुयायी उत्तराखंड में बसे हुए चार तीर्थ स्थानों के दर्शनों के लिए जाते हैं.

चारधाम कौन से हैं. (Which place are chardham?)

चारधाम दो प्रकार के हैं. मुख्य चार धाम द्वारका, बद्रीनाथ, पुरी तथा रामेश्वरम है. लेकिन भारत में लोग उत्तराखंड के चार तीर्थ यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को मानते हैं. इनके अलावा भी उत्तराखंड में कई धार्मिक स्थल हैं जिनके दर्शन करते हुए श्रद्धालु इन सभी तीर्थों के दर्शन करते हैं.

चारधाम यात्रा का महत्व (Importance of Chardham)

चारधाम यात्रा 8 से 9 वी शताब्दी में आदिगुरु शंकरचार्य द्वारा बद्रीनाथ की खोज से बताई जाती है. बद्रीनाथ की खोज के साथ ही आदिगुरु शंकराचार्य ने बद्रीनाथ के आसपास के तीर्थ स्थलों का खूब प्रचार-प्रसार किया जिसके बाद से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आने लगे. हिन्दू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है. इसे बहुत ही पवित्र तथा मोक्ष प्रदान करने वाली यात्रा बताया है. ऐसा माना जाता है की जो हिन्दू इन चारधाम की यात्रा कर लेता है वो जीवन-मृत्यु के बंधन से छूट जाता है और अंत में मुक्ति की प्राप्त होता है.

चारधाम के पवित्र चार स्थल (Four holy place of Chardham)

चारधाम के पवित्र चार स्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री है.

बद्रीनाथ : भगवान विष्णु का पवित्र स्थल है. यहां भगवान विष्णु ने नर-नारायण के रूप में तपस्या की थी.

केदारनाथ : ये भगवान शिव का पवित्र स्थल है. ये पाँच केदारों में से एक है.

गंगोत्री : गंगा का उद्गम स्थल है.

यमुनोत्री : यमुना का उद्गम स्थल है.

चारधाम यात्रा पर कब जाएं? (When go for chardham yatra?)

भारत में उत्तराखंड एक ठंडा प्रदेश हैं जहां पर कई जगहों पर बर्फबारी देखने को मिलती है. इस कारण से यहां सालभर जाना मुमुकिन नहीं है. चारधाम यात्रा पर जाने का सही समय मई-जून तथा सितंबर-अक्टूबर है. इस समय ही ज्यादा यात्री यहां आते हैं. बरसात और ठंड के मौसम में यहां न आए.

चारधाम यात्रा पर कैसे जाएं? (How to go on chardham yatra?)

चारधाम यात्रा पर जाने के लिए आपके पास सबसे सही रास्ता है किसी अच्छे टूर-ट्रेवल्स वाले से चारधाम यात्रा का पैकेज ले लें जिसमें आपकी यात्रा और रहने का खर्च हो. कई बार जब आप वहाँ जाते हैं तो आपको रहने की दिक्कत आ जाती है, आपको वहाँ रहने के लिए कमरा नहीं मिल पाता है. ऐसे में यदि आप पहले से बुकिंग करके जाएंगे तो आपको आसानी होगी.
चारधाम यात्रा का मार्ग पहाड़ियों से होकर जाता है. इसमें गंगोत्री और बद्रीनाथ धाम सड़क से सीधे जुड़े हुए हैं आपको यहां कोई चढ़ाई नहीं करनी है लेकिन केदारनाथ में आपको सड़क मार्ग के अलावा 18 किमी पैदल चलना होता है वहीं यमुनोत्री धाम के लिए आपको 6 किमी पैदल चलना होता है. केदारनाथ में चड़ाई के लिए काफी साधन है आपके पास उसके लिए बजट होना चाहिए.

चारधाम यात्रा पंजीकरण (Chardham yatra online registration)

चारधाम यात्रा पर जाने के लिए आपको पंजीकरण करवाने की आवश्यकता होती है. इसके लिए यात्रा पर जाने से पहले अपने साथ अपने पहचान पत्र तथा कुछ पासपोर्ट साइज़ फोटो ले जाना न भूले. आपका पंजीकरण यात्रा शुरू होने से पहले तीर्थ स्थान पर ही हो जाता है और आपको वहां पर पास दे दिया जाता है. अगर आप चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं तो इस लिंक (http://onlinechardhamyatra.in/) पर क्लिक करके करवा सकते हैं.

चारधाम यात्रा कहाँ से शुरू करें? (Starting point of chardham yatra?)

चारधाम यात्रा शुरू करने के लिए आपको उत्तराखंड आना पड़ेगा. यदि आपके निकट दिल्ली शहर है तो वहां से आप पहले हरिद्वार आयें, इसके बाद बड़कोट होते हुए यमुनोत्री आयें, इसके बाद उत्तरकाशी होते हुए गंगोत्री आएं, इसके बाद गुप्तकाशी होते हुए केदारनाथ के दर्शन करें, इसके बाद बद्रीनाथ के दर्शन करें और फिर ऋषिकेश होते हुए दिल्ली से वापसी करें. चारधाम की यात्रा हरिद्वार से ऋषिकेश तक कुल 1607 किमी है.

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