नई दवा का लाइसेन्स कैसे मिलता है, Medicine license का प्रोसेस

हर देश में किसी दवाई को मार्केट में लाने से पहले उसे अच्छी तरह जांच-परख कर, क्लीनिकल ट्रायल करने के बाद लाइसेन्स दिया जाता है. कोई भी दवाई लाइसेन्स मिलने के बाद ही मार्केट में बिकना शुरू होती है.

कोरोना (Covid-19) महामारी के चलते हर व्यक्ति यही चाहता है की जल्द से जल्द कोई ऐसी दवाई आ जाए जिसे खाते या पीते ही कोरोना दूर भाग जाए. ऐसा कब होगा ये तो भविष्य में ही पता चलेगा लेकिन क्या आप जानते हैं की भारत में नई दवाई कैसे लाई जाती है? (How to launch new medicine in india?) नई दवाई का लाइसेन्स कैसे मिलता है? (New drug license) नई दवाई लॉंच करने के क्या नियम हैं? (New medicine rule) 

नई दवाई का लाइसेन्स कैसे मिलता है? (How to get new drug license?) 

दुनियाभर में कई सारी दवाइयां बिक रही हैं. दवाई का सीधा संबंध स्वास्थ्य से होता है. अगर कोई गलत दवाई खा ली तो जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है. इसलिए हर देश में किसी दवाई को मार्केट में लाने से पहले उसे अच्छी तरह जांच-परख कर, क्लीनिकल ट्रायल करने के बाद लाइसेन्स दिया जाता है. कोई भी दवाई लाइसेन्स मिलने के बाद ही मार्केट में बिकना शुरू होती है.

दवा का लाइसेन्स मिलने में कितना वक़्त लगता है? (Drug license approval duration) 

सामान्य परिस्थितियों में किसी दवा को विकसित करने और उसका क्लीनिकल ट्रायल करने में कम से कम तीन साल का वक़्त लग जाता है लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों में थोड़ी ढील मिल जाती है और थोड़ा जल्द लाइसेन्स मिल जाता है. आपातकालीन परिस्थितियों में भी दवा का लाइसेन्स मिलने में कम से कम दस महीने का समय लग जाता है.

नई दवा का लाइसेन्स लेने का प्रोसेस (New drug license process) 

भारत में नई दवा लाने के लिए औषधि एवं प्रसाधन सामाग्री अधिनियम 1940 एवं नियम 1945 के अनुसार लाइसेन्स लिया जाता है. इसके अंतर्गत केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) दवाओं के अनुमोदन, परीक्षण का संचालन, दवाओं के मानक तैयार करने के लिए उत्तरदाई है.

भारत में किसी भी नई दवा का लाइसेन्स लेने के लिए इनवेस्टिगेशनल न्यू ड्रग एप्लिकेशन को CDSCO के मुख्यालय में जमा करना होता है. इसके बाद न्यू ड्रग डिवीजन इसका परीक्षण करता है. इसके बाद आईएनडी कमेटी इसका गहन अध्ययन तथा समीक्षा करती है.

यहां से समीक्षा हो जाने पर इस दवा को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पास भेजा जाता है. अगर DCGI इसे अप्रूव कर देता है तो इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा जाता है. क्लिनिकल ट्रायल पूरा हो जाने के बाद CDSCO के पास दोबारा एक आवेदन करना होता है. ये आवेदन New Drug Registration के लिए होता है.

New Drug Registration करने के बाद DCGI एक बार फिर इसे रिव्यू करता है. अगर ये दवाई सभी मानकों पर खरी उतरती है तो DCGI इसके लिए लाइसेन्स जारी कर देता है. अगर ये सभी मानकों पर खरी नहीं उतरती है तो DCGI इसे रद्द कर देता है. किसी भी संस्थान या व्यक्ति को नई दवा के लिए लाइसेन्स चाहिए तो उसे औषधि प्रसाधन सामाग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945 के सभी मानकों पर खरा उतरना होगा.

इसमें इस बात को भी समझना जरूरी है कि नई दवा दो तरह से हो सकती है. पहली तो वो जिसमें नया फॉर्मूला हो और नया कम्पाउण्ड हो. यानी जो दवाई पहले न आई हो. और दूसरी वो दवाई जिसमें कम्पाउण्ड पुराना ही हो और उसमें कुछ बदलाव किया गया हो तो ऐसी सभी नई दवाई के लिए लाइसेन्स लेने का एक ही प्रोसैस है.

आयुर्वेदिक दवाई का लाइसेन्स कैसे मिलता है? (How to get ayurvedic medicine license?)  

आयुर्वेदिक दवाई में लाइसेन्स मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती है लेकिन इसके लिए दवाई आयुर्वेद की किसी प्रतिष्ठित किताब के अनुरूप तैयार की जानी चाहिए. यानि जो प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक किताबों में बताई गई विधि है उसी के अनुसार किसी दवाई को तैयार किया गया हो तो लाइसेन्स जल्दी मिल जाता है.

इसमें आयुर्वेदिक औषधियों की मात्रा वही होनी चाहिए जो किताब में वर्णित हो. अगर कोई व्यक्ति मात्रा में हेरफेर करके उसे किसी और रूप में प्रस्तुत कर रहा है तो उसे इसका रेफरेंस देना होगा और इसके अप्रूवल में कुछ ज्यादा वक़्त लग सकता है.

राज्य सरकार से दवा का लाइसेन्स (State government new drug license?) 

DCGI से लाइसेन्स लेने के अलावा दवाई बनाने वाली संस्था को उस राज्य के स्टेट ड्रग कंट्रोलर से भी लाइसेन्स लेना होता है जहां वो कंपनी उस दवाई को बनाना चाह रही है. दवाई का लाइसेन्स लेने के बाद भी यदि कोई संस्था औषधि मानकों के साथ छेड़छाड़ करती है तो भी लाइसेन्स रद्द हो सकता है.

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