कोर्ट मार्शल क्या होता है, कोर्ट मार्शल में क्या सजा मिलती है?

कोर्ट मार्शल का मतलब (meaning of court martial) होता है कि यदि कोई सैनिक या आर्मी का कर्मचारी अनुशासन तोड़ रहा है या सेना के खिलाफ जाकर कोई कार्य कर रहा है तो उसके सीनियर उनकी जांच करें और उसके खिलाफ जरूरी कार्यवाही करे. कोर्ट मार्शल एक तरह की न्यायिक प्रक्रिया है जिसके तहत गलती करने पर सजा दी जाती है.

भारतीय सेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना है. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का स्थान आता है. भारतीय सेना की पावर क्या है ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन जब कभी आप भारतीय सेना से जुड़ी कोई फिल्म या सीरियल देखते हैं तो उसमें कोर्ट मार्शल (Court martial in India) शब्द का जिक्र होता है. कोर्ट मार्शल क्या होता है? कोर्ट मार्शल में क्या सजा मिलती है? इसकी जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी.

कोर्ट मार्शल क्या होता है? (Court Martial in Hindi)

भारतीय सेना में बहादुरी के साथ-साथ अनुशासन की जरूरत होती है. जो व्यक्ति अनुशासन को तोड़ता है उसे सजा मिलती है. सजा कितनी गंभीर होगी ये उसके द्वारा किए गए अपराध पर निर्भर करता है. कोर्ट मार्शल का मतलब (meaning of court martial) होता है कि यदि कोई सैनिक या आर्मी का कर्मचारी अनुशासन तोड़ रहा है या सेना के खिलाफ जाकर कोई कार्य कर रहा है तो उसके सीनियर उनकी जांच करें और उसके खिलाफ जरूरी कार्यवाही करे. कोर्ट मार्शल एक तरह की न्यायिक प्रक्रिया है जिसके तहत गलती करने पर सजा दी जाती है.

कोर्ट मार्शल ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसी भारतीय न्यायपालिका में है. जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई केस रजिस्टर होता है तो कोर्ट में उसे दोषी या निर्दोष साबित करने के लिए बहस चलती है. इसे ट्रायल भी कहते हैं. ठीक उसी तरह कोर्ट मार्शल भी होता है जिसमें अनुशासन तोड़ने वाले व्यक्ति पर केस चलाया जाता है. ये एक तरह का आर्मी कोर्ट होता है जिसमें गलती करने वाले पर फैसला सुनाया जाता है और उसे सजा दी जाती है.

कोर्ट मार्शल कब किया जाता है? (Condition of Court martial)

कोर्ट मार्शल तब किया जाता है जब व्यक्ति सेवा में हो और उसने सेना के नियमों को तोड़ा हो. इसमें 70 तरह के अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है. नियमों के मुताबिक दुष्कर्म, हत्या, तथा गैर इरादतन हत्या के मामले में कोर्ट मार्शल नहीं किया जा सकता. ऐसे मामलों को सिविल पुलिस को सौंप दिया जाता है. लेकिन आर्मी भी अपने स्तर पर इसकी जांच कर सकती है.

कोर्ट मार्शल के प्रकार (types of court martial)

कोर्ट मार्शल 4 तरह के होते हैं. इन्हें तीनों सेनाओं में विभिन्न क़ानूनों के तहत उपयोग किया जाता है.

जनरल कोर्ट मार्शल

इसमें जवान से लेकर अफसर तक सभी जो दंडित करने का अधिकार होता है. इसमें 5 से 7 जज का पैनल होता है जो दोषी को सैन्य सेवा से बर्खास्त, आजीवन प्रतिबंध या फांसी की सजा तक दे सकता है. यदि कोई आर्मीमैन युद्ध के दौरान अपनी पोस्ट छोड़कर भाग आता है तो उसे फांसी की सजा देने का प्रावधान भी इसी के तहत है.

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल

इसमें 2 से 3 मेंबर मिलकर सुनवाई करते हैं. इसमें अधिकतम सजा 2 साल होती है. ये कोर्ट सिपाही से JCO लेवल के सेना कर्मचारी के लिए होती है.

समरी जनरल कोर्ट मार्शल

ये जम्मू कश्मीर जैसे प्रमुख इलाकों में अपराध करने वाले सैन्य कर्मचारियों के लिए होती है. इस कोर्ट का निर्णय काफी तेजी से आता है.

समरी कोर्ट मार्शल

इसमें सबसे निचले तरह की सैन्य अदालत में केस चलता है. इसमें सिपाही से लेकर NCO तक के पद वाले कर्मचारियों का केस सुना जाता है. इसमें भी अधिकतम 2 साल तक की सजा देने का प्रावधान है.

कोर्ट मार्शल की क्या प्रक्रिया है? (Process of court martial)

जांच अदालत का गठन

सेना में किसी तरह का अपराध या अनुशासनहीनता होने पर सबसे पहले Court of enquiry के आदेश जारी होते हैं. आरोप सही साबित होने पर तुरंत सजा दी जाती है.
मामला गंभीर है तो समरी ऑफ एविडेंस को भेज दिया जाता है.

समरी ऑफ एविडेंस

प्रारम्भिक जांच में दोष सिद्ध हो जाने पर सक्षम अधिकारी सबूत जुटाने के लिए जांच करता है. सबूत मिल जाने पर आरोपी को तुरंत सजा देने का प्रावधान है.

कोर्ट मार्शल

कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होते ही आरोपी सैन्य अफसर या कार्मिक को आरोपी प्रति देकर उसे अपना वकील नियुक्त करने का अधिकार दिया जाता है.

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल में सुनाई गई सजा को लेकर आप सेशन कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं.
वहीं कोर्ट मार्शल में सुनाये गए फैसले को आप Armed force tribunal में चुनौती दे सकते हैं. सबसे अंत में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जा सकती है.

कोर्ट मार्शल में सजा (Punishment in court martial)

कोर्ट मार्शल में सजा अपराध के आधार पर दी जाती है.
– इसें आरोपी की नौकरी छीनी जा सकती है तथा भविष्य में मिलने वाले सभी तरह के लाभ पर रोक लगाई जा सकती है.
– कुछ महीनों के लिए नौकरी से निकाला जा सकता है.
– प्रमोशन रोका जा सकता है.
– रैंक कम की जा सकती है.
– अपराध की गंभीरता के आधार पर फांसी, उम्रक़ैद तक हो सकती है.

कोर्ट मार्शल का मतलब सेना की न्यायिक गतिविधि से है जहां पर किसी अफसर पर न्यायिक कार्यवाही की जाती है. मतलब यदि उसने सेना के नियमों को तोड़ा है तो उसे सजा सुनाने का काम कोर्ट मार्शल के तहत किया जाएगा.

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