World Diabetes Day : डाइबिटीज के लक्षण और घरेलू उपाय, मधुमेह में क्या खाएं क्या न खाएं?

जिस तरह तेजी से जमाना बदल रहा है ठीक उसी तरह तेजी से हमारी लाइफस्टाइल भी बदल रही है. इस बदलती लाइफ स्टाइल से हमें कुछ हद तक मेहनती कामों से आराम तो मिला है लेकिन हमें कुछ बीमारियां भी मिली है जो शरीर को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं. इन बीमारियों में एक डायबिटीज (Diabetes) भी है जिसे हम मधुमेह या शक्कर की बीमारी या फिर शुगर के नाम से भी जानते हैं.

जिस तरह तेजी से जमाना बदल रहा है ठीक उसी तरह तेजी से हमारी लाइफस्टाइल भी बदल रही है. इस बदलती लाइफ स्टाइल से हमें कुछ हद तक मेहनती कामों से आराम तो मिला है लेकिन हमें कुछ बीमारियां भी मिली है जो शरीर को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं. इन बीमारियों में एक डायबिटीज (Diabetes) भी है जिसे हम मधुमेह या शक्कर की बीमारी या फिर शुगर के नाम से भी जानते हैं.

डायबिटीज (मधुमेह) के लक्षण (Diabetes Symptoms)

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो पुरूष या महिला किसी को भी हो सकती है. इसके होने का कारण हमारी बदलती लाइफस्टाइल और खानपान है. अगर हम इनमें संतुलन बना ले तो हम इस बीमारी से काफी हद तक बच सकते हैं. डायबिटीज से कैसे बचे या फिर इसका पता कैसे लगाएं इसके लिए हमें पहले इसके लक्षण पता होने चाहिए.

– बार-बार पेशाब लगना.
– शरीर में दर्द की शिकायत लगातार रहना.
– आपकी त्वचा या प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन का होना.
– घाव होने पर जल्दी न भरना.
– बार-बार प्यास लगना और गला सूखना.
– आंखों की रोशनी का पहले से कम होना.
– वजन का तेजी से बढ़ना या फिर घटना.
– शरीर में थकान और कमजोरी महसूस होना.
– बहुत ज़्यादा भूख लगना.

डायबिटीज के प्रकार (Diabetes type)

डायबिटीज यानि शुगर तीन तरह से इंसान को हो सकती है.

डाइबिटीज टाइप 1 (Type 1 Diabetes)

ये एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है. इसमें बीटा कोशिकाएं इंसुलिन नहीं बना पाती हैं. इसमें डायबिटीज के मरीज को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि शरीर में इंसुलिन की मात्रा सही तरीके से बनी रहे. डाइबिटीज टाइप 1 युवाओं और बच्चों में ज़्यादा देखने को मिलता है.

डाइबिटीज टाइप 2 (Type 2 Diabetes)

इस तरह के डाइबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनने की मात्रा कम हो जाती है. फिर शरीर सही तरीके से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता है.

गर्भावधि डाइबिटीज

ये डाइबिटीज महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय हो सकता है. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. गर्भावस्था में महिलाओं को टाइप 2 डाइबिटीज होने का खतरा ज़्यादा रहता है.

डाइबिटीज का इलाज (Diabetes treatment)

अगर किसी व्यक्ति को शरीर में डाइबिटीज के लक्षण नज़र आ रहे हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और सबसे पहले इस बात का पता लगाना चाहिए कि उसे कौन से टाइप का डाइबिटीज है. डाइबिटीज का इलाज निम्न प्रकार से किया जाता है.

– टाइप 1 और टाइप 2 डाइबिटीज के मरीजों को इंसुलिन के इंजेक्शन देकर उनका इलाज किया जाता है. कई डॉक्टर मरीज को इंसुलिन पंप की सलाह भी देते हैं.

– डाइबिटीज आपको न हो या फिर ये और ज़्यादा न बढ़े इसका सबसे सही इलाज है सही खानपान. किसी व्यक्ति को डाइबिटीज होताहै तो डॉक्टर उसके लिए एक विशेष चार्ट बनाते हैं. उसी के अनुरूप मरीज को आहार लेना चाहिए. खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, टमाटर, केला, संतरा और अंगूर खाने की सलाह दी जाती है.

– खाने-पीने के अलावा डॉक्टर मरीजों को व्यायाम करने की भी सलाह देते हैं. डॉक्टर्स का मानना है कि फिजिकल एक्टिविटी करने से ब्लड में ग्लूकोज लेवल बेलेंस रहता है और आपका शरीर हैल्थी रहता है. डाइबिटीज के मरीजों को ज़्यादा हैवी वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है बल्कि वे सुबह सैर या हल्का-फुल्का व्यायामक र सकते हैं.

– इसके अलावा डाइबिटीज के इलाज के लिए कुछ दवाइयां डॉक्टर द्वारा दी जाती है.

डाइबिटीज के घरेलू उपचार (Diabetes home remedy)

डाइबिटीज को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ घरेलू उपचार भी अपना सकते हैं.

– रोज सुबह खाली पेट करेले के जूस का सेवन करें. इसे बनाने के लिए एक करेला लें. उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं. करेले का पहले जूस बना लें. बाकि का सामान उसमें बाद में डालकर रोज सुबह सेवन करें.

– रोज सुबह एक गिलास गर्म पानी में दालचीनी पाउडर मिलाकर पीएं. दालचीनी एंटी ऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्त्रोत है जिससे डाइबिटीज होने की संभावना कम रहती है.

– रात को दो चम्मच मेथीदाने को दो कप पानी में मिलाएं और उसे गलने दें. अगले दिन मेथीदाने को छान लें और उस पानी को खली पेट पीएं. इससे ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है जो टाइप 2 डाइबिटीज के लिए जरूरी है.

– डाइबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आप आंवले के रस में चुटकीभर हल्दी और शहद मिलाकर उसका सेवन भी कर सकते हैं. इससे आपकी शुगर कंट्रोल में रहेगी.

– टाइप 2 डायबिटीक मरीजों के लिए ग्रीन टी भी काफी मददगार होती है. ग्रीन टी आपके शरीर में मेटाबॉलिक सिस्टम को बढ़ाती है और ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करती है.

डायबिटीज में क्या खाएं? (Food in Diabetes)

डायबिटीज के हो जाने पर आपको खानपान का सबसे ज़्यादा ध्यान रखना पड़ता है. कुछ चीजें है जो आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं और कुछ चीजे ऐसी हैं जो आपको नुकसान पहुंचा सकती है. डाइबिटीज होने पर निम्न चीजे खाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

– हरी पत्तेदार सब्जियां
– केला
– अंडा
– अंगूर
– कीवी

डाइबिटीज में क्या न खाएं? (Avoid food in Diabetes)

डाइबिटीज में कभी भी ऐसी चीजें न खाएं जिनसे आपका शुगर लेवल तेजी से बड़ जाए. डाइबिटीज के होने पर डॉक्टर आपको शक्कर और शक्कर से बनी चीजों से दूर रहने के लिए कहते हैं. डाइबिटीज होने पर आपको निम्न चीजे नहीं खानी चाहिए.

– शक्कर की बनी खाद्य सामग्री
– शहद
– केक, पेस्ट्री और मिठाइयां
– ज्यादा चावल, पास्ता या सफेद ब्रेड
– पैकेज्ड फूड
– ज्यादा नमक का सेवन न करें
– ज़्यादा कॉफी न पीएं
– ज़्यादा तला-भुना न खाएं.

डाइबिटीज से कैसे बचें? (Diabetes prevention)

डाइबिटीज के हो जाने पर आपको उसका इलाज तो करवाना ही पड़ेगा लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपको डाइबिटीज न हो या फिर कंट्रोल में रहे तो आपको निम्न तरीके अपनाना चाहिए.

– सबसे पहले तो आपको अपने वजन का ध्यान रखना चाहिए. आपके उम्र और आपकी ऊंचाई के हिसाब से आपका वजन जितना होना चाहिए उतना ही रखें. वजन के बढ़ने पर तुरंत ध्यान दें और उसे नियंत्रित करने की कोशिश करें.

– डायबिटीज होने के पीछे एक कारण स्ट्रेस यानि तनाव भी है. इसलिए अपने मन को शांत रखें. गुस्सा या स्ट्रेस होने पर पानी पीएं और लंबी और गहरी सांस लें.

– हमारे शरीर को रोगी करने में सबसे बड़ा हाथ नींद का भी होता है. अगर हम पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो हमें डाइबिटीज हो सकती है. साथ ही कई और बीमारियां भी घेर सकती हैं.

– अगर किसी व्यक्ति को डाइबिटीज है तो उसे स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए क्योंकि इससे ह्नदय संबंधित समस्याएं हो सकती है.

– हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज़्यादा जरूरी है कि हम व्यायाम करें. सुबह-सुबह पैदल सैर करें, दौड़े, हल्का-फुल्का व्यायाम करें. कम से कम एक या आधा घंटा व्यायाम के लिए सुबह जरूर दें.

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